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यौन संपर्क से फैलते हैं यौन संचारित रोग, जानिए क्या होते हैं इनके लक्षण

यौन संचारित रोग यौन संपर्क के माध्यम से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में संचारित होते हैं।
यौन संचारित रोगों के लक्षण कई दिनों या हफ्तों के बाद दिखाई दे सकते हैं।

शारीरिक संबंध बनाने के तमाम फायदे शोधों द्वारा प्रमाणित किए जा चुके हैं। इससे ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में तो मदद मिलती ही है साथ ही मूड ठीक करने में, दिल की सेहत को दुरुस्त रखने में और दमकती त्वचा के लिए भी यह काफी फायदेमंद होता है। लेकिन इसके केवल फायदे ही नहीं होते। सेक्शुअल कॉन्टैक्ट कभी-कभी आपके लिए परेशानियां भी खड़ी कर सकता है। यौन संचारित रोग यौन संपर्क के माध्यम से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में संचारित होते हैं। इसके बारे में अधिकांश लोगों को बहुत ज्यादा जानकारी नहीं होती जिसकी वजह से कई बार स्थिति गंभीर हो जाने तक लोग इनका इलाज कराने से हिचकते हैं। तो चलिए, आज हम आपको यौन संचारित रोगों के कुछ लक्षणों रे बारे में बताते हैं जिनकी जानकारी रखना आपके लिए बहुत जरूरी है।

1. यौन संचारित रोगों के लक्षण कई दिनों या हफ्तों के बाद दिखाई दे सकते हैं। कभी-कभी ऐसा भी होता है कि एसटीडी यानी यौन संचारित रोगों से संक्रमित व्यक्ति में इसके लक्षण दिखाई न दें। ऐसा होने पर भी रोगी अन्य किसी को संक्रमित कर सकता है।

2. गर्भवती महिलाओं में भी एसटीडी यानी कि सेक्शुअल ट्रांसमिटेड डिसीज होने की काफी संभावना होती है। ऐसे में प्रीमैच्योर डिलीवरी, प्रसव बाद मूत्र मार्ग में संक्रमण आदि लक्षण प्रकट होते हैं।

3. यौन संचारित रोग होने पर महिलाओं में जननांगों के पास खुजली तथा योनि से स्राव के लक्षण दिखाई पड़ते हैं। इसके अलावा पुरुषों के जननांग से भी स्राव एसटीडी के लक्षण हैं।

4. एसटीडी की वजह से अनेक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं जन्म लेती हैं। इनकी वजह से इन्फर्टिलिटी, प्रेग्नेंसी संबंधी दिक्कत या फिर कैंसर जैसी बीमारियां भी हो सकती हैं।

5. एसटीडी के दौरान शारीरिक संबंध बनाने पर तथा पेशाब करते समय तकलीफ होती है।

6. जननांगों के आसपास दर्द रहित लाल जख्म भी यौन संचारित रोगों के ही लक्षण होते हैं। इसके अलावा जननांगों के आसपास फोड़े, घाव, दाने या छाले भी इस रोग के लक्षण हो सकते हैं।

7. महिलाओं में शारीरिक संबंध बनाने के बाद रक्त स्राव तथा योनि से बदबू आना भी यौन संचारित रोग का ही लक्षण है।

8. यौन संचारित रोग होने की संभावना 15-24 वर्ष की आयु वाले वयस्कों को ज्यादा होती है। इसके अलावा जो अपने जननांगों को साफ नहीं रखते तथा संबंध बनाते वक्त सावधानी नहीं बरतते उन्हें भी यह रोग होने की संभावना अधिक होती है।


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