दिल के रोगों का इलाज करने वाले कार्डियोलॉजिस्ट की 45 साल की उम्र में ही कार्डियक अरेस्ट से मौत हो गई। रिपोर्ट के मुताबिक रोहत के रहने वाले होली हार्ट हॉस्पिटल के निदेशक डॉ. आदित्य बत्रा ने दिन में दो दिल के मरीजों की सर्जरी की थी, जिसके बाद वो घर लौटे थे। जानकारी के मुताबिक घर में उन्हें सीने में दर्द और बेचैनी की महसूस हुई और वो बाथरूम गए, जहां वो बेहोश होकर गिर गए। आनन-फानन में डॉक्टर को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें लगभग 3 घंटों तक सीपीआर (CPR)देकर उनकी जान बचाने की कोशिश की, लेकिन डॉक्टर आदित्य को बचाया नहीं जा सका। इस घटना ने एक बार फिर से कम उम्र में दिल के रोगों के बढ़ते मामलों पर गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है। अब सवाल ये उठता है कि दिल का इलाज करने वाला डॉक्टर कैसे खुद दिल के रोग का शिकार हो गए? क्या डॉक्टर को अपने बढ़ते कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड की जानकारी नहीं थी, या कार्डियक अरेस्ट के लिए कोई और भी कारण जिम्मेदार था, आइए दिल के डॉक्टर से जानते हैं कि 45 साल में दिल के डॉक्टर की मौत का क्या कारण रहा।
दिल के डॉक्टर की मौत के लिए कौन से कारण हैं जिम्मेदार?
बेंगलुरु के स्पर्श हॉस्पिटल के लीड कार्डियोलॉजिस्ट और मेडिकल डायरेक्टर डॉ. रंजन शेट्टी ने बताया डॉक्टर की मौत के लिए कोई एक ट्रिगर नहीं है, बल्कि लंबे समय तक रहने वाला तनाव जिसे क्रोनिक स्ट्रेस कहते हैं, नींद की कमी, बर्नआउट और अपनी सेहत की लगातार अनदेखी, जो आज मेडिकल पेशे में लगभग नॉर्मल बात बन चुकी है, जिम्मेदार हो सकते हैं।
तनाव कैसे बनता है दिल के लिए खतरा
डॉ. रंजन शेट्टी ने बताया डॉक्टर अक्सर 24 से 36 घंटे तक लगातार ड्यूटी करते हैं। उन्हें हर वक्त जिंदगी और मौत से जुड़े फैसले लेने पड़ते हैं। इस पेशे में डॉक्टर अक्सर समय पर खाना नहीं खा पाते, पर्याप्त नींद नहीं ले पाते और अपना रेगुलर चेकअप भी नहीं कर पाते हैं जो सेहत के लिए एक साथ मिलकर खतरा बनता है। अनियामित डाइट,कम नींद और बर्न आउट जैसी परेशानियां बॉडी में क्रोनिक सूजन को बढ़ा देती है, जिससे वक्त के साथ ब्लड वेसल्स यानी रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचता है। धमनियों में कोलेस्ट्रॉल की परत जमने लगती है और कोरोनरी आर्टरी डिजीज का खतरा बढ़ने लगता है।
तनाव दिल के लिए सबसे बड़ा खतरा
डॉ. रंजन शेट्टी ने बताया तनाव किसी के लिए भी घातक हो सकता है। डॉक्टर की मौत के लिए तनाव भी जिम्मेदार हो सकता है। दिन में दो सर्जरी की और घर आकर तबियत बिगड़ गई, इसके लिए तनाव के दौरान निकलने वाले हार्मोन, जैसे एड्रेनालिन और कोर्टिसोल जिम्मेदार हो सकते हैं। ये तनाव लंबे समय तक ब्लड प्रेशर को हाई रखता हैं और दिल पर अतिरिक्त दबाव डालता हैं।
डॉक्टर बॉडी में दिखने वाले इन लक्षणों को करते हैं अक्सर नजरअंदाज
डॉ. रंजन शेट्टी ने बताया कि डॉक्टर अक्सर अपनी बॉडी में दिखने वाले कुछ लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं। अत्यधिक थकान, हल्का सीने का दर्द, मतली, दिल की धड़कन तेज महसूस होना या चक्कर आने जैसे लक्षणों को वो लम्बे समय की ड्यूटी करने के बाद होने वाली थकान मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, जो गलत है। बॉडी में दिखने वाले ये सभी लक्षण दिल के रोगों की गंभीर समस्या के शुरुआती संकेत भी हो सकते हैं। डॉ. शेट्टी बताते हैं कि दिल के रोग किसी एक कारण से नहीं होते। सिर्फ नियमित एक्सरसाइज कर लेना जोखिम को खत्म नहीं कर सकता। अगर परिवार में दिल के रोगों की फैमिली हिस्ट्री है, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, लगातार तनाव, खराब नींद और लंबे समय तक बैठे रहने जैसी समस्याएं हैं तो ये दिल के लिए खतरा हो सकता है।
दिल के रोगों के लिए सीटिंग जॉब हो सकती है घातक
डॉक्टर शेट्टी बताते हैं कि कोई व्यक्ति रोज सुबह व्यायाम कर सकता है, लेकिन अगर वो दिनभर ऑपरेशन थिएटर, क्लिनिक या ऑफिस में लगातार बैठा रहता है तो इससे भी हृदय रोग का खतरा बना रहता है। तनाव हृदय और रक्त वाहिकाओं पर ऐसे प्रभाव डालता है, जो शुरुआती जांचों में हमेशा दिखाई नहीं देता।
डॉक्टर कैसे रखें सेहत का ध्यान
डॉ. शेट्टी कहते हैं कि डॉक्टरों को भी अपनी सेहत का ध्यान रखना चाहिए। उनके मुताबिक, डॉक्टरों के लिए पर्याप्त नींद, उचित काम के घंटे, नियमित प्रिवेंटिव हेल्थ चेकअप, तनाव कंट्रोल, ड्यूटी के दौरान पौष्टिक भोजन की उपलब्धता और ऐसा माहौल जहां डॉक्टर खुद भी समय पर इलाज लेने में संकोच न करें मौजूद होना जरूरी है। डॉ. शेट्टी बताते हैं कि अक्सर डॉक्टर कम नींद सोने की बात को गर्व से डिस्कस करते हैं जो पूरी तरह गलत है। लगातार जरूरत से ज्यादा काम करना धीरे-धीरे आपके शरीर को नुकसान पहुंचा रहा है और आपकी क्वालिटी को नुकसान पहुंचा रहा है।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। किसी भी स्वास्थ्य संबंधी समस्या या लक्षण के दिखने पर तुरंत अपने डॉक्टर या विशेषज्ञ से परामर्श लें।
