देश में नकली दवाओं की बिक्री पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। जल्द ही कैंसर की दवाओं, वैक्सीन, एंटीबायोटिक, नारकोटिक्स और साइकोट्रोपिक दवाओं के प्रत्येक पैक पर यूनिक QR कोड लगाना अनिवार्य होगा। इस QR कोड की मदद से दवा की फैक्ट्री से लेकर मरीज तक की पूरी यात्रा (Track and Trace) को ट्रैक किया जा सकेगा, जिससे नकली दवाओं की पहचान आसान होगी और मरीजों की सुरक्षा बढ़ेगी। स्वास्थ्य मंत्रालय की 22 जून की राजपत्र (Gazette) अधिसूचना के अनुसार यह व्यवस्था चरणबद्ध तरीके से लागू की जाएगी।
सरकार की योजना है कि जुलाई 2027 तक सभी कैंसर की दवाओं, वैक्सीन, नारकोटिक्स और साइकोट्रोपिक दवाओं पर QR कोड अनिवार्य हो जाए। जुलाई 2028 तक यह नियम एंटीमाइक्रोबियल (Antimicrobial) दवाओं पर भी लागू कर दिया जाएगा। सरकार ने दवा कंपनियों को पुरानी दवाओं को बेचने के लिए पर्याप्त समय दिया है उसके बाद ही नई पैकेजिंग अपनाई जाएगी।
दवाओं के QR Code में क्या-क्या जानकारी होगी?
अक्सर देखा गया है कि कंपनियां अपने प्रोडक्ट पर QR कोड तो देती है लेकिन वो स्कैन नहीं होता, ऐसा अक्सर नकली दवाओं और नकली प्रोडक्ट पर देखा जाता है। नकली दवाओं पर रोक लगाने के लिए सरकार हर दवा के पैक पर QR कोड की मदद से दवा से जुड़ी सारी जानकारी देगी। ये QR कोड केवल एक सामान्य बारकोड नहीं होगा, बल्कि उसमें उस दवा की पूरी पहचान दर्ज होगी। QR Code की मदद से खरीदार दवा की यूनिक पहचान संख्या (Unique Identification Number) जान सकता है।
- दवा के निर्माता (Manufacturer) का नाम और उसका पता
- दवा किस डेट में बनाई गई है (Manufacturing Date)
- एक्सपायरी डेट (Expiry Date) कब है
- दवा का बैच नंबर क्या है, दवा से जुड़ी ये सारी जानकारी दी जाएगी ।
- दवा की पूरी जानकारी देने के पीछे सरकार का मकसद नकली दवाओं की ब्रिक्री पर अंकुश लगाना है। दवा पर QR Code के जरिए मौजूद उसकी जानकारी उस दवा की कॉपी बनाने पर अंकुश लगा सकती है।
दवा के निर्माण की पूरी जानकारी होगी ट्रैक
सरकार के इस डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम से ये पता लगाना आसान होगा कि दवा किस फैक्ट्री में बनी है और इसे किन डिस्ट्रीब्यूटर्स और सप्लाई चैन से होकर गुजरी है। अभी ज्यादातर दवाओं पर सिर्फ उनका बैच नंबर होता है, जिसे नकली दवा बनाने वाले आसानी से कॉपी कर लेते हैं। लेकिन हर दवा पर अलग QR कोड होने से ऐसा करना कठिन होगा।
सरकार को यह फैसला क्यों लेना पड़ा?
पिछले कुछ सालों में नकली दवाओं और मिलावटी दवाओं के कई मामले सामने आए हैं, खासतौर पर कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं में। मिलावटी दवाएं मरीजों की जान को खतरे में डाल सकती है। जांच एजेंसियों ने ऐसे कई मामलों को दर्ज किया है जिसमें कुछ गिरोह अस्पतालों और बायोमेडिकल वेस्ट से महंगी कैंसर दवा Keytruda की खाली शीशियां खरीदते थे। बाद में उनमें एंटीफंगल दवा भरकर उन्हें असली दवा बनाकर मरीजों को बेच दिया जाता था। इन सब मामलों को देखते हुए सरकार ने दवा नियामकों को दवाओं की ट्रैकिंग व्यवस्था मजबूत करने पर जोर दिया।म
मरीजों को क्या फायदा होगा?
- नई व्यवस्था लागू होने के बाद मरीजों को नकली दवा मिलने की संभावना कम होगी।
- कैंसर जैसी घातक बीमारी का इलाज करने में इस्तेमाल होने वाली महंगी कैंसर की दवाओं में धोखाधड़ी पर रोक लगेगी।
- दवा की प्रमाणिकता की पुष्टि आसान होगी।
- दवा रिकॉल (Drug Recall) की स्थिति में प्रभावित बैच की जल्दी पहचान हो सकेगी।
- मरीजों का इलाज अधिक सुरक्षित होगा।
- एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस से लड़ाई में भी मिलेगी मदद
सरकार का मानना है कि यह कदम केवल नकली दवाओं को रोकने के लिए नहीं है, बल्कि एंटी माइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) से लड़ने में भी मदद करेगा। अगर बाजार में नकली या घटिया एंटीबायोटिक बिकती हैं, तो बैक्टीरिया दवाओं के प्रति प्रतिरोधक (Resistant) बन सकते हैं। QR कोड के जरिए ऐसी दवाओं की पहचान और निगरानी आसान होगी। QR Code स्कैन करके मरीज दवा की प्रामाणिकता और मूल जानकारी की पुष्टि कर सकेंगे।
WHO के मानकों को पूरा करने में मिलेगी मदद
यह नई व्यवस्था भारत में दवाओं की निगरानी प्रणाली को और मजबूत बनाएगी। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) चाहता है कि हर दवा की पहचान आसानी से हो सके और जरूरत पड़ने पर उसकी पूरी जानकारी ट्रैक की जा सके। QR कोड और ट्रैकिंग सिस्टम लागू होने से भारत इन अंतरराष्ट्रीय मानकों के और करीब पहुंच जाएगा। इससे दवाओं की गुणवत्ता पर बेहतर निगरानी रखी जा सकेगी और मरीजों तक सुरक्षित व असली दवाएं पहुंचाने में मदद मिलेगी।
डिस्क्लेमर (Disclaimer): यह लेख केवल सामान्य जागरूकता और सरकारी अधिसूचनाओं की जानकारी देने के उद्देश्य से है। किसी भी बीमारी के इलाज, दवाओं के चयन या उनके उपयोग से पहले हमेशा अपने डॉक्टर या प्रमाणित चिकित्सा विशेषज्ञ से परामर्श लें। बाजार से दवाएं खरीदते समय हमेशा बिल लें और पैकेजिंग व सील की जांच स्वयं जरूर करें।
