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COVID-19: क्या है प्लाज्मा थैरेपी, जो कोरोना वायरस के इलाज में बनी है नया हथियार, जानिये…

Plasma Therapy for Coronavirus: कोरोना वायरस से संक्रमित व्यक्ति जब ठीक हो जाता है तो कम से कम 28 दिनों के अंतराल पर वो प्लाज्मा डोनेट कर सकता है

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Plasma Therapy for Coronavirus: कोरोना वायरस का कहर लगातार बढ़ता जा रहा है। देश में अब तक इस घातक वायरस से पीड़ित लोगों का आंकड़ा साढ़े 24 हजार पार कर चुका है। दुनिया भर के वैज्ञानिक इस वायरस का इलाज ढूंढ़ने में जुटी हुई है। इस बीच राजधानी दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शुक्रवार को पत्रकार वार्ता में कहा कि प्लाज्मा थेरेपी की मदद से 4 मरीजों में उत्साहवर्धक नतीजे देखे गए हैं। साथ ही, कुछ और गंभीर रूप से संक्रमित लोगों को भी प्लाज्मा थेरेपी दी जाएगी। ऐसे में लोगों में ये उत्सुकता है कि किस तरह प्लाज्मा थेरेपी कोरोना वायरस के इलाज में मददगार साबित हो रही है। आइए जानते हैं कि क्या है ये थेरेपी और किन मरीजों का इसके जरिये हो सकता है इलाज-

क्या है ये प्लाज्मा थेरेपी: इस थेरेपी में जो लोग कोरोना वायरस से जंग को मात दे चुके हैं, उनके खून से प्लाज्मा निकाला जाता है। इसके बाद उसे दूसरे कोरोना वायरस संक्रमित रोगी को डोनेट किया जाता है। बता दें कि जिन लोगों में कोरोना वायरस का संक्रमण ठीक हो जाता है, उनके शरीर में उस वायरस के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता बन जाती है। जो लोग प्लाज्मा डोनेट करते हैं उनके ब्लड से प्लाज्मा को अलग कर दिया जाता है। स्वस्थ हो चुके मरीज के शरीर में एंटीबॉडी बन जाती है जो उस वायरस से लड़ने में सक्षम होती है, प्लाज्मा के जरिये इससे दूसरे रोगियों में भी एंटीबॉडीज पैदा होने लगती हैं।

ठीक हुए लोग कितने दिनों बाद कर सकते हैं प्लाज्मा डोनेट: कोरोना वायरस से संक्रमित व्यक्ति जब ठीक हो जाता है तो कम से कम 28 दिनों के अंतराल पर वो प्लाज्मा डोनेट कर सकता है। ICMR से इजाजत मिलने के बाद दिल्ली, केरल और कर्नाटक जैसे राज्यों में लोगों को प्लाज्मा थेरेपी देने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। बता दें कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी इस थेरेपी को बेहतर माना है। भारत के अलावा, अमेरिका और इंग्लैंड में भी प्लाज्मा थेरेपी से लोगों का परीक्षण शुरू किया जा चुका है। वहीं, चीन ने भी दावा किया है कि प्लाज्मा थेरेपी की मदद से वहां कई मरीज ठीक हो चुके हैं।

इस थेरेपी से किसका हो सकता है इलाज: डॉक्टर्स के अनुसार प्लाज्मा थेरेपी को इस्तेमाल करने के भी दिशा-निर्देश जारी किये गए हैं। हर किसी पर प्लाज्मा थेरेपी का प्रयोग नहीं किया जा सकता है। जो लोग कोरोना वायरस से गंभीर रूप से प्रभावित हैं और जिन्हें सांस लेने में ज्यादा तकलीफ हो रही है, उन मरीजों को प्लाज्मा दिया जा सकता है। बता दें कि एक डोनर प्लाज्मा का इस्तेमाल करके 2 से 5 मरीजों को ठीक किया जा सकता है। हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो एक मरीज को ठीक करने के लिए लगभग 200 से 250 मिली प्लाज्मा की जरूरत होती है। वहीं, इस थेरेपी के इस्तेमाल से मरीज 3 से 7 दिनों के भीतर ही स्वस्थ हो जा रहे हैं।

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