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घुटनों के प्रत्यर्पण में इन बातों के हो सकते हैं खतरे

डॉक्टरों का मानना है कि घुटना प्रत्यारोपण कराने से पैरों में खून का थक्का जमने का जोखिम होता है। यह खून का थक्का फेफड़ों तक पहुंच सकता है। इससे सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द और कभी-कभी शॉक आने की आशंका भी रहती है।

प्रतीकात्मक तस्वीर

भारत समेत पूरी दुनिया में हर साल कई लोग अपने घुटने का प्रत्यारोपण कराते हैं। घुटना प्रत्यारोपण कराने वालों में सिर्फ 70 की आयु वाले बुजुर्ग ही नहीं, बल्कि 50 की आयु के ऐसे मरीज भी हैं जो अपनी जिंदगी को लंबे समय तक सक्रिय बनाए रखना चाहते हैं। कुछ मामलों में कम उम्र के मरीजों को भी चोट, कम उम्र में ही अर्थराइटिस या पैदाइशी हड्डी विकार के कारण घुटना प्रत्यारोपण सर्जरी की जरूरत पड़ जाती है। लेकिन डॉक्टरों का मानना है कि कई बार घुटना प्रत्यारोपण मरीज के लिए घातक भी साबित हो सकता है।

डॉक्टरों का मानना है कि घुटना प्रत्यारोपण कराने से पैरों में खून का थक्का जमने का जोखिम होता है। यह खून का थक्का फेफड़ों तक पहुंच सकता है। इससे सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द और कभी-कभी शॉक आने की आशंका भी रहती है। इसके अलावा घुटना प्रत्यारोपण से कुछ और खतरे भी हो सकते हैं। इससे कभी-कभी Urinary tract infection, nausea और vomiting होने की आशंका भी होती है। घुटने में लंबे समय तक दर्द, घुटने के जोड़ों में रक्त का बहाव और घुटने में इनफेक्शन होने की वजह से दोबारा ऑपरेशन की जरूरत पड़ सकती है। इसके अलावा anesthesia से हार्ट, फेफड़ा, किडनी और या फिर लीवर के डैमेज होने का खतरा भी रहता है।

आपको बता दें कि घुटने में कार्टिलेज की परत हड्डियों के ऊपर प्लास्टर की तरह लगी होती है जो घुटने में हड्डी की रगड़ से बचाती है.I आर्थराइटिस में इसी घुटने की कार्टिलेज में खराबी आ जाती है जिसकी वजह से कार्टिलेज हड्डी पर से उखड जाती हैI कार्टिलेज में दोबारा ठीक होने की क्षमता नहीं होती I कार्टिलेज उखड़ जाने से घुटने में हड्डी से हड्डी रगड़ खाने लगती है, जिसकी वजह से सूजन आ जाती है और दर्द होने लगता है।

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