खराब डाइट और बिगड़ते लाइफस्टाइल का नतीजा हमारी हड्डियों को भी भुगतना पड़ता है। खराब डाइट हड्डियों को कमजोर कर देती है और बिगड़ता लाइफस्टाइल हड्डियों की बोन डेंसिटी 40 की उम्र से पहले ही कम करने लगता है। हड्डियों के कमजोर और खोखला होने की स्थिति को मेडिकल भाषा में Osteoporosis कहा जाता है। आमतौर पर ये परेशानी 40 साल के बाद युवाओं में बढ़ती है लेकिन कुछ खास मेडिकल कंडीशन में हड्डियां कम उम्र में ही कमजोर पड़ने लगती हैं। जब हड्डियों का घनत्व और मजबूती कम होने लगती है, तो उनमें खोखलापन बढ़ सकता है। ऐसे में हड्डियां इतनी कमजोर हो सकती हैं कि मामूली चोट या गिरने पर भी फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है।
दिल्ली के St. Stephen’s Hospital में ऑर्थोपेडिक्स विभाग के प्रमुख डॉ. मैथ्यू वर्गीस ने जनसत्ता को बातचीत में बताया Osteoporosis यानी हड्डियों का खोखलापन एक ऐसी स्थिति है, जिसमें हड्डियों की मजबूती और बोन डेंसिटी कम होने लगती है। इससे हड्डियां कमजोर और नाजुक हो जाती हैं और मामूली चोट, गिरने या झटके से भी फ्रैक्चर का खतरा बढ़ सकता है। डॉक्टर मैथ्यू ने बताया हड्डियों को मजबूत बनाने का काम आप 40 के बाद करेंगे तो नाकामयाब रहेंगे। हड्डियों की मजबूती के लिए आपको बचपन से ही अपनी बोन्स हेल्थ पर काम करने की जरूरत है।
हड्डियों के लिए संतुलित आहार में पर्याप्त कैल्शियम और विटामिन D का सेवन करना जरूरी है। इसके साथ नियमित शारीरिक गतिविधि और पर्याप्त धूप भी हड्डियों की सेहत के लिए महत्वपूर्ण हैं। हड्डियों की मजबूती का आकलन करने के लिए डॉक्टर की सलाह से कुछ जांचें कराना जरूरी है। आइए डॉक्टर से जानते हैं कि Osteoporosis के लक्षण कौन-कौन से है, इस बीमारी का खतरा किस उम्र में बढ़ता है और इससे बचाव कैसे करें।
उम्र बढ़ने के साथ क्यों कमजोर होती हैं हड्डियां?
डॉक्टर मैथ्यू के मुताबिक, बचपन और युवावस्था में हड्डियों का निर्माण और बोन डेंसिटी बढ़ने की प्रक्रिया चलती रहती है। लगभग 25–30 साल की उम्र तक व्यक्ति अपनी अधिकतम बोन डेंसिटी हासिल करता है। इसके बाद उम्र बढ़ने के साथ बोन डेंसिटी धीरे-धीरे कम होने लगती है। हालांकि, हर व्यक्ति में कमी की रफ्तार समान नहीं होती। कुछ लोगों में बोन डेंसिटी जल्दी कम होती है तो कुछ लोगों में धीरे-धीरे कम होती है। बोन डेंसिटी कम होने के लिए कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं।
क्या Osteoporosis सिर्फ बुजुर्गों की बीमारी है?
Osteoporosis का खतरा उम्र बढ़ने के साथ बढ़ता है, लेकिन यह केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं है। कुछ लोगों में किसी बीमारी, दवाओं, हार्मोनल बदलाव या अन्य कारणों से कम उम्र में भी हड्डियां कमजोर हो सकती हैं। महिलाओं में menopause के बाद बोन लॉस तेजी से बढ़ सकता है। ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा पुरुषों की तुलना में महिलाओं को ज्यादा होता है। खासतौर पर menopause के बाद estrogen hormone में कमी आने से हड्डियों का नुकसान तेजी से हो सकता है। वहीं पुरुषों में भी उम्र और हार्मोनल बदलाव के साथ हड्डियों की मजबूती कम हो सकती है।
दवाओं की वजह से भी हो सकता है Osteoporosis का खतरा
कुछ दवाओं के लंबे समय तक इस्तेमाल से हड्डियों की मजबूती प्रभावित हो सकती है। इनमें खासतौर पर लंबे समय तक ली जाने वाली steroid medicines शामिल हैं। कुछ मामलों में anticonvulsant दवाएं और लंबे समय तक कुछ अन्य दवाओं का इस्तेमाल भी बोन डेंसिटी को प्रभावित कर सकता है। ऐसी दवाएं लेने वाले लोगों को डॉक्टर से हड्डियों की सेहत को लेकर चर्चा करनी चाहिए।
कम उम्र में Osteoporosis के पीछे हो सकती हैं दूसरी बीमारियां
अगर किसी युवा व्यक्ति में हड्डियों की डेंसिटी बहुत कम पाई जाती है, तो केवल उम्र को इसका कारण नहीं माना जाना चाहिए। डॉक्टर के अनुसार hyperparathyroidism, kidney disease, कुछ हार्मोनल समस्याएं और कुछ अन्य बीमारियां हड्डियों को कमजोर कर सकती हैं। इसलिए कम उम्र में कम बोन डेंसिटी मिलने पर इसके पीछे के कारणों की जांच जरूरी हो सकती है।
Osteoporosis के शुरुआती लक्षण क्या हैं?
Osteoporosis की सबसे बड़ी समस्या यह है कि शुरुआती दौर में अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखाई देता। कई लोगों को इसका पता तब चलता है जब मामूली चोट या गिरने से हड्डी टूट जाती है। गंभीर Osteoporosis में हड्डियों में दर्द भी हो सकता है, लेकिन केवल दर्द के आधार पर बीमारी की पहचान नहीं की जा सकती।
मामूली चोट में फ्रैक्चर हो तो रहें सावधान
अगर किसी व्यक्ति की कलाई, कूल्हे या रीढ़ की हड्डी मामूली गिरने या हल्के झटके में टूट जाती है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। उदाहरण के तौर पर मामूली गिरने के बाद कलाई का फ्रैक्चर या हल्के झटके के बाद कमर में अचानक दर्द होना कमजोर हड्डियों का संकेत हो सकता है।
Osteoporosis की जांच कैसे होती है?
Osteoporosis की जांच के लिए Bone Mineral Density (BMD) टेस्ट, आमतौर पर DEXA/ DXA स्कैन का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें हड्डियों की मिनरल डेंसिटी मापी जाती है। रिपोर्ट में T-score के आधार पर Osteoporosis का आकलन किया जाता है। डॉक्टर मरीज की उम्र, लिंग, मेडिकल हिस्ट्री और फ्रैक्चर के जोखिम को देखते हुए जांच की सलाह देते हैं।
हर व्यक्ति को Bone Density Test की जरूरत नहीं
सिर्फ यह सोचकर कि उम्र बढ़ रही है, हर व्यक्ति को तुरंत BMD टेस्ट कराने की जरूरत नहीं होती। जिन लोगों में जोखिम अधिक है, जैसे menopause जल्दी शुरू होना, कुछ खास बीमारियां, लंबे समय तक steroid दवाएं लेना या कुछ विशेष हार्मोनल उपचार, उनमें डॉक्टर Bone Mineral Density टेस्ट की सलाह दे सकते हैं।
हड्डियों को मजबूत करने के लिए क्या करें
बचपन से फिजिकल एक्टिविटी जरूरी
हड्डियों की मजबूती के लिए शारीरिक गतिविधि बचपन और युवावस्था से ही जरूरी है। खेल-कूद, दौड़ना और नियमित शारीरिक गतिविधियां स्वस्थ हड्डियों के विकास और बोन स्ट्रेंथ को सपोर्ट कर सकती हैं। उम्र बढ़ने के बाद भी एक्टिव रहना हड्डियों और मांसपेशियों के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है।
40 की उम्र के बाद क्या करें?
उम्र बढ़ने के साथ नियमित शारीरिक गतिविधि बनाए रखना जरूरी है। डॉक्टर ने रोजाना करीब 30 मिनट वॉकिंग करने पर जोर दिया। हालांकि, व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य और हड्डियों की स्थिति के अनुसार एक्सरसाइज का प्रकार अलग हो सकता है। अगर पहले से Osteoporosis या फ्रैक्चर का जोखिम है, तो एक्सरसाइज शुरू करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर है।
Osteoporosis से बचने के लिए कैसी डाइट लें?
हड्डियों की सेहत के लिए सिर्फ Calcium और Vitamin D पर निर्भर रहने के बजाय संतुलित आहार लेना जरूरी है। डाइट में पर्याप्त प्रोटीन, Calcium और अन्य जरूरी पोषक तत्व शामिल होने चाहिए। दूध, दही जैसे डेयरी उत्पाद Calcium के अच्छे स्रोत हो सकते हैं। इसके अलावा nuts और seeds भी संतुलित डाइट का हिस्सा बनाए जा सकते हैं।
Osteoporosis से बचाव के लिए डॉक्टर की सलाह
हड्डियों को मजबूत रखने के लिए बचपन से शारीरिक रूप से सक्रिय रहना, पर्याप्त पोषण लेना, उम्र बढ़ने के साथ नियमित एक्सरसाइज करना और Osteoporosis के जोखिम वाले लोगों की समय पर जांच महत्वपूर्ण है। लंबे समय तक steroid जैसी दवाएं लेने वाले लोगों को डॉक्टर से बोन हेल्थ के बारे में जरूर चर्चा करनी चाहिए।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के उद्देश्य से दी गई है। Osteoporosis, Calcium या Vitamin D से जुड़ी किसी भी समस्या में खुद से दवा या सप्लीमेंट शुरू न करें। अपनी उम्र, स्वास्थ्य और जरूरत के अनुसार जांच व उपचार के लिए डॉक्टर की सलाह जरूर
