मैं डॉ.रंजन शेट्टी, स्पर्श हॉस्पिटल, बेंगलुरु में कार्डियोलॉजिस्ट और मेडिकल डायरेक्टर के पद पर काम करता हूं। आज मैं आपको मैराथन ट्रैक पर दौड़ने वाले खिलाड़ियों को क्यों हार्ट अटैक आता है उनके बारे में विस्तृत जानकारी देना चाहता हूं। बेंगलुरु के 31 साल के सॉफ्टवेयर प्रोफेशनल अमन दीप सिंह जगाड़े की 9 अगस्त को नंदी हिल्स में 21 किलोमीटर की हाफ मैराथन पूरी करते समय कार्डियक अरेस्ट से मौत हो गई। देखने में फिट,हेल्दी और मैराथन से पहले हेल्थ चेकअप भी किए गए तो भी खिलाड़ी को दौड़ते हुए हार्ट अटैक आया। इस घटना के बाद मेरे मन में कई सवाल आए। आखिर एक युवा और अनुभवी एथलीट, जो लंबे समय तक दौड़ने का आदी है, उसे अचानक कार्डियक अरेस्ट कैसे हो सकता है?
 
मैं बताना चाहता हूं कि एक खिलाड़ी जो स्पोर्ट्स में हिस्सा लेता है उसे अपनी बॉडी में दिखने वाले लक्षणों, फैमिली हिस्ट्री और व्यक्तिगत जोखिम कारकों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। देखने में पूरी तरह फिट, रोज मैराथन दौड़ने वाले और अनुशासित जीवन जीने वाले रनर्स भी इन दिनों साइलेंट हार्ट अटैक की चपेट में आ रहे हैं। ट्रैक पर दौड़ते समय अचानक घटने वाली ये घटनाएं न केवल डराती हैं, बल्कि कई सवाल भी खड़े करती हैं। क्या सिर्फ बाहर से फिट दिखना ही हेल्दी हार्ट की गारंटी है? आखिर क्यों अचानक दौड़ते वक्त दिल धोखा दे जाता है?

दौड़ने से पहले खिलाड़ी के कौन-कौन से मेडिकल टेस्ट होते हैं?

किसी भी खिलाड़ी के दौड़ने या किसी बड़ी रेस में हिस्सा लेने से पहले कुछ जरूरी मेडिकल जांचें की जाती हैं। इनमें ECG, ब्लड प्रेशर की जांच और सामान्य शारीरिक जांच शामिल होती हैं। इन टेस्ट से यह पता लगाने की कोशिश की जाती है कि खिलाड़ी का दिल और शरीर दौड़ने के लिए फिट है या नहीं। हालांकि, ये सामान्य जांचें हर तरह की दिल की बीमारी या गड़बड़ी का पता नहीं लगा पातीं। कुछ लोगों में दिल की इलेक्ट्रिकल समस्या या दूसरी अंदरूनी गड़बड़ी बिना किसी लक्षण के छिपी रह सकती है। ऐसे में लंबे समय तक तेज दौड़ने या ज्यादा मेहनत करने पर यह समस्या अचानक सामने आ सकती है, जबकि व्यक्ति को पहले से अपने दिल में मौजूद इस जोखिम की जानकारी भी नहीं होती।

नॉर्मल मेडिकल जांच में दिल की इन बीमारियों का नहीं लगता पता

  1. सामान्य मेडिकल चेकअप में शुरुआती कोरोनरी आर्टरी डिजीज यानी हृदय की धमनियों में बीमारी कई बार बिना किसी लक्षण के रह सकती है। किसी व्यक्ति की कोरोनरी धमनियों में प्लाक जमा होना शुरू हो सकता है, लेकिन उसे कोई लक्षण महसूस न हो। नॉर्मल मेडिकल जांच में इस परेशानी का पता लगना मुश्किल होता है।
  2. यहां तक कि स्ट्रेस टेस्ट भी कभी-कभी नॉर्मल आ सकता है, खासकर तब जब बीमारी ने हृदय तक पहुंचने वाले ब्लड फ्लो को अभी बहुत ज्यादा प्रभावित न किया हो।
  3. हृदय की कुछ संरचनात्मक समस्याएं भी सामान्य जांच में छूट सकती हैं। उदाहरण के लिए हाइपरट्रॉफिक कार्डियोमायोपैथी (Hypertrophic Cardiomyopathy) जिसमें हृदय की मांसपेशियां असामान्य रूप से मोटी हो जाती हैं। इसी तरह कोरोनरी आर्टरीज में जन्मजात असामान्यताएं भी सामान्य शारीरिक जांच में हमेशा स्पष्ट नहीं होतीं।
  4. कुछ हृदय संबंधी बीमारियां मुख्य रूप से हृदय की संरचना के बजाय उसकी इलेक्ट्रिकल सिस्टम को प्रभावित करती हैं। कुछ जेनेटिक हार्ट रिदम डिसऑर्डर ऐसे खतरनाक एरिथमिया यानी अनियमित दिल की धड़कन पैदा कर सकते हैं, जबकि हृदय देखने में पूरी तरह सामान्य हो सकता है।
  5. इन समस्याओं का पता सामान्य चेकअप के दौरान नहीं चल पाता और कभी-कभी इसके लिए कुछ खास कार्डियक या इलेक्ट्रोफिजियोलॉजीकल जांच की जरूरत होती है।

मैराथन के दौरान दिल पर क्या असर पड़ता है?

मैराथन जैसी लंबी दौड़ हृदय और पूरे कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम पर बहुत ज्यादा और लंबे समय तक दबाव डालती है। कई घंटों तक दिल को शरीर की काम कर रही मांसपेशियों तक ऑक्सीजन से भरपूर खून पहुंचाने के लिए लगातार ज्यादा मात्रा में रक्त पंप करना पड़ता है। लंबे समय तक बना यह दबाव हृदय पर काफी तनाव डाल सकता है। खासकर तब जब इसके साथ डिहाइड्रेशन, गर्मी, अत्यधिक थकान या व्यक्ति में पहले से मौजूद कोई हृदय संबंधी समस्या जुड़ी हो।

कम उम्र में मैराथन के दौरान मौत का कारण

कम उम्र के लोगों में अचानक कार्डियक डेथ के संभावित कारणों में कार्डियोमायोपैथी भी शामिल है। यह हृदय की मांसपेशियों से जुड़ी बीमारियों का समूह है, जो हृदय की संरचना, उसकी पंप करने की क्षमता या उसकी इलेक्ट्रिकल स्थिरता को प्रभावित कर सकता है। इनमें से एक प्रमुख बीमारी हाइपरट्रॉफिक कार्डियोमायोपैथी है। यह अक्सर आनुवंशिक होती है और इसमें हृदय की मांसपेशियां असामान्य रूप से मोटी हो जाती हैं। मांसपेशियों के मोटा होने की मात्रा और उसका पैटर्न अलग-अलग लोगों में अलग हो सकता है। कुछ लोगों को इस बीमारी के बारे में पता ही नहीं चलता। वहीं, कुछ लोगों में सांस फूलना, सीने में असहजता या दर्द, दिल की धड़कन तेज या अनियमित होना, चक्कर आना या बेहोशी जैसे लक्षण हो सकते हैं, खासकर एक्सरसाइज के दौरान ये लक्षण परेशान कर सकते हैं।  

हालांकि कुछ लोगों में एरिथमिया यानी अनियमित दिल की धड़कन होने से पहले कोई वार्निंग साइन नहीं दिखाई देते। ऐसी स्थिति में दिल की इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी इतनी तेज या अनियमित हो सकती है कि दिल प्रभावी तरीके से खून पंप करना बंद कर देता है। कार्डियोमायोपैथी की कई स्थितियां आनुवंशिक होती हैं। जरूरी नहीं कि यह बीमारी परिवार की हर पीढ़ी में दिखाई दे। कोई व्यक्ति बीमारी से जुड़े जेनेटिक वेरिएंट का शिकार हो सकता है, लेकिन उसमें इसके बहुत कम या बिल्कुल लक्षण न हों। कम उम्र में कोरोनरी आर्टरी डिजीज की फैमिली हिस्ट्री, आनुवंशिक रूप से बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल, स्मोकिंग, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और अन्य जोखिम कारक कम उम्र में दिल की बीमारी की संभावना को बढ़ा सकते हैं।

डिहाइड्रेशन और इलेक्ट्रोलाइट्स भी बढ़ा सकते हैं जोखिम

शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का असंतुलन भी एक और जोखिम पैदा कर सकता है। सोडियम जैसे इलेक्ट्रोलाइट्स के स्तर में काफी बदलाव दिल की सामान्य इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी को प्रभावित कर सकता है। बहुत ज्यादा डिहाइड्रेशन और जरूरत से ज्यादा पानी पीना, दोनों ही कुछ परिस्थितियों में इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन का कारण बन सकते हैं। इससे दिल की सामान्य धड़कन प्रभावित हो सकती है। इसलिए लंबे समय तक चलने वाली एक्सरसाइज या एंड्योरेंस इवेंट के दौरान उचित मात्रा में हाइड्रेशन जरूरी है। इसके अलावा, बहुत ज्यादा शारीरिक मेहनत, तेज हार्ट रेट और एड्रेनालिन जैसे स्ट्रेस हार्मोन का बढ़ना भी हृदय की इलेक्ट्रिकल स्थिरता को प्रभावित कर सकता है।

अगर किसी व्यक्ति को पहले से कोई हृदय संबंधी बीमारी है या उसकी कोरोनरी आर्टरी में अस्थिर प्लाक मौजूद है, तो शरीर पर पड़ने वाला यह अत्यधिक शारीरिक तनाव गंभीर एरिथमिया या किसी अन्य गंभीर कार्डियक समस्या को ट्रिगर कर सकता है।

क्या शरीर पहले से दिल से जुड़ी बीमारी का कोई संकेत देता है?

कुछ लक्षणों को एक्सरसाइज के दौरान नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। खासकर अगर ये लक्षण बार-बार दिखाई दें,

  • अगर एक्सरसाइज के दौरान सीने में दर्द या दबाव महसूस होता है
  • एक्सरसाइज करते समय बेहोशी या लगभग बेहोश हो जाने जैसी परेशानी हो
  • तेज एक्सरसाइज के दौरान बार-बार चक्कर आना
  • बिना किसी स्पष्ट कारण के दिल की धड़कन तेज या अनियमित होना
  • एक्सरसाइज की तुलना में जरूरत से ज्यादा सांस फूलना ऐसे लक्षण हैं जिन्हें कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। खास तौर पर एक्सरसाइज के दौरान बेहोशी को केवल थकान मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे मामले में डॉक्टर से उचित जांच कराना जरूरी है।

हृदय की जांच में कौन-कौन से टेस्ट किए जा सकते हैं?

  1. हर मैराथन रनर के लिए जांच की कोई एक तय सूची नहीं है। खिलाड़ी की बॉडी में दिखने वाले लक्षण, मेडिकल हिस्ट्री, फैमिली हिस्ट्री और जोखिम के आधार पर डॉक्टर अलग-अलग जांच की सलाह दे सकते हैं।
  2. इकोकार्डियोग्राम (Echocardiogram): टेस्ट जो हृदय के चैंबर, उसकी दीवारों की मोटाई, पंपिंग क्षमता और हृदय की संरचना से जुड़ी अन्य समस्याओं की जानकारी देता है।
  3. CT एंजियोग्राफी: इससे कोरोनरी आर्टरी में मौजूद प्लाक और ब्लॉकेज की स्थिति का आकलन किया जा सकता है।
  4. एक्सरसाइज टेस्ट या स्ट्रेस टेस्ट: इससे एक्सरसाइज के दौरान सामने आने वाली कुछ ऐसी असामान्यताओं का पता लगाने में मदद मिल सकती है, जो आराम की स्थिति में दिखाई नहीं देतीं। यह एक्सरसाइज के दौरान होने वाले लक्षणों का आकलन करने में भी मदद करता है।
  5. होल्टर मॉनिटरिंग: अगर किसी व्यक्ति को दिल की धड़कन तेज या अनियमित होने, बेहोशी या बीच-बीच में होने वाले एरिथमिया की समस्या है, तो होल्टर या लंबे समय तक रिदम मॉनिटरिंग की मदद ली जा सकती है।

एथलीट्स हार्ट’ क्या होता है?

कई वर्षों तक एंड्योरेंस ट्रेनिंग करने से दिल में कुछ बदलाव आते हैं। हृदय के चैंबर थोड़े बड़े हो सकते हैं, हर धड़कन में हृदय ज्यादा खून पंप कर सकता है और आराम की स्थिति में हार्ट रेट काफी कम हो सकता है। हृदय की मांसपेशियों की मोटाई में भी कुछ शारीरिक बदलाव हो सकते हैं। इसे आमतौर पर ‘एथलीट्स हार्ट’ कहा जाता है। यह कोई बीमारी नहीं है। यह लंबे समय तक की जाने वाली शारीरिक ट्रेनिंग के प्रति हृदय का एक सामान्य अनुकूलन है। इसी वजह से किसी एथलीट की ECG या इकोकार्डियोग्राम रिपोर्ट को समझने के लिए उसके खेल, ट्रेनिंग हिस्ट्री, लक्षण, फैमिली हिस्ट्री और हृदय में हुए बदलावों के पैटर्न को ध्यान में रखना जरूरी है।

फिटनेस का मतलब यह नहीं कि दिल पूरी तरह बीमारी से मुक्त है, मैराथन रनर शारीरिक रूप से बेहद फिट हो सकता है, लेकिन सिर्फ फिट दिखना या अच्छा प्रदर्शन करना इस बात की गारंटी नहीं है कि उसका हृदय पूरी तरह स्वस्थ है।