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गर्भपात झेल चुकी महिलाओं में बढ़ जाता है स्ट्रोक का खतरा, जानिए क्या कहता है शोध

गर्भपात या मृत शिशु को जन्म देने से महिलाओं में बढ़ सकता है स्ट्रोक का खतरा, शोध में हुआ यह बड़ा खुलासा

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32 से 73 साल की महिलाओं को स्ट्रोक का ज्यादा खतरा (Image: Freepik)

हाल ही में हुए एक नए शोध में इस बात का खुलासा हुआ है कि जिन महिलाओं का कई बार गर्भपात हुआ हो या जिन्होंने मृत बच्चे को जन्म दिया हो ऐसी महिलाओं में स्ट्रोक होने का खतरा बढ़ जाता है। दरअसल जब आर्टरी ब्लॉकेज के कारण हमारे दिमाग तक रक्त नहीं पहुंचता हैं तो ऐसी स्थिति में स्ट्रोक का खतरा हो जाता है और साथ ही ज्यादा बार हुए गर्भपात व मृत बच्चे के जन्म से भी महिलाओं में स्ट्रोक का खतरा बढ़ने लगा है।

लेकिन कभी-कभी कई महिलाएं इस बात से अनजान होती हैं कि गर्भावस्था के दौरान अनुभव उनके स्वास्थ्य के लिए खतरा भी हो सकते हैं। ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन में यह भी कहा गया है कि स्ट्रोक के बढ़ते जोखिम के साथ डॉक्टरों को भी महिलाओं के स्वास्थ्य के प्रति अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। डॉक्टर को समय-समय पर गर्भवती महिलाओं की जांच करते रहना चाहिए और महिलाओं को भी अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना चाहिए।

इसके अलावा यह भी संभव है कि बांझपन, गर्भपात से भी महिलाओं में स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है। इनमें अंतःस्रावी विकार, मोटापा, खराब स्वास्थ्य देखभाल, धूम्रपान शामिल हो सकते हैं, इन सभी कारणों से स्ट्रोक का खतरा भी बढ़ सकता है।

गर्भपात के कारण बढ़ता स्ट्रोक: गर्भपात के कारण स्ट्रोक का खतरा बढ़ रहा है यह पता लगाने के लिए विभिन्न देशों की 618,851 महिलाओं पर शोध किया गया। जिनमें से अधिकांश चीन, जापान, अमेरिका, नीदरलैंड और कई अन्य देशों की महिलाएं शामिल हैं। साथ ही शोध में शामिल महिलाओं की उम्र 32-73 साल के बीच थी और 11 साल तक उनका पालन किया गया। महिलाओं पर इस शोध में एकत्र किए गए आंकड़ों से पता चला कि 2.8 प्रतिशत महिलाएं गैर-घातक स्ट्रोक से पीड़ित थीं, 0.7 प्रतिशत महिलाओं को घातक स्ट्रोक था।

वहीं गर्भपात कराने वाली महिलाओं की संख्या 16.2 प्रतिशत, मृत बच्चे को जन्म देने वाली महिलाओं की संख्या 4.6 प्रतिशत रही। साथ ही प्रत्येक गर्भपात के साथ स्ट्रोक का खतरा बढ़ गया था। जिनमें से 3 या अधिक गर्भपात वाली महिलाओं में गैर-घातक स्ट्रोक का जोखिम 35 प्रतिशत तक था। उन महिलाओं में घातक स्ट्रोक का जोखिम, जिन्होंने दूसरा गर्भपात किया था; उनमें 82 प्रतिशत तक था।

रिस्क फैक्टर को कम करें: इस रिसर्च में उन रिस्क फैक्टर्स का भी परीक्षण किया गया, जिन्हें हम जानते हैं, जैसे धूम्रपान करने वाली महिलाएं, हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज से पीड़ित हैं। तो हम इस तरह के रिस्क फैक्टर को कम कर सकते हैं और गर्भपात और मौत का कारण बन सकते हैं। पैदा होने वाले बच्चों की संख्या भी कम कर सकते हैं, अगर महिलाओं में गर्भपात का खतरा कम हो जाता है, तो निश्चित रूप से स्ट्रोक का खतरा भी कम हो जाएगा।

इन बातों का रखें ध्यान: इस शोध में यह भी पाया गया है कि गर्भपात और मृत बच्चे को जन्म देने वाली महिलाओं में भी हृदय रोग का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए ऐसी महिलाओं को हमेशा अपने डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए और अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना चाहिए साथ ही समय-समय पर अपना स्वास्थ्य परीक्षण भी करवाना चाहिए।

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