पार्किंसन रोग एक न्यूरोलॉजिकल बीमारी है जो आमतौर पर बुजुर्गों को प्रभावित करती है, लेकिन अब ये कम उम्र में भी लोगों को अपना शिकार कर रही है। ये बीमारी मुख्य रूप से मस्तिष्क में डोपामाइन (Dopamine) नामक न्यूरोट्रांसमीटर यानी रसायन की कमी के कारण होती है। यह रसायन शरीर की गतिविधियों (movement) को कंट्रोल कर सुचारू रखने में मदद करता है। जब डोपामाइन कम होता है, तो मस्तिष्क मांसपेशियों तक सही संकेत नहीं भेज पाता, जिससे कंपन, अकड़न और धीमी गति जैसे लक्षण पैदा होते हैं। इस बीमारी के लिए आनुवांशिक और पर्यावरणीय कारक जिम्मेदार हो सकते हैं।

फोर्टिस हॉस्पिटल, फरीदाबाद में न्यूरोलॉजी विभाग में निदेशक डॉ. विनीत बंगा ने बताया कम उम्र के लोगों में इस बीमारी के पनपने के लिए जेनेटिक फैक्टर, दिमाग की चोट या कुछ टॉक्सिन्स का असर जिम्मेदार हो सकता है। आइए एक्सपर्ट से जानते है कि पार्किंसन के बॉडी में शुरुआती कौन-कौन से लक्षण दिखते हैं और इस बीमारी से कैसे बचाव किया जा सकता है।

पार्किंसन रोग में बॉडी में दिखने वाले शुरुआती लक्षण

पार्किंसन रोग में बॉडी में शुरुआती लक्षणों की बात करें तो हल्का कंपन, चलने में बदलाव, आवाज धीमी होना और चेहरे के भाव कम होना शामिल हैं। , इसके अलावा कुछ और संकेत भी पार्किंसन रोग की पहचान करने में मदद करते हैं जैसे

  • शरीर में स्टिफनेस
  • संतुलन बनाने में दिक्कत
  • लिखावट का छोटा होना (Micrographia)
  • हाथ-पैर की मूवमेंट का धीमा पड़ना
  • नींद से जुड़ी समस्याएं और थकान होना शामिल है।

इन लक्षणों को समय रहते पहचानना बेहद जरूरी है, क्योंकि जल्दी जांच और इलाज से बीमारी की गति को कंट्रोल किया जा सकता है। अगर ऐसे संकेत लगातार नजर आएं, तो तुरंत न्यूरोलॉजिस्ट से सलाह लेना बेहतर होता है। इसका पूरी तरह इलाज अभी संभव नहीं है, लेकिन दवाओं और थेरेपी से लक्षणों को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है। मरीज की स्थिति के अनुसार दवाएं और कभी-कभी खास ट्रीटमेंट जैसे डीप ब्रेन स्टिमुलेशन की सलाह देते हैं। रोजाना हल्की एक्सरसाइज, योग और वॉक से शरीर ठीक रहता है और लक्षणों में सुधार आता है।

पार्किंसन से बचाव के लिए डाइट और लाइफस्टाइल में करें बदलाव

एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर फूड खाएं

रिसर्च बताती है कि ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस मस्तिष्क की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाता है। एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर फूड ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से बचाव करते हैं और बॉडी को हेल्दी रखते हैं। डाइट में एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर फूड जैसे बेरीज , डार्क चॉकलेट और हरी पत्तेदार सब्जियों को शामिल करें। Neurology जर्नल में प्रकाशित एक रिसर्च के मुताबिक जो लोग बेरीज जैसी फ्लेवोनोइड युक्त चीजें खाते हैं, उनमें पार्किंसंस का जोखिम 40% तक कम हो सकता है।

ओमेगा-3 फैटी एसिड का करें सेवन

ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर फूड जैसे हेल्दी फैट अखरोट, अलसी के बीज और फैटी फिश दिमाग की सूजन को कंट्रोल करते हैं और याददाश्त को मजबूत करते हैं।

पानी का अधिक सेवन और साबुत अनाज खाएं

पार्किंगसन से बचाव करना है तो खूब पानी पिएं और साबुत अनाज का सेवन करें। बहुत अधिक दूध या पनीर का सेवन पार्किंसंस के जोखिम को थोड़ा बढ़ा सकता है, इसलिए इनका सेवन कम करें।

लाइफस्टाइल में बदलाव करें

एरोबिक एक्सरसाइज और योग करें, खासतौर पर संतुलन बनाने वाले आसन पार्किंसन के लक्षणों को स्लो करने में मददगार हैं।

डिस्क्लेमर:

यह लेख सामान्य जानकारी और डॉक्टर के साथ हुए साक्षात्कार पर आधारित है। पार्किंसंस एक जटिल बीमारी है और इसके लक्षण हर व्यक्ति में अलग हो सकते हैं। यदि आपको कंपन या संतुलन बनाने में समस्या महसूस हो, तो इसे नजरअंदाज न करें और तुरंत किसी प्रमाणित न्यूरोलॉजिस्ट से परामर्श लें।