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प्रेग्नेंसी के दौरान कैसा होना चाहिये रूटीन? इन 9 बातों का हमेशा रखें ध्यान

गर्भावस्था के दौरान महिला जिस भी चीज का सेवन करती है, या फिर जिन भी बातों को सुनती या पढ़ती हैं, उसका असर गर्भ में पल रहे शिशु पर पड़ता है। गर्भावस्था के दौरान शास्त्रों में कही गई इन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को शास्त्रों में कही गई इन बातों को कभी नहीं भूलना चाहिए (फोटो क्रेडिट- इंडियन एक्सप्रेस)

प्रेग्नेंसी यानी गर्भावस्था का समय हर महिला के जीवन में बेहद ही खास होता है। इस दौरान शरीर में कई तरह के बदलाव आते हैं। जिसका असर महिला के साथ-साथ उसके बच्चे पर भी पड़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि गर्भावस्था के दौरान महिला के शरीर में जो हार्मोनल बदलाव होते हैं, उसका प्रभाव उनकी सोच पर भी पड़ता है। इस समय में कई महिलाएं तनाव में रहती हैं। इसलिए प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं को अच्छी किताबें पढ़ने की सलाह दी जाती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अच्छी और धार्मिक किताबें पढ़ने से महिला के साथ-साथ बच्चे पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। मान्यता है कि प्रेग्नेंसी के दौरान ‘श्रीमद भगवत गीता’ पढ़नी चाहिए। क्योंकि इससे धार्मिक विचार महिला के अंदर आते हैं, साथ ही यह शिशु के लिए भी बेहद जरूरी है। केवल यही नहीं बुजुर्गों की मानें तो ‘श्रीमद भगवत गीता’ पढ़ने से गर्भवती महिला का मन शांत रहता है और शिशु के अंदर अच्छे गुणों का विकास होता है।

वहीं, धर्म-ग्रंथों में भी कई ऐसी बातों का उल्लेख किया गया है। जिनका ध्यान गर्भवती महिलाओं को रखना चाहिए।

गर्भावस्था के दौरान इन बातों के रखें ध्यान:

-धर्म ग्रंथों में इस बात का वर्णन किया गया है कि गर्भावस्था के दौरान मल-मूत्र, अपानवायु, छींक, प्यास, भूख, नींद, खांसी और जम्हाई जैसे आवेगों को कभी रोकना नहीं चाहिए। क्योंकि, साधारण अवस्था में इन्हें रोकने से नुकसान हो सकता है, हालांकि, अगर गर्भावस्था के दौरान इन्हें रोका जाएगा, तो मां के साथ-साथ बच्चे को भी नुकसान हो सकता है।

-ज्यादा गुस्सा ना करें, गलत बातें ना सुनें, वाद-विवाद के चक्कर में ना पड़े। डरावनी फिल्में या कार्यक्रम ना देखें। तेज आवाज उत्पन्न करने वाले स्थानों से दूर रहें।

-गर्भावस्था के दौरान रात में ज्यादा देर तक नहीं जागना चाहिए। दोपहर में थोड़ा आराम कर लें, हालांकि, गहरी नींद में नहीं सोना चाहिए।

-गर्भावस्था के दौरान सख्त-पथरीले, टेढ़े-मेढ़े स्थानों पर नहीं बैठना चाहिए। पर्वत, ऊंचे घर या लंबी सीढ़ियों पर नहीं चढ़ना चाहिए।

-गहरे रंग के वस्त्र भी धारण नहीं करने चाहिए। भारी और अधिक आभूषण भी नहीं पहनने चाहिए।

-इस दौरान करवट लेकर ही सोना चाहिए। समय-समय पर करवट बदलें। हालांकि, ध्यान रखें की घुटने मोड़कर ना सोएं।

-इस दौरान अपने इष्ट देव का ध्यान करना चाहिए, साथ ही लंबे उपवास नहीं करने चाहिए। इस दौरान मिर्च-मसालेदार, बासी पदार्थ और मादक पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए।

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