Sawan Vrat and Diabetes Sugar Level Monitoring: अगर आप भी डायबिटीज के मरीज हैं और सावन के पावन महीने में व्रत रखने का विचार बना रहे हैं, तो यह फैसला केवल आस्था तक सीमित नहीं होना चाहिए। डॉक्टर के मुताबिक डायबिटीज में लंबे समय तक भूखे रहने से ब्लड शुगर अचानक बहुत कम (हाइपोग्लाइसीमिया) हो सकता है, जो सेहत के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। डायबिटीज मरीज अगर किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहा है तो ये स्थिति और भी खराब हो सकती है। सावन में कई लोग सोमवार का फास्ट करते हैं तो कुछ लोग पूरे महीने भी फास्ट करते हैं। लेकिन टाइप-1, टाइप-2 या जेस्टेशनल डायबिटीज (Gestational Diabetes) से जूझ रहे मरीजों के लिए  व्रत सेहत पर भारी पड़ सकता है।

सीके बिरला हॉस्पिटल में डायरेक्टर, डायबिटीज़, मोटापा और मेटाबोलिक क्लिनिक के एक्सपर्ट  डॉ. पारस अग्रवाल ने बताया डायबिटीज के मरीजों को आमतौर पर सावन में व्रत रखने से बचना चाहिए। इसकी वजह यह है कि वो नियमित रूप से शुगर की दवाएं या इंसुलिन लेते हैं और लंबे समय तक भूखे रहने से ब्लड शुगर में उतार-चढ़ाव (Fluctuation) का खतरा बढ़ जाता है। हालांकि, यदि किसी धार्मिक कारण से व्रत रखना चाहते है तो मरीज को पहले अपने डायबिटोलॉजिस्ट से सलाह लेनी चाहिए। डॉक्टर मरीज की स्थिति के अनुसार दवाओं, इंसुलिन और ब्लड शुगर मॉनिटरिंग में आवश्यक बदलाव कर सकते हैं, ताकि व्रत के दौरान किसी तरह की गंभीर समस्या न हो। आइए डॉक्टर से जानते हैं कि किन-किन लोगों को सावन में फास्ट करना चाहिए और किन लोगों को परहेज करना चाहिए । डायबिटीज से पीड़ित हर शख्स को कौन-कौन सी बातों का ध्यान रखना चाहिए।

किन मरीजों को व्रत बिल्कुल नहीं रखना चाहिए?

डॉक्टर पारस ने बताया जिन मरीजों को डायबिटीज के साथ किडनी, हार्ट या दूसरी गंभीर बीमारियां हैं, उन्हें व्रत नहीं रखना चाहिए। ऐसे मरीजों में लो ब्लड शुगर और दूसरी जटिलताओं का खतरा अधिक रहता है। इसके अलावा, गर्भवती महिलाओं को भी किसी भी स्थिति में व्रत नहीं रखना चाहिए, क्योंकि इससे मां के साथ-साथ गर्भ में पल रहे बच्चे के पोषण पर भी असर पड़ सकता है। गर्भावस्था में डायबिटीज होने पर डॉक्टर किसी भी तरह की फास्टिंग की सलाह नहीं देते।

टाइप-1 और टाइप-2 डायबिटीज के मरीजों के लिए क्या सलाह अलग होती है?

डॉक्टर पारस ने बताया टाइप-1 और टाइप-2 डायबिटीज के मरीजों के लिए एक जैसी सलाह नहीं होती। टाइप-1 डायबिटीज पूरी तरह इंसुलिन पर निर्भर होती है। ऐसे मरीजों में इंसुलिन की एक भी डोज छूटने पर डायबिटिक कीटोएसिडोसिस (DKA) जैसी गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है। इसलिए टाइप-1 डायबिटीज के मरीजों को आमतौर पर व्रत रखने की सलाह नहीं दी जाती। यदि इंसुलिन लेने वाला मरीज व्रत रखना चाहता है, तो उसे पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। डॉक्टर जरूरत के अनुसार इंसुलिन की डोज कम कर सकते हैं या उसकी टाइमिंग बदल सकते हैं। कई बार अगले दिन की बजाय पिछली रात से ही इंसुलिन की मात्रा एडजस्ट की जाती है, ताकि व्रत के दौरान लो ब्लड शुगर का खतरा कम रहे। मरीज को खुद से इंसुलिन की डोज में बदलाव नहीं करना चाहिए। वहीं टाइप-2 डायबिटीज के मरीजों में यह निर्णय उनकी बीमारी की स्थिति, दवाओं और डॉक्टर की सलाह पर निर्भर करता है, हालांकि डॉक्टर ने इसे भी “बेस्ट अवॉयडेड” यानी फास्ट को टालना ही सही बताया है।

जिनका HbA1c बहुत ज्यादा है, उन्हें क्या करना चाहिए?

डॉक्टर के अनुसार केवल HbA1c के आधार पर यह तय नहीं किया जाता कि कोई व्यक्ति व्रत रख सकता है या नहीं। लेकिन यदि HbA1c अधिक है, तो इसका मतलब है कि डायबिटीज अभी अच्छी तरह कंट्रोल नहीं है। ऐसे मरीजों को व्रत रखने पर ब्लड शुगर की ज्यादा निगरानी करनी होगी। हालांकि डॉक्टर ने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि दवाओं और खानपान के बीच संतुलन बना रहे, क्योंकि व्रत के दौरान यही सबसे बड़ी चुनौती होती है।

बुजुर्ग मरीजों के लिए क्या अलग सलाह है?

डॉक्टर ने अलग से बुजुर्गों का उल्लेख नहीं किया, लेकिन उन्होंने कहा कि जिन मरीजों को कई स्वास्थ्य समस्याएं हैं या जो हाई-रिस्क कैटेगरी में आते हैं, उन्हें फास्ट से बचना चाहिए। ऐसे मामलों में डॉक्टर मरीज की उम्र, बीमारी और दवाओं को देखते हुए व्यक्तिगत सलाह देते हैं।

किडनी, हार्ट या लीवर की बीमारी वाले मरीज रहें सावधान

डॉक्टर पारस के अनुसार, जिन मरीजों को डायबिटीज के साथ किडनी, हार्ट या दूसरी गंभीर बीमारियां हैं, उन्हें बिना डॉक्टर की सलाह के व्रत नहीं रखना चाहिए। इनमें लो ब्लड शुगर और तबीयत बिगड़ने का खतरा ज्यादा रहता है। ऐसे मरीजों के लिए सबसे सुरक्षित विकल्प फास्ट करने से बचना ही है।

लंबे समय तक भूखे रहने से ब्लड शुगर पर क्या असर पड़ता है?

डॉक्टर पारस ने बताया कि लंबे समय तक भोजन न करने से डायबिटीज के मरीजों में सबसे ज्यादा खतरा लो ब्लड शुगर (Hypoglycemia) का होता है, खासकर उन मरीजों में जो ऐसी दवाएं लेते हैं जो शुगर कम करती हैं। वहीं, कई लोग व्रत खोलते समय एक साथ बहुत ज्यादा खाना खा लेते हैं, जिससे ब्लड शुगर अचानक बढ़ भी सकती है। इसलिए दोनों तरह के उतार-चढ़ाव का खतरा रहता है। डॉक्टर के मुताबिक, व्रत के दौरान सबसे बड़ा खतरा Hypoglycemia का होता है क्योंकि मरीज लंबे समय तक कुछ नहीं खाता लेकिन दवा का असर जारी रहता है। वहीं, व्रत खोलने के बाद जरूरत से ज्यादा खाना खाने पर Hyperglycemia यानी ब्लड शुगर बढ़ने की संभावना भी रहती है।

व्रत के दौरान ब्लड शुगर कितनी बार चेक करनी चाहिए?

डॉक्टर ने बताया कि जिन मरीजों का शुगर कंट्रोल ठीक नहीं है या जो व्रत रखते हैं, उन्हें सामान्य दिनों की तुलना में ज्यादा बार ब्लड शुगर मॉनिटर करना चाहिए। इसकी आवृत्ति मरीज की स्थिति और इलाज के अनुसार डॉक्टर तय करते हैं। अगर ब्लड शुगर बहुत कम या बहुत ज्यादा हो जाए तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। ऐसी स्थिति में व्रत जारी रखने से समस्या और बढ़ सकती है। इसलिए मरीज की सुरक्षा सबसे पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।

कौन-सी शुगर रीडिंग आने पर व्रत जारी नहीं रखना चाहिए?

डॉक्टर के अनुसार यदि ब्लड शुगर 70 mg/dL से नीचे चला जाता है तो यह स्पष्ट रूप से Hypoglycemia है और यह खतरनाक स्थिति मानी जाती है। वहीं अगर ब्लड शुगर 200–250 mg/dL से ऊपर पहुंच रहा है, तो भी यह चिंता का विषय है क्योंकि ऐसी स्थिति में दवा या इंसुलिन की जरूरत पड़ सकती है। इसलिए ऐसी रीडिंग आने पर फास्ट करना सुरक्षित नहीं माना जाता। डॉक्टर ने बताया कि व्रत रखने वाले मरीजों में कई बार दवाओं की टाइमिंग बदलनी पड़ती है। उदाहरण के लिए, सुबह ली जाने वाली दवा को व्रत खोलने के बाद रात में लेने की सलाह दी जा सकती है। यह फैसला मरीज की दवा और स्वास्थ्य की स्थिति के आधार पर डॉक्टर लेते हैं। डॉक्टर ने बताया कि व्रत के दौरान लो ब्लड शुगर से बचाने के लिए इंसुलिन की डोज पहले से ही कम या एडजस्ट की जा सकती है। यह बदलाव हमेशा डॉक्टर की निगरानी में होना चाहिए। डॉक्टर ने बताया व्रत रखने से पहले अपने डायबिटोलॉजिस्ट से मिलकर पूरी योजना बनानी चाहिए, ताकि दवाओं, इंसुलिन और ब्लड शुगर मॉनिटरिंग को सुरक्षित तरीके से मैनेज किया जा सके।

क्या डायबिटीज में फलाहार हमेशा सुरक्षित होता है?

डॉक्टर के अनुसार फलाहार सुरक्षित है या नहीं, यह इस बात पर निर्भर करता है कि मरीज क्या खा रहा है, कितनी मात्रा में खा रहा है और उसकी ब्लड शुगर की स्थिति कैसी है। इसलिए डाइटिशियन मरीज के लिए व्यक्तिगत डाइट प्लान तैयार करते हैं और मखाने, फल या अन्य चीजों की मात्रा भी उसी अनुसार तय करते हैं।

क्या शुगर-फ्री मिठाइयां पूरी तरह सुरक्षित हैं?

डॉक्टर का कहना है कि शुगर-फ्री मिठाइयों को पूरी तरह सुरक्षित नहीं कहा जा सकता। इसमें किस प्रकार का आर्टिफिशियल स्वीटनर इस्तेमाल हुआ है, कितना मावा, खोया या फैट है और कुल कैलोरी कितनी है, यह देखना जरूरी होता है। इसके अलावा लोग अक्सर यह सोचकर शुगर-फ्री मिठाई ज्यादा मात्रा में खा लेते हैं कि इसमें चीनी नहीं है, जिससे कुल कैलोरी और कार्बोहाइड्रेट का सेवन बढ़ सकता है। इसलिए ऐसी मिठाइयों का सेवन भी सीमित मात्रा में और सोच-समझकर करना चाहिए।

डिस्क्लेमर : यह लेख सीके बिरला हॉस्पिटल के क्लिनिकल डायरेक्टर एवं एक्सपर्ट डॉ. पारस अग्रवाल से बातचीत पर आधारित है। यह जानकारी केवल जागरूकता के उद्देश्य से साझा की जा रही है। यदि आप डायबिटीज या किसी अन्य गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं, तो सावन का व्रत रखने या अपनी दवाओं,इंसुलिन की खुराक में कोई भी बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर (Diabetologist) से परामर्श जरूर लें।