बढ़ती उम्र के साथ हड्डियों का थोड़ा कमजोर होना नॉर्मल बात है, लेकिन आजकल कम उम्र में ही लोगों को जोड़ों में दर्द, पैरों में सुन्नपन और झनझनाहट जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। अक्सर हम इन लक्षणों को मामूली थकान समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यह ऑस्टियोपोरोसिस या हड्डियों के खोखले होने का शुरुआती संकेत हो सकता है। हमारी रोजमर्रा की कुछ सामान्य आदतें, जैसे खान-पान में लापरवाही और शारीरिक सक्रियता की कमी, हड्डियों के घनत्व (Bone Density) को चुपचाप कम कर रही हैं।

Horizon Multispecialty Hospital in Raipur में आर्थोपेडिक सर्जन डॉक्टर पंकज द्विवेदी ने बताया हड्डियों में होने वाली ये परेशानी ऑस्टियोपोरोसिस की वजह से होती है। अगर समय रहते सुधार न  किया जाए तो कम दर्द बढ़ सकता है और दर्द से कमर झुक सकती है। ऐसे में चलने-फिरने में दिक्कत और बढ़ सकती है। आइए जानते हैं कि ऑस्टियोपोरोसिस किसे कहते हैं इस बीमारी के लिए कौन कौन सी आदतें जिम्मेदार हो सकती है।

Osteoporosis क्या है?

ऑस्टियोपोरोसिस एक ऐसी स्थिति है जिसमें हड्डियां कमजोर और भंगुर हो जाती हैं, जिससे उनमें फ्रैक्चर होने का खतरा बढ़ जाता है। यह तब होता है जब हड्डियों का घनत्व कम हो जाता है और शरीर उतनी जल्दी नई हड्डी के ऊतकों का उत्पादन करने में असमर्थ हो जाता है, जितनी जल्दी वो पुराने ऊतकों को तोड़ रहा होता है। पुरुषों की तुलना में महिलाओं में ऑस्टियोपोरोसिस अधिक आम है और अक्सर उम्र बढ़ने, रजोनिवृत्ति, और डाइट में कैल्शियम और विटामिन डी की कमी से जुड़ा होता है।

गलतियां जिनकी वजह से हो रही हैं हड्डियां कमजोर

ज्यादा देर तक लगातार बैठना

घंटों कुर्सी या टीवी के सामने बैठे रहना पैरों के ब्लड सर्कुलेशन को धीमा कर देता है। विशेषज्ञों के अनुसार 30 मिनट से अधिक लगातार बैठने पर मांसपेशियों तक ऑक्सीजन की आपूर्ति घटने लगती है। इससे सुन्नपन, भारीपन और धीरे-धीरे कमजोरी महसूस हो सकती है। हर आधे घंटे में उठकर 2–3 मिनट टहलें, टखनों को घुमाएं और पंजों को ऊपर-नीचे करें। छोटे मूवमेंट भी पैरों में रक्त प्रवाह बढ़ाते हैं।

ज्यादा चीनी और रिफाइंड कार्ब्स का सेवन

सफेद चीनी, मैदा और प्रोसेस्ड फूड का अधिक सेवन नसों और ब्लड वेसल्स पर नकारात्मक असर डाल सकता है। शोध बताते हैं कि अधिक शुगर शरीर में ऐसी प्रक्रियाएं बढ़ाती है, जिससे रक्त नलिकाएं सख्त होने लगती हैं। इसका असर पैरों की नसों पर पड़ता है और झनझनाहट, जलन या संवेदनशीलता में कमी आ सकती है। मीठे और बेकरी उत्पादों को सीमित कर संतुलित, फाइबरयुक्त भोजन अपनाना बेहतर विकल्प है।

पर्याप्त पानी न पीना

उम्र बढ़ने के साथ शरीर का ब्लड वॉल्यूम घटता है। अगर पानी कम पिया जाए तो खून गाढ़ा हो सकता है, जिससे पैरों में सूजन, ऐंठन और थकान बढ़ती है। पर्याप्त हाइड्रेशन नसों और मांसपेशियों के लिए जरूरी है। दिन की शुरुआत एक गिलास गुनगुने पानी से करें और पूरे दिन नियमित अंतराल पर पानी पीते रहें। सही मात्रा में पानी शरीर के संचार तंत्र को बेहतर बनाए रखने में मदद करता है।

प्रोटीन और विटामिन की कमी

उम्र के साथ मांसपेशियां स्वाभाविक रूप से कम होती हैं, लेकिन प्रोटीन की कमी इस प्रक्रिया को तेज कर सकती है। दाल, चना, पनीर, अंडा, सोया या मछली जैसे स्रोत मांसपेशियों को मजबूती देते हैं। साथ ही विटामिन D और B12 की कमी भी पैरों की कमजोरी और झनझनाहट से जुड़ी हो सकती है। संतुलित आहार और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से सप्लीमेंट लेना फायदेमंद हो सकता है।

 देर रात तक जागना और नींद की कमी

नींद शरीर की मरम्मत प्रक्रिया के लिए बेहद जरूरी है। सोते समय ग्रोथ हार्मोन मांसपेशियों और टिश्यू की रिकवरी में मदद करता है। 6 घंटे से कम नींद लेने पर मांसपेशियों की कमजोरी और थकान बढ़ सकती है। रोजाना 7–8 घंटे की नींद लेने की आदत डालें। सोने से पहले हल्का स्ट्रेच या गुनगुने पानी से पैरों की सिकाई ब्लड फ्लो सुधारने में सहायक हो सकती है।

डिस्क्लेमर:
यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें दी गई जानकारी किसी भी प्रकार की चिकित्सीय सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं है। अपनी डाइट या जीवनशैली में किसी भी तरह का बदलाव करने से पहले डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें, विशेषकर यदि आप किसी पुरानी बीमारी, एलर्जी या अन्य स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे हैं।