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थोड़ी की लापरवाही में कहीं आपके लाडले की आंखें न हो जाएं खराब, जानिए क्या है खतरा

बच्चों की आंखों को लेकर किसी प्रकार की भी लापरवाही नुकसानदायक हो सकती है। ऐसे में Mr Satkam Divya, CEO, KlinicApp ने बताया कि किस प्रकार आपको अपने बच्चों के आंखों की देखभाल करनी चाहिए।

बच्चों में आंखों की देखभाल के लिए टिप्स (Source: Dreamstime)

आंखों की देखभाल करनी जरूरी होती है। आंख शरीर के लिए एक खिड़की की तरह काम करता है और लगातार आंखों को दूर और पास की चीजों को देखने की शक्ति प्रदान करता है। आंख किसी भी चीज को देखने के उसकी इमेज को कैप्चर करता है और उसे दिमाग तक पहुंचाता है ताकि वह बाकी चीजों को देख सके। आंख शरीर का सबसे अधिक डेवेलप्स सेंसरी ऑर्गन होता है। आंखों की रोशनी होना हर इंसान के लिए बेहद जरूरी होता है। उम्र के साथ-साथ आंखों की रोशनी कम होती जाती है, लेकिन कुछ कंडिशन में ऐसा नहीं होता है।

आपके बच्चे के अच्छे और स्वस्थ भविष्य को सुनिश्चित करने के लिए उनके आंखों की सही देखभाल करें:

हर कोई जीवन भर स्वस्थ दृष्टि बनाए रखने के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास करता है। इस तरह की जिम्मेदारी कठिन हो जाती है जब यह बच्चों की उचित देखभाल करने के बारे में होती है। स्वस्थ आंखें और अच्छी दृष्टि बच्चों के विकास का एक अनिवार्य हिस्सा है। बच्चे लापरवाह होते हैं। उनकी गलती के कारण उनकी आंखों को नुकसान पहुंचता है। हालांकि, आकस्मिक क्षति के अलावा, बच्चों को कई आंखों की समस्याओं का भी खतरा होता है।

बच्चों की आंखों की देखभाल के लिए माता-पिता को अतिरिक्त सतर्क रहने की जरूरत है क्योंकि आंख बहुत नाजुक अंग हैं। कोई आकस्मिक क्षति की संभावनाओं को रोकने में सक्षम नहीं हो सकता है, लेकिन बच्चों में आंखों की सामान्य समस्याओं को रोकने के लिए उपाय किए जा सकते हैं। बच्चों में आंखों की सबसे आम समस्याओं के बारे में अधिक से अधिक जानकारी एकत्र करना, बच्चों की उचित देखभाल करने में माता-पिता के लिए मददगार हो सकता है।

बच्चों में आम आंखों की समस्या

ब्लॉक्ड टीयर डूएट्स- कई शिशुओं के साथ-साथ बच्चे ब्लॉक्ड टीयर डूएट्स से गुजरते हैं। इसके कारण लगातार उनकी आंखों से आँसू निकलते रहते हैं जिसकी वजह से बलगम इकट्ठा होती है।

एसटिग्मैटिज्म- इस स्थिति में, बच्चों में अनियमित आकार का कॉर्निया होता है जो धुंधली दृष्टि का कारण बनता है।

मोतियाबिंद- मोतियाबिंद वह स्थिति है जो आंख के लेंस को धुंधला करता है।

ड्रॉपी आईलिड्स या Ptosis- जब बच्चों की पलकें खोलने के लिए जिम्मेदार आंख की मांसपेशियां कमजोर होती हैं, तो बच्चे ड्रॉपी आईलिड्स विकसित करते हैं। ऐसी स्थिति में, उनकी पलकें सामान्य रूप से नहीं खुलती हैं।

छालाजियॉन- छालिजियॉन पलकों पर होते हैं जो अवरुद्ध ऑयल ग्लैंड के कारण होता है।

दूरदर्शिता या हाइपरोपिया- ऐसी स्थिति में, बच्चों को पास की वस्तुओं को देखना मुश्किल हो जाता है। स्थिति सामान्य डिग्री तक है तो यह परेशानी का कारण नहीं बनती है।

ग्लूकोमा- ग्लूकोमा एक ऐसी स्थिति है जब आंखों के अंदर दबाव बहुत अधिक होता है। यदि अनुपचारित छोड़ दिया जाता है, तो स्थिति अंधापन का कारण बन सकती है। ऐसी हालत में आंखें बेहद संवेदनशील होती हैं।

प्रारंभिक निदान आपके बच्चे की दृष्टि को हानि से बचा सकता हैं:

प्रारंभिक निदान स्थिति को बिगड़ने से पहले पता लगाने में मदद कर सकता है और गंभीर स्थिति का कारण बनता है। जल्दी पता लगाने से उपचार के शुरुआती उपाय भी सुनिश्चित होंगे। उपायों के बाद, आप अपने बच्चे के आंखों के स्वास्थ्य को बनाए रख सकते हैं। जब तक कोई चीज़ उनके साथ गलत नहीं होगी, जब तक कि उन्हें चोट या दर्द का अनुभव ना हो तो बच्चे समझ नहीं पाएंगे। इस प्रकार, माता-पिता को अतिरिक्त सतर्क रहने की आवश्यकता है। बच्चों के साथ बातचीत करना और उनकी समस्याओं के बारे में पूछताछ करना पेरेंटिंग का एक अनिवार्य हिस्सा है।

बच्चों की आंखों की उचित देखभाल करने के सर्वोत्तम तरीकों को जानें:

– बचाव इसका का प्रारंभिक चरण होता है। आप पहले चरण में चोट को रोकने के लिए सक्रिय उपाय कर सकते हैं। आवश्यकता होने पर अपने बच्चे की आंखों की रक्षा करें। धूप में निकलने से पहले आप चश्मा लगा लें। स्वीमिंग करते वक्त भी चश्मा का इस्तेमाल करना ना भूलें।

– शार्प चीजों से आंखों को दूर रखें वरना आपके बच्चे के साथ हादसा हो सकता है।

– बच्चों के आंखों के आस-पास कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल ना करें वरना आंखों को नुकसान पहुंच सकता है।

थोड़े-थोड़े समय पर डॉक्टर से संपर्क करें:

आंखों में इंफेक्शन और कुछ अन्य आंखों की समस्याओं को दवा से हल किया जा सकता है। जबकि दूसरी ओर, चश्मा का उपयोग करना कुछ मुद्दों का समाधान हो सकता है। एक नेत्र रोग विशेषज्ञ आवश्यक परीक्षण करेगा और समस्या का सामना करने के लिए उपचार के उपाय सुझाएगा। गंभीर स्थिति के इलाज के लिए सर्जरी एक विकल्प हो सकता है।

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