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अमेरिकन सिंगर नील डॉयमंड हुए पार्किंसन बीमारी के शिकार, जानिए क्या है पार्किंसन और उसके लक्षण, कैसे करेंगे बचाव

Parkinsons Disease, Causes, Symptoms, Prevention In Hindi: पार्किंसन में सेंट्रल नर्वस सिस्टम में विकार पैदा होता है, जिससे व्यक्ति की शारीरिक गतिविधियां प्रभावित होती हैं।

प्रतीकात्मक चित्र

कई ग्रैमी अवार्ड जीत चुके अमेरिकी गीतकार-गायक नील डायमंड पार्किंसन बीमारी के शिकार हो गए हैं। इस बात को लेकर उनके फैंस में काफी निराशा है। इनमें ऐसे बहुत से लोग हैं जिन्हें पार्किंसन के बारे में कोई जानकारी भी नहीं है। अगर आप भी उनमें से एक हैं तो आपको यह लेख जरूर पढ़ना चाहिए। आज हम आपको पार्किंसन के बारे में कुछ सामान्य जानकारियां देने की कोशिश करेंगे।

क्या है पार्किंसन – पार्किंसन सेंट्रल नर्वस सिस्टम में गड़बड़ी से संबंधित एक बीमारी है। इस बीमारी में उन तंत्रिका कोशिकाओं पर काफी बुरा असर पड़ता है जो डोपामाइन का स्राव करने के लिए जिम्मेदार होती हैं। डोपामाइन एक तरह का केमिकल है जो तंत्रिकासंचारकों को ठीक तरह से काम करने में मदद करता है। इस बीमारी की वजह से शरीर में अकड़न आ जाती है और कई बार शरीर को हिलाना भी मुश्किल हो जाता है। इसमें मरीज का हाथ-पैरों की कंपन पर कंट्रोल नहीं होता और शरीर के अन्य हिस्सों में हलचल की गति धीमी हो जाती है। डॉक्टर्स के मुताबिक व्यायाम पार्किंसन बीमारी को ठीक करने में अहम भूमिका निभाता है। अगर थोड़ी एक्सरसाइज, थेरेपी और काउंसलिंग की जाए तो पार्किंसन बीमारी को मात दी जा सकती है।

एक शोध की मानें तो टीएमईएम230 नामक जीन में म्‍यूटेशन की वजह से पार्किंसन रोग होता है। इस रोग में सेंट्रल नर्वस सिस्टम में विकार पैदा होता है, जिससे व्यक्ति की शारीरिक गतिविधियां प्रभावित होती हैं। ऐसे में रोगी को अक्सर झटके भी आते हैं। रिसर्च के मुताबिक यह जीन एक प्रोटीन का उत्पादन करता है, जो न्यूरॉन्स में न्यूरोट्रांसमीटर डोपेमाइन के पैकेजिंग में शामिल है। पार्किंसन रोग में डोपोमाइन का उत्पादन करने वाले न्यूरॉन्स की संख्या घट जाती है।

कैसे करें बचाव – पार्किंसन बीमारी के कारणों के बारे में ठीक से जानकारी नहीं है इसलिए इसकी रोकथाम के बारे में कोई स्पष्ट सलाह नहीं दी जा सकती है। कुछ अध्ययनों के मुताबिक कॉफी, चाय, कोला आदि में पाई जाने वाली कैफीन पार्किंसन रोग के खतरे को टालने में मददगार है। इसके अलावा ग्रीन टी का सेवन भी पार्किंसन का खतरा कम करता है। नियमित रूप से एरोबिक एक्सरसाइज करने से भी पार्किंसन रोग के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।


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