तपती गर्मी के बाद मानसून की पहली बारिश हर किसी को राहत का अहसास कराती है, लेकिन ये सुहावना मौसम अपने साथ कई तरह के संक्रमण, पेट की बीमारियां, फ्लू और फंगल इंफेक्शन का खतरा भी लाता है। आयुर्वेद के अनुसार वर्षा ऋतु में शरीर का वात दोष असंतुलित हो जाता है और हमारी जठराग्नि यानी पाचन क्रिया कमजोर पड़ जाती है। ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी हो जाता है कि इस मौसम में हमारा खान-पान और जीवनशैली कैसी होनी चाहिए।
भारतीय योग गुरु, लेखक, शोधकर्ता और टीवी पर्सनालिटी डॉक्टर हंसा योगेंद्र के मुताबिक बारिश का मौसम अपने साथ कई बीमारियां जैसे सर्दी-जुकाम, बुखार, पेट की गड़बड़ी, एसिडिटी, फंगल इंफेक्शन और सुस्ती जैसी कई स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम लाता है। हंसा जी ने बताया इस मौसम में पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है और थोड़ी सी लापरवाही बीमारी का कारण बन सकती है। एक्सपर्ट ने बारिश में बॉडी का बीमारियों से बचाव करने के लिए कुछ खास नियमों को अपनाने की सलाह दी है। आइए एक्पर्ट से जानते हैं कि बारिश के मौसम में लाइफस्टाइल और डाइट में कौन-कौन से बदलाव किए जाएं।
बारिश के दिनों में जरूर अपनाएं ये खास टिप्स
- एक्सपर्ट ने बताया बरसात के दिनों में बारिश में भीगना लगा ही रहता है। अगर आप इस मौसम में बारिश में भीग जाए तो घर पहुंचते ही गीले कपड़े बदल लें। पैरों को कुछ मिनट तक गुनगुने पानी में रखें या हीटिंग पैड से पैरों की हल्की गर्म सिकाई करें। इससे शरीर को गर्माहट मिलती है और सर्दी-जुकाम का खतरा कम हो सकता है।
- बारिश में भीगने के बाद गीले कपड़े पहनकर एसी या तेज पंखे के नीचे नहीं बैठें। ऐसा करने से शरीर का तापमान तेजी से गिर सकता है, जिससे सर्दी, खांसी और श्वसन संबंधी संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए पहले शरीर और बाल अच्छी तरह सुखाएं, फिर ही पंखे या एसी का इस्तेमाल करें।
- आयुर्वेद के अनुसार वर्षा ऋतु में दिन में लंबे समय तक सोने से बचना चाहिए। इससे पाचन शक्ति कमजोर हो सकती है और मेटाबॉलिज्म धीमा पड़ सकता है। अगर आप बहुत ज्यादा थकान महसूस कर रही हैं तो 15–20 मिनट का छोटा नैप लिया जा सकता है, लेकिन लंबी नींद से बचना बेहतर है।
- बारिश के मौसम में शरीर को सक्रिय रखना जरूरी है। कुछ योगासन जैसे डायनेमिक योगासन, अनुलोम-विलोम, कपालभाति और कुंभक जैसे प्राणायाम शरीर में गर्माहट बनाए रखने और मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं। नियमित शारीरिक गतिविधि इस मौसम में सुस्ती कम करने में भी मददगार होती है।
बारिश में खानपान कैसा होना चाहिए?
आयुर्वेद के अनुसार मानसून में हमेशा ताजा और गर्म भोजन करना चाहिए। गुनगुना पानी पीना, भोजन में अदरक, लहसुन, काली मिर्च और सीमित मात्रा में घी शामिल करना फायदेमंद माना जाता है। पानी हमेशा उबालकर ठंडा किया हुआ पीना बेहतर होता है।
इन चीजों से बनाएं दूरी
बारिश के मौसम में बासी भोजन, फ्रिज में लंबे समय से रखा खाना, अधिक तला-भुना, ज्यादा मसालेदार भोजन, कच्ची सब्जियां, सलाद और अधिक मात्रा में फर्मेंटेड फूड से बचने की सलाह दी जाती है। इससे पाचन संबंधी समस्याओं का खतरा कम हो सकता है। दही पाचन के लिए अच्छा माना जाता है, लेकिन बारिश के मौसम में रात के समय खट्टा दही खाने से बचना चाहिए। दही खाना हो तो इसे नाश्ते या दोपहर के भोजन में लेना अधिक उपयुक्त माना जाता है।
फंगल इंफेक्शन से बचने के लिए पैरों की करें देखभाल
बारिश में पैरों की उंगलियों के बीच नमी बनी रहती है, जिससे फंगल इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। बाहर से आने के बाद पैरों को अच्छी तरह धोकर और सुखाकर रखें। उंगलियों के बीच की त्वचा को भी सूखे कॉटन के कपड़े से अच्छी तरह पोंछें।
डिस्क्लेमर: यह लेख आयुर्वेद विशेषज्ञ द्वारा साझा की गई जानकारी पर आधारित है। इसमें बताए गए सुझाव सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के उद्देश्य से हैं। किसी भी स्वास्थ्य समस्या, बीमारी या दवा के संबंध में इन्हें चिकित्सा सलाह का विकल्प न मानें। यदि आपको पहले से कोई गंभीर बीमारी है, आप गर्भवती हैं या किसी तरह का उपचार ले रहे हैं, तो किसी भी उपाय को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें।
