राजगीर (Amaranth या रामदाना) को अक्सर हम सिर्फ व्रत या उपवास के फलाहार के रूप में देखते हैं। लेकिन न्यूट्रिशन और मेडिकल साइंस के नजरिए से, यह भारत का अगला सबसे बड़ा ‘ग्लोबल सुपरफूड’ बनने की पूरी काबिलियत रखता है। यह न सिर्फ पूरी तरह ग्लूटन-फ्री (Gluten-free) है, बल्कि इसमें मौजूद हाई फाइबर, प्रोटीन और एंटीऑक्सीडेंट्स इसे पेट, दिल और डायबिटीज के मरीजों के लिए एक अचूक दवा बनाते हैं। ISIC Multispeciality हॉस्पिटल, वसंत कुंज में गैस्ट्रो साइंसेज विभाग के डायरेक्टर एवं हेड और वरिष्ठ गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. शुभम वात्स्य ने बताया राजगीर पोषक तत्वों से भरपूर एक ऐसा खाद्य पदार्थ है, जिसे भारत का अगला सुपर फूड कहा जा सकता है।
डॉ. शुभम वात्स्य बताते हैं कि एक कप पका हुआ राजगीर में लगभग 9 ग्राम प्रोटीन और 5 ग्राम डाइटरी फाइबर होता है जो पाचन के लिए जरूरी है। यह अनाज प्राकृतिक रूप से ग्लूटेन-फ्री होता है, इसलिए ग्लूटेन से एलर्जी या संवेदनशीलता वाले लोगों के लिए भी अच्छा विकल्प हो सकता है। राजगीर में लाइसिन (Lysine) नामक अमीनो एसिड पाया जाता है, जो कोलेजन बनाने, कैल्शियम के अवशोषण, ऊतकों की मरम्मत और मांसपेशियों की रिकवरी में अहम भूमिका निभाता है। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि इस दूसरे सुपर फूड को खाने से सेहत को कौन-कौन से फायदे होते है।
पेट की सेहत के लिए क्यों फायदेमंद है राजगीर?
डॉ. वात्स्य के मुताबिक राजगीर में मौजूद फाइबर आंतों की गति (Gut Motility) को बेहतर बनाने में मदद करता है। इससे कब्ज की समस्या कम हो सकती है, लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस होता है और ओवरईटिंग की संभावना घटती है। साथ ही इसमें मौजूद फाइबर कार्बोहाइड्रेट के अवशोषण की गति को धीमा करता है, जिससे भोजन के बाद ब्लड शुगर तेजी से नहीं बढ़ता।
हड्डियों और खून के लिए है जरूरी
राजगीर में कई जरूरी मिनरल्स पाए जाते हैं, जिनमें कैल्शियम, मैग्नीशियम, आयरन, फॉस्फोरस, मैंगनीज जैसे सभी पोषक तत्व मौजूद होते हैं जो हड्डियों को मजबूत बनाते हैं। इस अनाज का सेवन करने से मांसपेशियों को कामकाज करने में मदद मिलती है। ये अनाज हीमोग्लोबिन बढ़ाने और शरीर में ऊर्जा उत्पादन में मदद करता हैं।
दिल की सेहत का भी रखता है ख्याल
डॉ. वात्स्य के अनुसार राजगीरा में मौजूद फाइटोस्टेरॉल्स (Phytosterols) और फाइबर LDL यानी बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद कर सकते हैं। इससे लंबे समय में दिल के रोगों का खतरा कम हो सकता है।
राजगीर को डाइट में कैसे करें शामिल?
डॉ. वात्स्य सलाह देते हैं कि राजगीर के आटे को गेहूं के आटे में मिलाकर रोटियां बनाई जा सकती हैं। इसके अलावा इसे कई तरह से खाया जा सकता है जैसे राजगीर की खिचड़ी, दलिया, चीला, पुलाव, फूला हुआ राजगीर नाश्ते में खाया जा सकता है।
क्या वाकई राजगीर सुपरफूड है?
कंसल्टेंट डाइटीशियन और डायबिटीज एजुकेटर,कनिका मल्होत्रा के अनुसार रोजगार वास्तव में स्यूडो सीरियल (Pseudocereal) है, यानी यह पारंपरिक अनाज नहीं है। इसकी खासियत यह है कि इसमें कंप्लीट प्रोटीन पाया जाता है और यह लाइसिन से भरपूर होता है, जो गेहूं और चावल जैसे अनाजों में कम मात्रा में मिलता है। उनके मुताबिक राजगीर में गेहूं और चावल की तुलना में लगभग दोगुना प्रोटीन होता है। साथ ही इसमें कैल्शियम, आयरन और मैग्नीशियम भी अधिक मात्रा में पाए जाते हैं। इसमें मौजूद घुलनशील और अघुलनशील दोनों प्रकार के फाइबर ब्लड शुगर को कंट्रोल रखने में मदद कर सकते हैं। कनिका मल्होत्रा ने बताया ‘सुपरफूड’ कोई चिकित्सीय (Clinical) शब्द नहीं, बल्कि मार्केटिंग टर्म है। कोई भी एक खाद्य पदार्थ अकेले किसी बीमारी को ठीक नहीं कर सकता। हेल्दी रहने के लिए संतुलित और विविध आहार लेना सबसे जरूरी है। राजगीर को अन्य साबुत अनाजों के साथ बदल-बदलकर खाना अधिक फायदेमंद रहेगा।
रोज कितना राजगीर खाना चाहिए?
कनिका मल्होत्रा के अनुसार प्रतिदिन 30 से 45 ग्राम राजगीर पर्याप्त है। या हफ्ते में 3–4 बार एक कप पका हुआ राजगीर खाया जा सकता है।
इसे धीरे-धीरे डाइट में शामिल करें, क्योंकि अचानक अधिक मात्रा में खाने से फाइबर के कारण गैस या पेट फूलने की समस्या हो सकती है।
किन लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए?
विशेषज्ञों के मुताबिक जिन लोगों को किडनी स्टोन, क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD) या डॉक्टर ने कम फास्फोरस या कम पोटैशियम वाली डाइट लेने की सलाह दी है, उन्हें नियमित रूप से राजगीर खाने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। राजगीरा में ऑक्सालेट्स (Oxalates) पाए जाते हैं, जो कुछ लोगों में कैल्शियम ऑक्सालेट स्टोन बनने का जोखिम बढ़ा सकते हैं।
डिस्क्लेमर: यह लेख विशेषज्ञों द्वारा दी गई जानकारी पर आधारित है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या, विशेष डाइट या बीमारी की स्थिति में अपनी डाइट में बदलाव करने से पहले डॉक्टर या रजिस्टर्ड डाइटीशियन से सलाह अवश्य लें।
