सावन के महीने में मौसम में बढ़ी नमी, तापमान में उतार-चढ़ाव और पाचन शक्ति के कमजोर होने की वजह से पेट से जुड़ी समस्याएं जैसे अपच, गैस, ब्लोटिंग और कब्ज की शिकायत बढ़ सकती है। आयुर्वेद के अनुसार, इस मौसम में पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है, इसलिए खान-पान पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी जाती है। भारतीय योग गुरु, लेखिका, शोधकर्ता और टीवी पर्सनालिटी डॉ. हंसा योगेंद्र के अनुसार, अगर सावन में सुबह खाली पेट सीमित मात्रा में करी पत्ते (Curry Leaves) का सेवन किया जाए, तो यह पाचन तंत्र को बेहतर बनाए रखने, आंतों की सेहत को सपोर्ट देने और शरीर की इम्यूनिटी को मजबूत करने में मदद कर सकता है। करी पत्ते को दाल, चटनी, सांभर, सब्जी, करी, स्टू या मटन जैसी डिश में शामिल करने से न केवल भोजन का स्वाद बढ़ता है, बल्कि इसके फायदे भी मिलते हैं।
करी पत्ता विटामिन A, विटामिन B समूह, विटामिन C, कैल्शियम, आयरन, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स जैसे कई जरूरी पोषक तत्वों का अच्छा स्रोत माना जाता है। नियमित और संतुलित मात्रा में इसका सेवन पाचन को बेहतर बनाने, आंतों के स्वास्थ्य को बनाए रखने और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से बचाव में मदद कर सकता है। हालांकि, इसे किसी बीमारी के इलाज के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि एक संतुलित और पौष्टिक आहार का हिस्सा माना जाना चाहिए। आइए जानते हैं डॉ. हंसा योगेंद्र के अनुसार सावन के दौरान करी पत्ते का सेवन करने से शरीर को कौन-कौन से फायदे मिल सकते हैं।
इम्युनिटी (Immunity)होती है मजबूत
करी पत्ता का सेवन करने से इम्यूनिटी मजबूत होती है और बॉडी का बीमारियों से बचाव होता है। Journal of Food Science and Technology और Phytotherapy Research में प्रकाशित रिसर्च के मुताबिक करी पत्ता महानिम्बाइन (Mahanimbine), गैलिक एसिड (Gallic Acid) और क्वेरसेटिन (Quercetin) जैसे शक्तिशाली फ्लेवोनोइड्स और अल्कलॉइड्स से भरपूर होता है। ये एंटी-ऑक्सीडेंट्स शरीर में फ्री रेडिकल्स को खत्म करते हैं और सफेद रक्त कोशिकाओं (WBCs)की कार्यप्रणाली में सुधार करके इम्यूनिटी को बूस्ट करते हैं।रोजाना करी पत्ता का सेवन आपकी सेहत पर जादुई असर करता है।
आंतों की सूजन होती है कंट्रोल
रोजाना करी पत्ता का सेवन करने से आंतों की सूजन कंट्रोल रहती है। करी पत्ता पाचन तंत्र के लिए फायदेमंद माना जाता है। इसमें फाइबर, पॉलीफेनॉल, फ्लेवोनॉयड्स और कार्बाजोल एल्कलॉयड्स जैसे कई बायोएक्टिव यौगिक पाए जाते हैं, जिनमें एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण देखे गए हैं। कई प्री-क्लिनिकल रिसर्च में पाया गया है कि ये यौगिक शरीर में सूजन बढ़ाने वाले कुछ रसायनों को कम करने में मदद कर सकते हैं। करी पत्ते में मौजूद फाइबर मल त्याग को नियमित रखने और आंतों के अच्छे बैक्टीरिया (गट माइक्रोबायोटा) को पोषण देने में मदद करता है, जिससे पाचन बेहतर हो सकता है।
डायबिटीज रहती है कंट्रोल
डायबिटीज मरीजों की इम्यूनिटी कमजोर होती है और उनके बार-बार बीमार पड़ने और ब्लड शुगर हाई होने का खतरा ज्यादा रहता है। डायबिटीज मरीज सावन के महीने में करी पत्ते का सेवन करें तो बॉडी का बीमारियों से बचाव होगा और शुगर नॉर्मल रहेगी। करी पत्ता में भरपूर फाइबर होता है जो भोजन के बाद ग्लूकोज के अवशोषण की गति को धीमा कर सकते हैं, जिससे ब्लड शुगर तेजी से बढ़ने से बच सकता है। Journal of Ethnopharmacology (2010) की जानवरों पर की गई रिसर्च के मुताबिक करी पत्ते के अर्क से रक्त शर्करा कम होने और एंटी-डायबिटिक प्रभाव देखे गए हैं।
कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम में होता है सुधार
American Journal of Chinese Medicine में प्रकाशित एक अध्ययन में पाया गया कि करी पत्ते का अर्क कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स (Triglycerides) के स्तर को काफी कम करता है। ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को रोककर यह धमनियों (Arteries) में प्लाक जमने से रोकता है, जिससे हार्ट अटैक और हाई ब्लड प्रेशर (Cardiovascular Diseases) का खतरा कम होता है।
ब्रेन हेल्थ में करते हैं सुधार
Journal of Medicinal Food की एक रिसर्च के मुताबिक, करी पत्ते में पाए जाने वाले कंपाउंड्स मस्तिष्क में ‘एसिटाइलकोलाइन’ (Acetylcholine) नामक न्यूरोट्रांसमीटर के स्तर को बनाए रखने में मदद करते हैं। यह दिमाग में ऑक्सीडेटिव क्षति (Oxidative Stress) को कम करके याददाश्त को बेहतर बनाता है और अल्जाइमर और पार्किंसन जैसी न्यूरोलॉजिकल बीमारियों से दिमाग की रक्षा करता है।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें दी गई जानकारी उपलब्ध वैज्ञानिक अध्ययनों और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है। करी पत्ता डायबिटीज की दवा का विकल्प नहीं है और न ही इससे इलाज का दावा किया जाता है। यदि आपको डायबिटीज या कोई अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्या है, तो अपनी दवा, आहार या जीवनशैली में कोई भी बदलाव करने से पहले डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें।
