Ovarian cancer symptoms: ओवेरियन कैंसर यानी अंडाशय का कैंसर महिलाओं में एक गंभीर और चुनौतीपूर्ण बीमारी मानी जाती है। इसकी सबसे बड़ी समस्या यह है कि शुरुआती दौर में इसके लक्षण बहुत हल्के होते हैं या कई बार दिखते ही नहीं। यही वजह है कि जब तक बीमारी पकड़ में आती है, तब तक वह आगे बढ़ चुकी होती है। एशियन हॉस्पिटल के चेयरमैन ऑन्कोलॉजी सर्विसेज, डॉ. पुनीत गुप्ता का कहना है कि सही जानकारी, सतर्कता और समय पर जांच से इस कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
ओवेरियन कैंसर महिलाओं के अंडाशय में होने वाला कैंसर है। अंडाशय महिलाओं की प्रजनन प्रणाली का अहम हिस्सा होते हैं, जो हार्मोन और अंडाणु (एग) बनाने का काम करते हैं। इस कैंसर की पहचान इसलिए मुश्किल होती है क्योंकि शुरुआती चरण में इसके लक्षण आम पेट की समस्या जैसे लगते हैं, जिन्हें महिलाएं अक्सर नजरअंदाज कर देती हैं।
पारिवारिक इतिहास और BRCA जीन का रोल
डॉ. पुनीत गुप्ता बताते हैं कि अगर परिवार में पहले किसी महिला को स्तन कैंसर या ओवेरियन कैंसर हुआ है, तो दूसरी महिलाओं में भी इसका खतरा बढ़ सकता है। ऐसे मामलों में BRCA1 और BRCA2 जीन की जांच बेहद जरूरी हो जाती है। ये आनुवंशिक जीन म्यूटेशन कैंसर के जोखिम को कई गुना बढ़ा सकते हैं। अगर जांच में यह जीन पॉजिटिव आता है, तो डॉक्टर की सलाह से नियमित स्क्रीनिंग और निगरानी जरूरी होती है।
उम्र और हार्मोनल बदलाव भी बढ़ाते हैं खतरा
उम्र के साथ ओवेरियन कैंसर का जोखिम बढ़ता जाता है। खासकर 50 साल की उम्र के बाद महिलाओं में इसका खतरा ज्यादा देखा जाता है। डॉ. के अनुसार, हार्मोनल बदलाव, पीरियड्स की शुरुआत की उम्र, देर से मेनोपॉज (रजोनिवृत्ति) होना और हार्मोन से जुड़ी समस्याएं भी ओवेरियन कैंसर के खतरे को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए महिलाओं को अपने मासिक धर्म चक्र और हार्मोनल स्वास्थ्य पर ध्यान देना चाहिए।
मोटापा और गलत लाइफस्टाइल से बढ़ता है रिस्क
आज की बदलती जीवनशैली भी ओवेरियन कैंसर के खतरे को बढ़ा रही है। मोटापा, जंक फूड, तली-भुनी चीजें, शारीरिक गतिविधि की कमी, धूम्रपान और अत्यधिक शराब का सेवन इस कैंसर के जोखिम को बढ़ा सकते हैं। डॉ. गुप्ता कहते हैं कि संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाकर इस खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
ये लक्षण न करें नजरअंदाज
ओवेरियन कैंसर के शुरुआती लक्षण अक्सर इतने सामान्य होते हैं कि महिलाएं इन्हें गैस या पेट की हल्की परेशानी समझकर नजरअंदाज कर देती हैं। इनमें लगातार पेट फूलना, भूख कम लगना या जल्दी पेट भर जाना, बार-बार पेशाब आने की समस्या, पेट या पेल्विक एरिया में हल्का दर्द और बिना किसी स्पष्ट कारण के लगातार थकान महसूस होना शामिल है। डॉ. गुप्ता के अनुसार, यदि ये लक्षण 14 से 21 दिनों तक लगातार बने रहें, तो इन्हें बिल्कुल भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। ऐसे में बिना देरी किए तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है, ताकि समय रहते जांच कर सही इलाज शुरू किया जा सके।
डॉक्टर से कब लें सलाह
अगर किसी महिला को लगातार पेट दर्द, सूजन, भूख न लगना या शरीर में कोई असामान्य बदलाव महसूस हो, तो देरी नहीं करनी चाहिए। समय पर अल्ट्रासाउंड, ब्लड टेस्ट और जरूरत पड़ने पर BRCA1, BRCA2 जीन टेस्ट से शुरुआती पहचान संभव है। शुरुआती स्टेज में कैंसर पकड़ में आ जाए, तो इलाज की सफलता की संभावना काफी बढ़ जाती है। डॉ. पुनीत गुप्ता का कहना है कि ओवेरियन कैंसर से बचाव का सबसे बड़ा हथियार जागरूकता है। अपने परिवार के स्वास्थ्य इतिहास को जानना, नियमित मेडिकल जांच कराना, हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाना और शरीर में हो रहे बदलावों को नजरअंदाज न करना बेहद जरूरी है।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, ओवेरियन कैंसर का खतरा पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सकता, लेकिन सही जानकारी, समय पर जांच और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर इसे काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
डिस्क्लेमर
यह स्टोरी सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार की गई है। किसी भी तरह के स्वास्थ्य संबंधी बदलाव या डाइट में परिवर्तन करने से पहले अपने डॉक्टर या योग्य हेल्थ एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
