आज के आधुनिक और भागदौड़ भरे लाइफस्टाइल में देर रात तक जागना और सुबह देर से उठना एक सामान्य आदत बन चुकी है। लेकिन क्या आप जानती हैं कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं के शरीर के लिए देर रात तक जागना नुकसानदायक हो सकता है? चिकित्सा विज्ञान कहता है कि महिलाओं का शरीर एक बेहद संवेदनशील हार्मोनल चक्र पर काम करता है, जो सीधे तौर पर हमारी जैविक घड़ी यानी ‘सार्केडियन रिदम’ (Circadian Rhythm) से जुड़ा है।

फोर्टिस अस्पताल में प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग में कंसल्टेंट डॉ. महिमा काक नागपाल ने बताया लगातार देर रात तक जागने या नींद पूरी न होने से शरीर में स्ट्रेस हार्मोन (Cortisol) का स्तर बढ़ जाता है, जो सीधे तौर पर पीरियड्स की अनियमितता (Irregular Periods), PCOD और फर्टिलिटी  को प्रभावित कर सकता है। डॉ. महिमा ने बताया कि महिलाओं के लिए रात 11 बजे से पहले सोना हार्मोनल स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकता है। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि महिलाओं के लिए रात में 11 बजे तक सोना क्यों जरूरी है।

क्यों महत्वपूर्ण है सोने का समय?

नर्चर आईवीएफ क्लिनिक में गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. अर्चना धवन बजाज के मुताबिक आप कितनी देर सोते हैं सिर्फ ये मायने नहीं रखता बल्कि किस समय सोते हैं यह भी उतना ही जरूरी है। शरीर का Circadian Rhythm मेटाबॉलिज्म, प्रजनन क्षमता और संपूर्ण स्वास्थ्य से जुड़े हार्मोनों के स्राव को कंट्रोल करता है। एक्सपर्ट के मुताबिक रात 11 बजे से पहले सोना शरीर की नेचुरल  जैविक घड़ी के अनुरूप होता है। रात के शुरुआती घंटों में शरीर मेलाटोनिन और ग्रोथ हार्मोन जैसे महत्वपूर्ण हार्मोन बनाता है, जो ऊतकों की मरम्मत, मेटाबॉलिज्म के कंट्रोल और प्रजनन स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद करते हैं।

देर रात सोने से महिलाओं के कौन-कौन से हार्मोन होते हैं प्रभावित?

डॉ. बजाज के अनुसार, खराब या अनियमित नींद कई महत्वपूर्ण हार्मोनों को प्रभावित कर सकती है, जिनमें

  • मेलाटोनिन (Melatonin)
  • कोर्टिसोल (Cortisol)
  • ल्यूटिनाइजिंग हार्मोन (LH)
  • फॉलिकल स्टिम्युलेटिंग हार्मोन (FSH)
  • एस्ट्रोजन (Estrogen)
  • प्रोजेस्टेरोन (Progesterone) शामिल है।

मेलाटोनिन हॉर्मोन अंडों (Eggs) की गुणवत्ता को बेहतर बनाए रखने में मदद करता है, जबकि नींद की कमी शरीर में कोर्टिसोल यानी तनाव हार्मोन के स्तर को बढ़ा सकती है। इससे दिमाग, पिट्यूटरी ग्रंथि और अंडाशय के बीच सामान्य हार्मोनल संचार प्रभावित हो सकता है।

क्या नींद की कमी से फर्टिलिटी पर असर पड़ता है?

एक्सपर्ट के मुताबिक लंबे समय तक नींद की कमी या खराब नींद की आदतें महिलाओं में ओव्युलेशन को प्रभावित कर सकती हैं। इससे मासिक धर्म चक्र अनियमित हो सकता है, पीरियड्स के बीच अंतराल बढ़ सकता है और गर्भधारण करने में कठिनाई हो सकती है। डॉ. बजाज का कहना है कि प्रजनन से जुड़े हार्मोन शरीर के सर्केडियन रिदम के साथ तालमेल में काम करते हैं। यदि लंबे समय तक नींद की समस्या बनी रहती है, तो गर्भधारण की कोशिश कर रही महिलाओं की फर्टिलिटी प्रभावित हो सकती है।

PCOS और वजन बढ़ने का भी बढ़ सकता है खतरा

नींद की कमी केवल प्रजनन क्षमता को ही प्रभावित नहीं करती, बल्कि यह मेटाबॉलिक स्वास्थ्य पर भी असर डाल सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार कम नींद लेने से इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ सकता है,वजन बढ़ सकता है और कमर के आसपास चर्बी जमा हो सकती है। इतना ही नहीं रात की कम नींद PCOS के लक्षण गंभीर बना सकती हैं और हार्मोनल असंतुलन बढ़ सकता है। नींद की कमी शरीर में कोर्टिसोल का स्तर बढ़ा देती है, जिससे शरीर इंसुलिन के प्रति कम संवेदनशील हो जाता है और फैट स्टोर करने की प्रवृत्ति बढ़ जाती है।

महिलाओं को रात में कितनी देर सोना जरूरी है?

विशेषज्ञों के मुताबिक महिलाओं को हर रात 7 से 9 घंटे की अच्छी और गुणवत्तापूर्ण नींद लेना जरूरी है।  साथ ही महिलाओं को रोजाना एक निश्चित समय पर सोने और जागने की आदत भी जरूर बनानी चाहिए। अच्छी नींद की आदतें (Sleep Hygiene) हार्मोन संतुलन, मानसिक स्वास्थ्य और प्रजनन क्षमता को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकती हैं।

डिस्क्लेमर: यह लेख विशेषज्ञों की राय और उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या, फर्टिलिटी संबंधी परेशानी या हार्मोनल असंतुलन के लिए डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें।