अक्सर लोग ‘प्री-डायबिटीज’ (Pre-diabetes) को हल्के में लेकर छोड़ देते हैं, यह सोचकर कि अभी तो सिर्फ बॉर्डरलाइन है, लेकिन हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो यह लापरवाही आपके शरीर पर भारी पड़ सकती है। प्री-डायबिटीज सिर्फ डायबिटीज की दस्तक नहीं है, बल्कि यह साइलेंट तरीके से हमारी आंखों, किडनी और दिल को नुकसान पहुंचाना शुरू कर देती है। आखिर क्या है प्री-डायबिटीज होने की असली वजह? इसके शुरुआती लक्षण क्या हैं और कैसे आप समय रहते सही लाइफस्टाइल अपनाकर इस खतरे को टाल सकते हैं?
आयुर्वेदिक और यूनानी दवाओं के एक्सपर्ट डॉक्टर सलीम जैदी ने बताया प्री डायबिटीज एक ऐसी कंडीशन है जिसमें आप अपनी बॉडी में दिखने वाले लक्षणों को पहचान लें तो आप अपने आप को डायबिटीज की तरफ जाने से रोक सकते हैं। अगर आप इस दौरान सतर्क हो जाएं और अपने लाइफस्टाइल और डाइट में बदलाव कर लें तो इस बीमारी को रिवर्स भी कर सकते हैं। प्री डायबिटीज को अगर कंट्रोल नहीं किया जाए तो डायबिटीज की तरह ही आंखों से लेकर किडनी, लंग्स और बॉडी के बाकी अंगों को नुकसान पहुंच सकता है। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि प्री डायबिटीज क्या है इसका कारण, लक्षण और इसे रिवर्स करने का तरीका क्या है।
प्री-डायबिटीज क्या है?
प्री-डायबिटीज एक ऐसी स्थिति है जिसमें व्यक्ति का ब्लड शुगर लेवल सामान्य से अधिक होता है, लेकिन इतना ज्यादा नहीं होता कि उसे टाइप-2 डायबिटीज कहा जाए। इस अवस्था में शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति कम संवेदनशील हो जाती हैं, जिसे इंसुलिन रेजिस्टेंस कहा जाता है। समय रहते इस स्थिति की पहचान और इलाज न किया जाए तो यह टाइप-2 डायबिटीज में बदल सकती है।
प्री-डायबिटीज के कारण
- इंसुलिन रेजिस्टेंस का बढ़ना
- अधिक वजन या मोटापा होना
- शारीरिक गतिविधियों की कमी
- असंतुलित खान पान और जंक फूड का अधिक सेवन
- हाई ब्लड प्रेशर और हाई कोलेस्ट्रॉल होना
- परिवार में डायबिटीज की हिस्ट्री
- बढ़ती उम्र और खराब लाइफस्टाइल जिम्मेदार है।
प्री-डायबिटीज के लक्षण
प्री-डायबिटीज को अक्सर साइलेंट कंडीशन कहा जाता है क्योंकि कई लोगों में इसके स्पष्ट लक्षण नहीं दिखाई देते। हालांकि कुछ लोगों में ये संकेत नजर आ सकते हैं जैसे
- बार-बार पेशाब आना
- अत्यधिक प्यास लगना
- बार-बार भूख महसूस होना
- हर समय थकान रहना
- अचानक वजन कम होना
- धुंधला दिखाई देना या नजर कमजोर होना
- हाथों और पैरों में झुनझुनी या सुन्नपन
- घाव का देर से भरना
- ध्यान केंद्रित करने में परेशानी या भ्रम महसूस होना
प्री-डायबिटीज से जुड़े जोखिम
यदि प्री-डायबिटीज का समय पर इलाज नहीं किया जाए तो टाइप-2 डायबिटीज का खतरा काफी बढ़ जाता है। इसके अलावा हृदय रोग, स्ट्रोक, किडनी की समस्याएं और नसों से जुड़ी परेशानियों का जोखिम भी बढ़ सकता है।
प्री-डायबिटीज की जांच कब करानी चाहिए?
अगर आपको बार-बार प्यास लगती है, पेशाब ज्यादा आता है, वजन अचानक कम हो रहा है या परिवार में डायबिटीज का इतिहास है, तो डॉक्टर से सलाह लेकर ब्लड शुगर की जांच करानी चाहिए। नियमित हेल्थ चेकअप से बीमारी का समय रहते पता लगाया जा सकता है।
प्री-डायबिटीज से बचाव के उपाय
- वजन को कंट्रोल रखें।
- बॉडी मास इंडेक्स (BMI) 18.5 से 25 के बीच रखने की कोशिश करें।
- रोजाना कम से कम 30 मिनट व्यायाम, योग या वॉक करें।
- फल, सब्जियां, साबुत अनाज और फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन करें।
- जंक फूड, पैक्ड फूड और अत्यधिक मीठी चीजों से दूरी बनाएं।
- शुगर युक्त ड्रिंक्स और अतिरिक्त कैलोरी वाले खाद्य पदार्थों का सेवन कम करें।
- हाई ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल रखें।
- समय-समय पर ब्लड शुगर की जांच कराते रहें।
क्या प्री-डायबिटीज को रिवर्स किया जा सकता है?
विशेषज्ञों के अनुसार, हेल्दी डाइट, नियमित व्यायाम और वजन कंट्रोल के जरिए प्री-डायबिटीज को टाइप-2 डायबिटीज में बदलने से काफी हद तक रोका जा सकता है। इसलिए शुरुआती संकेतों को नजरअंदाज न करें और समय रहते जांच व इलाज कराएं। अगर आप प्री डायबिटीज से बचाव के सभी उपाय अपना लेते हैं तो आप प्री डायबिटीज को आसानी से रिवर्स कर सकते हैं।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। किसी भी तरह के लक्षण दिखाई देने पर डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।
