Smoking During Pregnancy: गर्भावस्था के दौरान धूम्रपान को अब तक बच्चे के कम वजन और स्वास्थ्य समस्याओं से जोड़ा जाता रहा है, लेकिन कनाडा और नीदरलैंड्स के शोधकर्ताओं की एक नई स्टडी ने इसे बच्चों के व्यवहार से भी जोड़ दिया है। इस रिसर्च के मुताबिक, जो महिलाएं प्रेग्नेंसी के दौरान सिगरेट पीती हैं, उनके बच्चों में आगे चलकर आक्रामक और हिंसक व्यवहार की आशंका बढ़ सकती है। यह अध्ययन प्रतिष्ठित जर्नल Development and Psychopathology में प्रकाशित हुआ है। इस स्टडी में पाया गया कि गर्भावस्था के दौरान धूम्रपान करने वाली माताओं के बच्चों में मारना, काटना, लात मारना, झगड़ा करना और दूसरों को डराने-धमकाने जैसे आक्रामक व्यवहार ज्यादा देखने को मिले। बच्चों की यह पहचान खुद उनकी माताओं ने की, जिन्होंने बताया कि उनके बच्चे बहुत जल्दी गुस्सा करते हैं और हिंसक प्रतिक्रिया देते हैं।

अब तक वैज्ञानिक यह मानते आए हैं कि गर्भ में धूम्रपान करने से बच्चे का वजन कम हो सकता है और शारीरिक विकास पर बुरा असर पड़ता है। लेकिन यह नई रिसर्च बताती है कि इसका असर सिर्फ शरीर तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चे के स्वभाव और व्यवहार पर भी पड़ सकता है। यानी धूम्रपान का नुकसान बच्चे के दिमागी और मानसिक विकास को भी प्रभावित कर सकता है।

कम आय वाली माताओं में ज्यादा खतरा

रिसर्च में एक और अहम बात सामने आई है। जिन परिवारों की सालाना आय 40,000 डॉलर से कम थी और मां गर्भावस्था में धूम्रपान करती थीं, उनके बच्चों में आक्रामक व्यवहार का खतरा और ज्यादा पाया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि आर्थिक तनाव, सीमित संसाधन और सामाजिक दबाव भी इस खतरे को बढ़ा सकते हैं। शोध में यह भी सामने आया कि अगर मां का खुद का इतिहास असामाजिक व्यवहार से जुड़ा रहा हो, तो खतरा और बढ़ जाता है। जैसे कानून से पंगा, स्कूल बीच में छोड़ना, या नशे की आदतें। ऐसी महिलाएं अगर प्रेग्नेंसी के दौरान ज्यादा सिगरेट पीती हैं, तो उनके बच्चों में आक्रामकता की संभावना काफी ज्यादा हो जाती है।

चौंकाने वाला आंकड़ा

स्टडी के सह-लेखक और मनोचिकित्सा प्रोफेसर डॉ. जीन सेगुइन के अनुसार, जिन महिलाओं का असामाजिक व्यवहार का इतिहास रहा है और जो गर्भावस्था में रोज 10 सिगरेट पीती हैं, उनके बच्चों में शारीरिक रूप से आक्रामक होने की संभावना करीब 67 प्रतिशत तक पाई गई। वहीं, जो महिलाएं धूम्रपान नहीं करतीं या 10 से कम सिगरेट पीती हैं, उनके बच्चों में यह खतरा सिर्फ 16 प्रतिशत तक सीमित रहा।

सामान्य माताओं में भी असर

डॉ. सेगुइन का कहना है कि जिन माताओं का असामाजिक व्यवहार लगभग न के बराबर है, उनमें भी धूम्रपान एक नकारात्मक कारक साबित हुआ। हालांकि ऐसे मामलों में असर थोड़ा कम था, लेकिन पूरी तरह नजरअंदाज करने लायक नहीं था। यानी धूम्रपान किसी भी स्थिति में बच्चे के लिए नुकसानदेह हो सकता है।

कैसे की गई स्टडी

यह रिसर्च क्यूबेक लॉन्गिट्यूडिनल स्टडी का हिस्सा थी, जिसमें 1,745 बच्चों को शामिल किया गया। इन बच्चों की उम्र 18 महीने से लेकर साढ़े तीन साल तक थी। इस दौरान बच्चों के व्यवहार, पारिवारिक माहौल और माताओं की आदतों का गहराई से अध्ययन किया गया।

विशेषज्ञों की चेतावनी

विशेषज्ञों का मानना है कि गर्भावस्था के दौरान धूम्रपान सिर्फ मां की सेहत का नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ी के मानसिक और सामाजिक भविष्य का भी सवाल है। बच्चे का शुरुआती व्यवहार आगे चलकर उसके व्यक्तित्व और सामाजिक जीवन को प्रभावित करता है। यह स्टडी साफ संकेत देती है कि गर्भावस्था में धूम्रपान छोड़ना बेहद जरूरी है। खासकर उन महिलाओं के लिए, जो पहले से तनाव, आर्थिक मुश्किलों या व्यवहार संबंधी समस्याओं से जूझ रही हैं। सही समय पर जागरूकता और सहयोग मिलने से न सिर्फ मां, बल्कि बच्चे का भविष्य भी सुरक्षित किया जा सकता है।

निष्कर्ष

गर्भ में पल रहे बच्चे की सेहत सिर्फ खान-पान से नहीं, बल्कि मां की आदतों से भी तय होती है। यह नई रिसर्च एक चेतावनी है कि सिगरेट का धुआं बच्चे के शरीर ही नहीं, उसके स्वभाव को भी नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए स्वस्थ मां, स्वस्थ समाज और बेहतर भविष्य के लिए गर्भावस्था में धूम्रपान से दूरी बेहद जरूरी है।

डिस्क्लेमर

यह स्टोरी सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार की गई है। किसी भी तरह के स्वास्थ्य संबंधी बदलाव या डाइट में परिवर्तन करने से पहले अपने डॉक्टर या योग्य हेल्थ एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।

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