मानसून की विदाई और उमस भरे मौसम के कारण सितंबर में मौसमी बुखार, टाइफाइड और पेट से जुड़ी बीमारियों का जोखिम तेजी से बढ़ जाता है। इस दौरान वातावरण में बैक्टीरिया और वायरस अधिक सक्रिय होते हैं, जो कमजोर इम्यूनिटी और बिगड़े पाचन तंत्र वाले लोगों को तुरंत चपेट में ले लेते हैं। सितंबर और मानसून के दौरान बढ़ी हुई उमस, तापमान में उतार-चढ़ाव और नमी का असर रोजमर्रा की सेहत पर पड़ सकता है। इस मौसम में दूषित पानी और भोजन के कारण पेट से जुड़ी समस्याएं और संक्रमण का जोखिम बढ़ सकता है। हालांकि, यह कहना सही नहीं है कि पूरे सितंबर में शरीर की इम्यूनिटी सबसे कमजोर रहती है या हर व्यक्ति को इस दौरान वायरल फीवर, टाइफाइड या सर्दी-खांसी हो सकती है।  संतुलित आहार, साफ-सफाई, साफ पानी का सेवन और पर्याप्त नींद लेने से हेल्थ को बेहतर बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

डॉ. जे. टी. हेमा प्रतिमा, एमबीबीएस, डायबिटीज मेलिटस में फेलोशिप प्राप्त डॉक्टर ने  Apollo के एक लेख में गंभीर बीमारियों से बचाव और शरीर की इम्यूनिटी को मजबूत रखने के लिए खानपान पर खास ध्यान रखने की सलाह दी है। डॉक्टर ने बताया सितंबर के इस महीने में पाचन को दुरुस्त रखने और इम्यूनिटी को बूस्ट करने के लिए दैनिक डाइट में 5 सुपरफूड्स शामिल करना जरूरी है।  आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि सितंबर के महीने में कौन-कौन से फूड्स का सेवन कर सकते हैं।

मूंग दाल खाएं, हल्का और पौष्टिक प्रोटीन

आयुर्वेद के मुताबिक सितंबर का महीना मानसून के ढलने और शरद ऋतु की शुरुआत का समय होता है। इस समय हवा में नमी और तापमान में उतार-चढ़ाव के कारण पाचन शक्ति (Agni) कमजोर पड़ जाती है, जिससे गैस, ब्लोटिंग, एसिडिटी और भारीपन की समस्या आम हो जाती है। इस मौसम में पाचन को दुरुस्त करने के लिए मूंग की दाल का सेवन सबसे मुफीद मानने के पीछे आयुर्वेद और आधुनिक न्यूट्रिशन साइंस दोनों के ही ठोस वैज्ञानिक कारण हैं। मूंग दाल प्रोटीन, फाइबर और कई जरूरी पोषक तत्वों का अच्छा स्रोत है। इसे आमतौर पर दूसरी कई दालों की तुलना में आसानी से पचने वाला विकल्प माना जाता है। अगर बारिश या उमस के मौसम में गैस, ब्लोटिंग या पाचन संबंधी परेशानी होती है, तो हल्की मूंग दाल या मूंग दाल की खिचड़ी का सेवन करें।

हल्दी वाला दूध पिएं

हल्दी में करक्यूमिन नामक सक्रिय यौगिक पाया जाता है, जिसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं जिनपर कई रिसर्च भी हो चुकी हैं।  हल्दी वाला गर्म दूध एक पौष्टिक ड्रिंक है। हल्दी में थोड़ी मात्रा में काली मिर्च मिलाने से करक्यूमिन के अवशोषण में मदद मिल सकती है। दूध से एलर्जी या लैक्टोज इनटॉलरेंस वाले लोगों को इसका सेवन सावधानी से करना चाहिए। सेंट जॉन्स मेडिकल कॉलेज, बेंगलुरु में Shoba et al. द्वारा की गई एक प्रसिद्ध स्टडी में पाया गया कि हल्दी के साथ काली मिर्च में मौजूद पिपेरिन (Piperine) मिलाने पर शरीर में करक्यूमिन का अवशोषण 2000% (20 गुना) तक बढ़ जाता है। करक्यूमिन शरीर में सूजन पैदा करने वाले अणुओं जैसे NF-kB को ब्लॉक करता है। ये अणु शरीर में अंदरूनी सूजन, जोड़ों के दर्द, मांसपेशियों में खिंचाव और कई पुरानी बीमारियों का कारण बनता है। हल्दी वाले दूध में काली मिर्च का पाउडर मिलाकर पीने से जोड़ों के दर्द से राहत मिलती है।

भीगे हुए बादाम खाएं

बादाम में हेल्दी फैट, प्रोटीन, फाइबर, विटामिन ई और मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। गर्म मौसम में इन्हें भिगोकर खाना सेहत के लिए फायदेमंद होता है। भिगोने से बादाम का फाइटिक एसिड पूरी तरह निकल जाता है। बादाम को भिगोकर या बिना भिगोए, दोनों तरह से संतुलित मात्रा में खाया जा सकता है।

ताजा दही खाएं गट हेल्थ को करेगा सपोर्ट

दही प्रोटीन, कैल्शियम और कुछ उपयोगी बैक्टीरिया का स्रोत हो सकता है। इसमें मौजूद जीवित कल्चर आंतों के माइक्रोबायोम के लिए फायदेमंद हो सकते हैं। ताजा और ठीक तरह से रखा हुआ दही भोजन का हिस्सा बनाया जा सकता है। जिन लोगों को दही खाने से एसिडिटी, गैस या दूसरी परेशानी होती है, उन्हें अपनी सहनशीलता के अनुसार इसका सेवन करना चाहिए।

मौसमी फलों का करें सेवन

पपीता, अमरूद, सेब और नाशपाती जैसे फल फाइबर, विटामिन, मिनरल और विभिन्न पौधों से मिलने वाले एंटीऑक्सीडेंट यौगिकों के स्रोत हैं। फाइबर पाचन तंत्र को हेल्दी रखने और कब्ज से राहत में मदद कर सकता है।  ताजे और अच्छी तरह धोए हुए फल खाना इस मौसम में बेहतर विकल्प है।

अदरक का करें सेवन

सात्विक मूवमेंट की एक वीडियो के मुताबिक सितंबर के महीने में अदरक का सेवन बेहद असरदार साबित होता है। अदरक में जिंजरोल सहित कई जैव सक्रिय यौगिक पाए जाते हैं। इसके सेवन पर पाचन संबंधी परेशानी और मतली जैसे लक्षणों में सुधार करता है।  इसे चाय या भोजन में शामिल किया जा सकता है। बहुत अधिक मात्रा में सेवन करने से कुछ लोगों को सीने में जलन या पेट की परेशानी हो सकती है इसलिए सीमित सेवन करें।

नींबू खाएं और पानी खूब पिएं

नींबू विटामिन C का अच्छा स्रोत है। विटामिन C शरीर के सामान्य इम्यून सिस्टम के कामकाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। शरीर इसे लंबे समय तक बड़ी मात्रा में स्टोर नहीं करता, इसलिए रोजाना डाइट में विटामिन C युक्त खाद्य पदार्थ शामिल करना उपयोगी है। भोजन में नींबू का रस डालने से उसमें मौजूद नॉन-हीम आयरन के अवशोषण में भी मदद मिल सकती है। मानसून के दौरान दूषित पानी से होने वाली बीमारियों का जोखिम बढ़ सकता है। टाइफाइड, हैजा और कुछ अन्य संक्रमण दूषित पानी या भोजन से फैल सकते हैं। इसलिए साफ पानी का सेवन करने पर ध्यान दें। पर्याप्त पानी और नियमित नींद इम्यून सिस्टम के सामान्य कार्य में भी मदद करती है।

सड़क किनारे खुला खाने से बचें

मानसून के दौरान खुले में रखे कटे हुए फल, खुले जूस, अधपका भोजन या लंबे समय से रखा खाना दूषित हो सकता है। इसलिए साफ-सफाई का ध्यान रखते हुए ताजा और अच्छी तरह पका हुआ भोजन खाना बेहतर है। फल और सब्जियों को अच्छी तरह धोकर खाना चाहिए और पीने के लिए साफ पानी का इस्तेमाल करना चाहिए।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के लिए है। किसी भी खाद्य पदार्थ को बीमारी की दवा या इलाज न समझें। अपनी स्वास्थ्य स्थिति, एलर्जी या किसी बीमारी के अनुसार डाइट में बदलाव करने से पहले डॉक्टर या हेल्थ एक्सपर्ट की सलाह लें।