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देर तक बैठे रहने की आदत से जा सकती है याद्दाश्त, जानिए कैसे करेंगे बचाव

शोधकर्ताओं ने शोध में शामिल लोगों से उनकी शारीरिक सक्रियता तथा पिछले एक हफ्ते के अंदर उनके बैठने की अवधि के बारे में सवाल किया था।
डिमेंशिया में मरीज की याद्दाश्त जाने के साथ उसके व्यवहार में भी काफी परिवर्तन आता है।

बहुत देर तक बैठे रहना आपकी सेहत के लिए सही नहीं है। 40 साल की उम्र पार कर चुके लोगों के लिए खासतौर पर यह बेहद नुकसानदेह होता है। पीएलओएस वन नाम के एक जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में इस बात का दावा किया गया है। अध्ययन में कहा गया है कि मिडिल एज यानी कि 50 साल के आस-पास के लोगों में लगातार बैठे रहने से डिमेंशिया यानी भूलने की बीमारी का खतरा काफी बढ़ जाता है। अध्ययन में 45 साल से 75 साल के तकरीबन 35 लोगों को शामिल किया गया था।

शोधकर्ताओं ने शोध में शामिल लोगों से उनकी शारीरिक सक्रियता तथा पिछले एक हफ्ते के अंदर उनके बैठने की अवधि के बारे में सवाल किया था। बाद में प्रत्येक व्यक्ति के दिमाग के उस हिस्से का एमआरआई स्कैन कर डिटेल्स हासिल की गई जहां नई स्मृतियां बनती हैं। शोधकर्ताओं ने पाया कि बहुत ज्यादा आरामदेह जीवनशैली वाले लोगों के दिमाग में वह हिस्सा काफी पतला था। यह उनके दिमाग में संज्ञानात्मक क्षय का संकेत था। साथ ही यह डिमेंशिया की ओर भी इशारा करने वाला था।

डिमेंशिया में मरीज की याद्दाश्त जाने के साथ उसके व्यवहार में भी काफी परिवर्तन आता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि आरामदेह जीवनशैली को छोड़ तथा शारीरिक सक्रियता बढ़ाकर डिमेंशिया या अल्जाइमर्स जैसे रोगों से बचा जा सकता है। इसके अलावा भी कुछ ऐसे घरेलू तरीके हैं जिससे डिमेंशिया को होने से रोका जा सकता है –

चीनी से करें परहेज – कार्बोहाइड्रेट, रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट तथा मीठा खाने से परहेज करें। इससे दिमागी ऊतक कमजोर होते हैं और आपकी याद्दाश्त पर असर पड़ता है।

हल्दी – हल्दी में कर्कुमिन पाया जाता है। यह डिमेंशिया को होने से रोकने में मददगार है।

नारियल का तेल – नारियल तेल कम वसा वाला फूड है। साथ ही यह दिमाग की सेहत के लिए भी सही होता है। याद्दाश्त तेज करने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

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