16-Day Hunger Strike: जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच 59 वर्षीय जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के अनिश्चितकालीन अनशन को 16 दिन पूरे हो चुके हैं। इस दौरान उनके गिरते स्वास्थ्य के आंकड़ों खासतौर से 8.2 किलोग्राम वजन घटने, ब्लड प्रेशर 107/70 mmHg होने और ब्लड शुगर स्तर गिरकर 67 mg/dL होने से उनकी सेहत को खतरा बढ़ गया है। मारेंगो एशियन हेल्थ केयर, गुड़गांव में डायबिटीज एवं ओबेसिटी विभाग के डायरेक्टर व हेड डॉ. पारस अग्रवाल के अनुसार, इतनी लंबी अवधि तक बिना उचित पोषण के रहने से शरीर में इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन और अंगों पर गहरा असर पड़ना स्वाभाविक है। आइए वैज्ञानिक और चिकित्सकीय दृष्टिकोण से विस्तार से समझते हैं कि आखिर लंबे समय तक भूखा रहने से शरीर के आंतरिक सिस्टम, किडनी, हार्ट और मस्तिष्क पर क्या प्रभाव पड़ता है और यह स्थिति कब मेडिकल इमरजेंसी का रूप ले लेती है।  

8.5 किलो वजन कम होना चिंता का विषय

डॉक्टर ने बताया कि 16 दिनों में लगभग 8.5 किलोग्राम वजन कम होना सामान्य नहीं माना जा सकता। लंबे समय तक भोजन न मिलने पर शरीर पहले ऊर्जा के लिए अपनी बॉडी में मौजूद फैट का उपयोग करता है, लेकिन धीरे-धीरे मांसपेशियों को नुकसान होना शुरू हो जाता है। यह शरीर के लिए नुकसानदायक स्थिति है और इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए।

67 mg/dL ब्लड शुगर क्या खतरनाक है?

डॉक्टर के मुताबिक, सामान्य तौर पर फास्टिंग ब्लड शुगर 70 mg/dL से नीचे नहीं जाना चाहिए। शरीर कई जैविक प्रक्रियाओं के जरिए ब्लड शुगर को इस स्तर के आसपास बनाए रखने की कोशिश करता है। हालांकि 67 mg/dL को लो ब्लड शुगर (हाइपोग्लाइसीमिया) माना जाएगा। लंबे समय तक भोजन न करने की वजह से ब्लड शुगर कम हो सकती है, लेकिन शरीर इसे बनाए रखने के लिए अपने ऊतकों और स्टोर एनर्जी का इस्तेमाल करता है, जिससे शरीर का नुकसान बढ़ता है।

लो ब्लड शुगर होने पर कौन-कौन से लक्षण दिखाई दे सकते हैं?

ब्लड शुगर कम होने पर व्यक्ति को अत्यधिक कमजोरी महसूस हो सकती है। इसके अलावा चक्कर आना, सिर घूमना, हाथों में कंपन, पसीना आना और तेज भूख लगने जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। लेकिन अगर कोई व्यक्ति अनशन पर है, तो वह इन लक्षणों को भोजन करके ठीक नहीं कर पाएगा, जिससे जोखिम और बढ़ सकता है।

ब्लड प्रेशर गिरना डिहाइड्रेशन का संकेत हो सकता है

डॉक्टर पारस ने बताया 107/70 mmHg जैसा ब्लड प्रेशर लंबे अनशन के दौरान शरीर में डिहाइड्रेशन की परेशानी को बढ़ा सकता है।  यदि शरीर को पर्याप्त तरल पदार्थ नहीं मिलते, तो ब्लड प्रेशर और गिर सकता है, जिससे बेहोशी और दूसरी जटिलताओं का खतरा बढ़ जाता है।

इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है

डॉक्टर पारस ने बताया कि लंबे समय तक भोजन और पर्याप्त तरल पदार्थ न लेने से शरीर में सोडियम और पोटैशियम जैसे इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बिगड़ सकता है। इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन शरीर के सामान्य कार्यों को प्रभावित करता है और यह मेडिकल इमर्जेंसी बन सकता है। इसलिए ऐसे मरीजों की नियमित जांच जरूरी होती है।

लम्बे समय तक भूखा रहने से हार्ट, किडनी और ब्रेन पर पड़ सकता है असर

डॉक्टर पारस ने बताया लंबे समय तक अनशन का असर शरीर के लगभग सभी अंगों पर पड़ सकता है। हालांकि सबसे अधिक चिंता हृदय (Heart), किडनी (Kidney) और मस्तिष्क (Brain) को लेकर रहती है। लगातार पोषण और पानी की कमी रहने पर इन अंगों की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है।

किन लक्षणों पर तुरंत अस्पताल ले जाना चाहिए?

यदि अनशन पर बैठा व्यक्ति अत्यधिक कमजोरी महसूस करे, ठीक से बात न कर पाए, बार-बार चक्कर आए, ब्लड प्रेशर बहुत कम हो जाए या उसकी बोलने की क्षमता में बदलाव दिखाई दे, तो यह गंभीर संकेत हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में बिना देरी किए अस्पताल ले जाना चाहिए।

रोजाना कौन-कौन सी जांच जरूरी है?

डॉक्टर के अनुसार, लंबे समय तक अनशन पर रहने वाले व्यक्ति की मेडिकल टीम को नियमित रूप से निगरानी करनी चाहिए। इसमें प्रमुख रूप से निम्न जांचें शामिल हैं

  • ब्लड शुगर की जांच
  • सोडियम-पोटैशियम सहित इलेक्ट्रोलाइट्स की जांच
  • किडनी फंक्शन टेस्ट
  • ब्लड प्रेशर और अन्य वाइटल्स की निगरानी
  • आवश्यकता के अनुसार अन्य ब्लड टेस्ट

अनशन खत्म होने के बाद रिकवरी में समय लगता है

डॉक्टर ने बताया कि लंबे समय तक अनशन के बाद शरीर को सामान्य स्थिति में लौटने में कुछ समय लगता है। रिकवरी की अवधि व्यक्ति की शारीरिक स्थिति, पोषण स्तर और अनशन की अवधि पर निर्भर करती है। इसलिए अनशन समाप्त होने के बाद भी चिकित्सकीय निगरानी और संतुलित पोषण बेहद जरूरी होता है।

क्या हैं प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें?

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा।
कथित परीक्षा अनियमितताओं के कारण आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिजनों को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा।
परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करना।
सीजेपी का यह आंदोलन 20 जून को शुरू हुआ था। संगठन ने 20 जुलाई को संसद तक शांतिपूर्ण मार्च निकालने का भी ऐलान किया है।

डिस्क्लेमर : इस लेख में दी गई स्वास्थ्य संबंधी जानकारी और अनशन के प्रभावों का विश्लेषण मारेंगो एशियन हेल्थ केयर (गुड़गांव) के डॉक्टर पारस अग्रवाल से बातचीत पर आधारित है। लंबे समय तक उपवास या अनशन करने के चिकित्सकीय परिणाम हर व्यक्ति की शारीरिक स्थिति के अनुसार भिन्न हो सकते हैं। कृपया किसी भी प्रकार के दीर्घकालिक उपवास या आहार परिवर्तन से पहले योग्य चिकित्सक या चिकित्सा विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।