कब्ज (Constipation) पाचन तंत्र से जुड़ी सबसे आम समस्याओं में से एक है। आमतौर पर इसके लिए खराब डाइट, शरीर में पानी की कमी या बॉडी एक्टिविटी की कमी को जिम्मेदार माना जाता है, पर लोग रोजाना रहने वाली कब्ज को नजरअंदाज कर देते हैं। हेल्थ एक्सपर्ट और डॉक्टरों के अनुसार अगर कब्ज की शिकायत लंबे समय तक बनी रहे और इसके साथ शरीर में बेवजह कंपकंपी, जकड़न या चलने-फिरने में धीमापन महसूस होने लगे तो यह तंत्रिका तंत्र (Nervous System) से जुड़ी स्थिति पार्किंसंस बीमारी का शुरुआती संकेत हो सकता है। सही समय पर लक्षणों की पहचान और डॉक्टरी जांच इस बीमारी को कंट्रोल करने में मददगार साबित हो सकती है।

न्यूरोप्रोग्रामिस्ट वरुण हैरोल्ड के अनुसार, कुछ मामलों में कब्ज सिर्फ पाचन से जुड़ी समस्याओं की तरफ इशारा नहीं करता बल्कि गंभीर बीमारी का शुरुआती संकेत भी हो सकता है। इन्फ्लुएंसर अंकित चौहान के पॉडकास्ट में बात करते हुए हैरोल्ड ने दावा किया कि कब्ज पार्किंसंस रोग (Parkinson’s disease) के सबसे शुरुआती लक्षणों में से एक हो सकता है। कई लोगों में यह समस्या बीमारी की पहचान होने से सालों पहले दिखाई देने लगती है। एक्सपर्ट ने बताया कई बार मरीज में कब्ज रहने के करीब 10 साल बाद पार्किंसंस की बीमारी का निदान होता है। जब उनसे पूछा जाता है कि क्या उन्हें पहले कब्ज की समस्या थी, तो वे अक्सर हां कहते हैं। उन्होंने आंत और मस्तिष्क के बीच संबंध (Gut-Brain Connection) को लेकर बढ़ती वैज्ञानिक रुचि का भी जिक्र किया। हैरोल्ड के अनुसार, कुछ रिसर्च में साफ संकेत मिले है कि बीमारी की प्रक्रिया आंत से शुरू हो सकती है।

कब्ज की समस्या को कैसे करें कंट्रोल

वरुण हैरोल्ड ने कब्ज की समस्या का इलाज करने के लिए डाइट में कुछ खास फूड्स का सेवन करने की सलाह दी है। डाइट में मछली का तेल, ऑलिव ऑयल और पर्याप्त मात्रा में सब्जियों का सेवन करने से आंतों की सेहत में सुधार हो सकता है। हालांकि, आंत से मस्तिष्क तक असामान्य प्रोटीन के पहुंचने की प्रक्रिया को लेकर वैज्ञानिक शोध अभी जारी है।

क्या हर किसी में कब्ज की बीमारी पार्किंसन का कारण बनती है?

कब्ज एक आम समस्या है जो किसी को भी हो सकती है लेकिन सवाल ये उठता है कि क्या कब्ज हर किसी के लिए पार्किंगसन का कारण बनता है?हैरोल्ड ने यह भी साफ किया कि केवल कब्ज होने का मतलब यह नहीं है कि किसी व्यक्ति को पार्किंसंस की बीमारी हो जाएगी। उन्होंने बताया किसी को कब्ज है,इसका मतलब यह नहीं कि उसे पार्किंसंस की दवा खाना शुरू कर देनी चाहिए। ऐसा बिल्कुल नहीं है।

कब्ज और पार्किंगसन के कनेक्शन पर डॉक्टर की क्या राय है?

PSRI हॉस्पिटल में GI सर्जरी और लिवर ट्रांसप्लांटेशन के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. भूषण भोले के अनुसार कई रिसर्च में ये बात सामने आ चुकी है कि कब्ज़ पार्किंसंस बीमारी से पहले हो सकता है, लेकिन यह एक बहुत बड़ी पहेली का सिर्फ़ एक छोटा सा हिस्सा है। डॉक्टर भोले ने बताया कुछ लोगों में पार्किंगसन के कुछ लक्षण जैसे  हाथ कांपना, चलने में धीमापन या मांसपेशियों में जकड़न शुरू होने से 10 से 20 साल पहले कब्ज की समस्या हो सकती है। ऐसा इसलिए हो सकता है क्योंकि पार्किंसंस की बीमारी हमेशा सीधे मस्तिष्क से शुरू नहीं होती। डॉक्टर ने बताया बीमारी की प्रक्रिया आंत के एंटेरिक नर्वस सिस्टम से शुरू हो सकती है। इससे आंतों की गति धीमी पड़ जाती है और मस्तिष्क के ज्यादा प्रभावित होने से पहले ही कब्ज की समस्या शुरू हो सकती है। डॉक्टर ने बताया सिर्फ कब्ज के आधार पर पार्किंगसन का अनुमान लगाना ठीक नहीं है।

कब कब्ज को गंभीरता से लेना चाहिए?

कब्ज बहुत आम समस्या है, इसलिए केवल इसके आधार पर पार्किंसंस की चिंता करना जरूरी नहीं है। इसके बजाय दूसरे लक्षणों पर भी ध्यान देना चाहिए। डॉ. भोले के अनुसार, अगर लंबे समय से कब्ज के साथ सूंघने की क्षमता कम हो, नींद में सपनों के दौरान हाथ-पैर चलाना, शरीर की गतिविधियां धीमी होना, हाथों में कंपन,मांसपेशियों में जकड़न,आवाज का धीमा या मुलायम हो जाना,संतुलन बनाने में परेशानी होना, लिखावट का पहले से छोटी हो जाना जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत न्यूरोलॉजिस्ट डॉक्टर को दिखाकर जरूरी जांच कराएं।

पार्किंगसन क्या है ये भी समझें

आपको बता दें कि पार्किंगसन एक न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारी जिसमें मस्तिष्क की कुछ तंत्रिका कोशिकाएं, खासकर डोपामिन बनाने वाली कोशिकाएं, धीरे-धीरे प्रभावित होती हैं। डोपामिन शरीर की गतिविधियों को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसकी कमी होने पर चलने-फिरने और शरीर के संतुलन में परेशानी होने लगती है। इसके प्रमुख लक्षणों की बात करें तो  आराम की स्थिति में भी हाथ-पैर में कंपन,शरीर की गतिविधियां धीमी होना, मांसपेशियों में जकड़न, चलने में परेशानी या छोटे कदम लेना, संतुलन बिगड़ना और गिरने का खतरा, लिखावट छोटी होना, आवाज धीमी होना और चेहरे के हाव-भाव कम होने जैसे लक्षण दिखते हैं।

डिस्क्लेमर: यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है। किसी भी स्वास्थ्य संबंधी समस्या के लिए डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।