दस दिन में स्पूतनिक टीके का हो सकेगा आपात इस्तेमाल

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने कहा कि कोरोना विषाणु संक्रमण रोधी रूसी टीके स्पूतनिक के लिए हमारे पास आवेदन है और मैं समझता हूं कि सप्ताह या दस दिन के अंदर इसके आपातकालीन इस्तेमाल के लिए अनुमति मिल जाएगी।

Author नई दिल्‍ली | Updated: April 12, 2021 9:01 AM
corona case, lockdownमुंबई के रेलवे स्टेशन पर कोविड टेस्ट करती कर्मचारी। फोटो क्रेडिट- पीटीआई

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने कहा कि कोरोना विषाणु संक्रमण रोधी रूसी टीके स्पूतनिक के लिए हमारे पास आवेदन है और मैं समझता हूं कि सप्ताह या दस दिन के अंदर इसके आपातकालीन इस्तेमाल के लिए अनुमति मिल जाएगी। उन्होंने कहा कि मॉडर्ना ने अपने टीके के लिए भारत में आवेदन ही नहीं किया और फाइजर ने शुरू में एक बार आवेदन किया था लेकिन जब हमने बताया कि उन्हें हमारे यहां परीक्षण करने होंगे तो उन्होंने अपना आवेदन वापस ले लिया।

हर्षवर्धन ने एक निजी समाचार चैनल से बातचीत में कहा कि रूस में विकसित हुए कोरोना के टीके स्पूतनिक को जल्द ही भारत में आपातकालीन उपयोग की इजाजत मिल सकती है। उन्होंने कहा कि स्पूतनिक ने हमारे यहां आवेदन किया हुआ है और मैं समझता हूं कि सप्ताह या दस दिन में इस टीके को देश में आपातकालीन उपयोग की इजाजत मिल जाएगी। उन्होंने कहा कि हमारे पास फाइजर और मॉडर्ना ने अपने टीकों के इस्तेमाल का कोई आवेदन नहीं किया है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि फाइजर ने शुरुआत में एक बार हमारे यहां आवेदन किया था लेकिन जब हमने बताया कि टीकों के इस्तेमाल से पहले हमारे देश में परीक्षण करना होगा तो फाइजर ने अपना आवेदन वापस ले लिया और दोबारा आवेदन नहीं किया।

हर्षवर्धन ने बताया कि मैं विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री भी हूं और मैं कह सकता हूं कि आज तक इतनी तेजी से किसी भी बीमारी का कोई भी टीका विकसित नहीं हुआ होगा कि एक साल से कम समय में टीका तैयार हो गया हो। एक साल से कम समय में हमने दो टीके तैयार करके देश को दे दिए। एक बड़ी उपलब्धि है। इसके अलावा अभी छह टीके नैदानिक परीक्षण में हैं जबकि 14 टीके नैदानिक परीक्षण से पहले के चरण में हैं। कोवैक्सीन और कोविशील्ड के दस करोड़ से अधिक टीके हमारे यहां लग चुके हैं।

देश में कोरोना टीकों की कमी पर हर्षवर्धन ने कहा कि भारत टीकाकरण में अमेरिका से भी आगे है। टीकाकरण एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के दिशानिर्देश हैं कि सबसे पहले उन लोगों को टीका लगाया जाए जिन पर खतरा अधिक है। देश में टीकों की उपलब्धता की भी अपनी एक क्षमता है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ टीकों को लेकर राजनीति कर रहे हैं। कोवैक्सीन को लेकर छत्तीसगढ़ ने राजनीति की। कई महीने तक उन्होंने टीके का इस्तेमाल ही नहीं किया। अभी तक सबसे अधिक टीके महाराष्ट्र को दिए गए हैं।

रविवार को 1.70 लाख से ज्यादा नए मामले

देश में कोरोना विषाणु संक्रमण के नए मामलों की संख्या बेहद तेज गति से बढ़ रही है। रविवार रात साढ़े दस बजे तक देश में संक्रमण के 1,70,169 नए मामले सामने आए। देश में लगातार दूसरे दिन डेढ़ लाख से अधिक नए मामले दर्ज किए गए हैं। वहीं, 842 लोगों की जान संक्रमण के चलते गई। ये आंकड़े 29 राज्य और केंद्रशासित प्रदेशों के स्वास्थ्य विभागों की ओर से जारी किए गए थे।

देश में सबसे अधिक 63,294 नए मामले महाराष्ट्र में दर्ज किए गए। शनिवार के मुकाबले रविवार को 7,883 नए मामले अधिक दर्ज किए गए। महाराष्ट्र स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक राज्य में रविवार को इस महामारी के चलते 349 लोगों की मौत हुई। राज्य में संक्रमितों की कुल संख्या 34,07,245 तक पहुंच गई है। वहीं, अब तक संक्रमण से 57,987 लोगों की मौत हुई है। महाराष्ट्र में 5,65,587 लोगों का इलाज जारी है। पुणे में 12,377, मुंबई में 9,989 और नागपुर में 7,201 नए मामले दर्ज किए गए।
देश में महाराष्ट्र के अलावा चौबीस घंटे में सर्वाधिक नए मामले दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और गुजरात में दर्ज किए गए।

महाराष्ट्र के बाद देश में उत्तर प्रदेश में 15,353, दिल्ली में 10,774, छत्तीसगढ़ में 10,521, कर्नाटक में 10,469, केरल में 6,986, तमिलनाडु में 6,618, मध्य प्रदेश में 5,939, गुजरात में 5,469, राजस्थान में 5,105, पश्चिम बंगाल में 4,398, बिहार में 3,756, आंध्र प्रदेश में 3,495, हरियाणा में 3,440, तेलंगाना में 3,187, पंजाब में 3,116, झारखंड में 2,373, ओड़ीशा में 1,379, उत्तराखंड में 1,333, जम्मू कश्मीर में 915, हिमाचल प्रदेश में 570, गोवा में 525, चंडीगढ़ में 402, असम में 352, पुदुचेरी में 306, त्रिपुरा में 48, मिजोरम में 29, अंडमान निकोबार में 14 और अरुणाचल प्रदेश में तीन नए मामले दर्ज किए गए।

प्रधानमंत्री ने कहा, टीका लगवाने में करें दूसरों की मदद

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को देश में ‘टीका उत्सव’ की शुरुआत की और कोरोना विषाणु के खिलाफ लड़ाई में जनता से सहयोग की अपील करते हुए अनेक सुझाव दिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज 11 अप्रैल यानी ज्योतिबा फुले जयंती से हम देशवासी ‘टीका उत्सव’ की शुरुआत कर रहे हैं। यह ‘टीका उत्सव’ 14 अप्रैल यानी बाबा साहेब आंबेडकर जयंती तक चलेगा। प्रधानमंत्री ने लोगों से चार आग्रह करते हुए कहा, ‘ईच वन वैक्सीनेट वन’ अर्थात् जो लोग कम पढ़े-लिखे हैं, बुजुर्ग हैं, जो स्वयं जाकर टीका नहीं लगवा सकते, उनकी मदद करें।

प्रधानमंत्री कोरोना उपचार में, मास्क को बढ़ावा देकर संक्रमण से बचाव में अन्य लोगों की मदद करने की अपील की और कहा, ‘हर व्यक्ति दूसरे व्यक्ति की रक्षा करे, हर व्यक्ति दूसरे व्यक्ति का बचाव करे’। प्रधानमंत्री ने समाज के लोगों, परिवारों से कोरोना की स्थिति में छोटे निषिद्ध क्षेत्र बनाने में सहयोग की अपील की।

प्रधानमंत्री ने कहा कि यह ‘टीका उत्सव’ कोरोना के खिलाफ दूसरी बड़ी लड़ाई है, हमें व्यक्तिगत एवं सामाजिक स्तर पर स्वच्छता पर जोर देना होगा। प्रधानमंत्री ने एक अन्य आग्रह करते हुए कहा, ‘ईच वन- ट्रीट वन’ अर्थात जिन लोगों के पास उतने साधन नहीं हैं, जिन्हें जानकारी भी कम है, कोरोना के इलाज में उनकी सहायता करें। उन्होंने कहा, ‘ईच वन- सेव वन’, यानी मैं स्वयं भी मास्क पहनूं और इस तरह स्वयं का भी बचाव करूं और दूसरों को भी बचाऊं, इस पर बल देना है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि एक और अहम बात यह है कि किसी को कोरोना विषाणु संक्रमण होने की स्थिति में, ‘छोटे निषिद्ध क्षेत्र’ (माइक्रो कंटेनमेंट जोन) बनाने का नेतृत्व समाज के लोग करें। प्रधानमंत्री ने कहा कि जहां पर संक्रमण का एक भी मामला आया है, वहां परिवार के लोग, समाज के लोग छोटे निषिद्ध क्षेत्र बनाएं। उन्होंने कहा कि भारत जैसे सघन जनसंख्या वाले देश में कोरोना विषाणु के खिलाफ लड़ाई का एक महत्त्वपूर्ण तरीका छोटे निषिद्ध क्षेत्र भी हैं। उन्होंने कहा कि संक्रमण का एक भी मामला आने पर हम सभी का जागरूक रहना, बाकी लोगों की भी जांच कराना बहुत आवश्यक है। हमारी सफलता इस बात पर तय होगी कि जो टीका लगवाने का अधिकारी है, उसे टीका लगे।


‘लुधियाना, पटियाला में संक्रमितों के संपर्कों पर ज्यादा ध्यान दिया जाए’

केंद्र ने पंजाब सरकार को कोरोना विषाणु संक्रमण को काबू में करने के लिए कुछ सुझाव दिए हैं। इसके तहत लुधियाना और पटियाला में संक्रमितों के संपर्कों को खोजने पर अधिक ध्यान देने के लिए कहा है। दरअसल, कुछ दिन पहले केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से पंजाब, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में कुल 50 उच्चस्तरीय टीमें भेजी थीं। इन्हीं टीमों की रिपोर्ट के आधार पर केंद्र ने ये सुझाव दिए हैं। इस संबंध में केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने पंजाब, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में मुख्य सचिवों को पत्र लिखा है।

पंजाब प्रशासन को लिखे पत्र में भूषण ने लिखा कि हमारी टीमों ने राज्य और केंद्र सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। इसके मुताबिक पटियाला और लुधियाना जिलों में संक्रमितों के संपर्कों को खोजने पर ध्यान केंद्रित करना होगा। वहीं एसएएस नगर में श्रमशक्ति की कमी के चलते संपर्कों तक पहुंचे और उनकी निगरानी में समस्या आ रही है। इसलिए जल्द से जल्द इस जिले में श्रमशक्ति का इंतजाम किया जाए। पटियाला में कम आरटी पीसीआर जांच हो रही हैं। दूसरी ओर, रूपनगर जिले में कोई आरटी पीसीआर जांच प्रयोगशाला नहीं है। इन दोनों मामलों को तुरंत हल निकाला जाए।

भूषण ने लिखा कि एसएएस नगर और रूपनगर में कोई भी समर्पित कोरोना अस्पताल नहीं है। इसकी वजह से कोरोना के मरीजों को आसपास के जिलों या चंडीगढ़ भेजा जा रहा है। इतना ही नहीं रूपनगर में कोरोना देखभाल केंद्रों की भी कमी है। वहीं, एसएएस नगर, जलंधर और लुधियाना के अस्पतालों में बिस्तरों भर गए हैं। इन मुद्दों को तुरंत हल करने की आवश्यकता है। केंद्रीय टीम ने एसबीएस नगर में वेंटिलेटर प्राप्त करने में परेशानी को पाया है। दूसरी ओर, रूपनगर में पर्याप्त संख्या में वेंटिलेटर उपलब्ध हैं लेकिन इन्हें चलाने वाले कर्मचारियों का अभाव है। ऐसे में प्रशासन को अनुबंध पर कर्मचारियों की नियुक्ति का सुझाव दिया गया है।

भूषण के मुताबिक स्वास्थ्यकर्मियों की कमी पटियाला, रूपनगर और एसएएस नगर में भी देखी गई है। टीम ने पटियाला और लुधियाना में कोरोना टीकाकरण की रफ्तार सुस्त पाई है। इसे तुरंत बढ़ाने की जरूरत है। टीमों ने सभी जिलों में लोगों के बीच कोरोना बचाव के उपायों को अपनाने में ढील पाई है। लोगों से कोरोना बचाव के उपायों को अपनाने के लिए प्रेरित करने के लिए कहा गया है।

भूषण ने महाराष्ट्र को लिखे पत्र में कहा कि सतारा, सांगली और औरंगाबाद जिलों में कोरोना को काबू करने तरीके कम संतोषजनक पाए गए।श्रमशक्ति की कमी के चलते बुल्ढाना, सतारा, औरंगाबाद और नांदेड में संक्रमितों के संपर्कों की निगरानी सही ढंग से नहीं हो रही है। केंद्र ने महाराष्ट्र सरकार से इन मुद्दों को तुरंत हल करने के लिए कहा है।

इसके अलावा केंद्रीय टीमों के मुताबिक सतारा, भंडारा, पालघर, अमरावती, जालना और लातूर जिलों में जांच परिणामों में देरी हो रही है। भंडारा और सतारा जिलों में कोरोना संक्रमितों का इलाज घरों में पृथकवास में हो रहा है। पृथकवास में मरीजों का बेहतर इलाज नहीं हो पा रहा है जिससे मृत्यु की संख्या बढ़ रही है। महाराष्ट्र के कई जिलों में स्वास्थ्यकर्मियों की कमी देखी गई है। इन जिलों में अनुबंध के आधार पर स्वास्थ्यकर्मियों की नियुक्ति के लिए कहा गया है।

केंद्रीय सचिव की ओर से छत्तीसगढ़ को लिखे पत्र में कहा गया है कि रायपुर और जशपुर में निषिद्ध क्षेत्रों का प्रबंधन ठीक ढंग ने नहीं किया जा रहा है। निषिद्ध क्षेत्रों में लोगों की आवाजाही जारी है। इस पर तुरंत कार्रवाई करने के लिए केंद्र ने कहा है। कोबरा, दुर्ग और बलोड़ जिलों में आरटी पीसीआर जांच की सुविधा कम है।

ऐसे में चलती फिरती प्रयोगशालाओं के उपयोग के लिए कहा गया है। दुर्ग जिले में एंबुलेंस की सुविधा सही नहीं है। इसे तुरंत दुरुस्त करने के लिए कहा गया है। बलोड़, दुर्ग, महासमुंद और रायपुर के अस्पतालों में बिस्तरों की संख्या बढ़ाने के लिए कहा गया है। कुछ जिलों में स्वास्थ्यकर्मियों की कमी के बारे में भी केंद्रीय टीमों ने बताया है। केंद्र ने इसके लिए अनुबंध के आधार पर नियुक्ति के लिए कहा है।


रेमडेसिविर के निर्यात पर रोक

कोरोना विषाणु संक्रमण के मामलों में वृद्धि के कारण रेमडेसिविर की मांग बढ़ने के मद्देनजर केंद्र सरकार ने रविवार को कहा कि संक्रमण रोधी इंजेक्शन और इसकी सक्रिय दवा सामग्री (एपीआइ) के निर्यात पर स्थिति में सुधार होने तक रोक लगा दी गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि इसके अलावा दवा की आसानी से उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए रेमडेसिविर के सभी घरेलू निर्माताओं को अपने विक्रेताओं और वितरकों की जानकारी अपनी वेबसाइट पर प्रदर्शित करने की सलाह दी गई है।
औषधि निरीक्षकों और अन्य अधिकारियों को भंडार को सत्यापित करने, कदाचारों की जांच करने और इसकी जमाखोरी व कालाबाजारी को रोकने के लिए अन्य प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए गए है।

राज्यों के स्वास्थ्य सचिव संबंधित राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के औषधि निरीक्षकों के साथ इसकी समीक्षा करेंगे। मंत्रालय ने कहा कि देश में कोरोना के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। देश में 11 अप्रैल तक उपचाराधीन मरीजों की संख्या 11.08 लाख है और यह संख्या तेजी से बढ़ रही है। इससे कोरोना मरीजों के इलाज में इस्तेमाल होने वाले रेमडेसिविर इंजेक्शन की मांग तेजी से बढ़ी है। उसने कहा कि आने वाले दिनों में इसकी मांग में और बढ़ोतरी हो सकती है।

मंत्रालय ने कहा कि सात भारतीय कंपनियां मेसर्स गिलीड साइंसेज, अमेरिका, के साथ स्वैच्छिक लाइसेंसिंग समझौते के तहत इंजेक्शन का उत्पादन कर रही हैं। उनके पास प्रति माह लगभग 38.80 लाख इकाइयों को बनाने की क्षमता है। मंत्रालय ने कहा कि भारत सरकार ने स्थिति में सुधार होने तक रेमडेसिविर और इसकी सक्रिय दवा सामग्री (एपीआई) के निर्यात पर स्थिति में सुधार होने तक रोक लगा दी गई है। मंत्रालय ने कहा कि फार्मास्युटिकल विभाग दवा के उत्पादन को बढ़ाने के लिए घरेलू निर्माताओं के साथ संपर्क में है।

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