हाई ब्लड प्रेशर (Hypertension) को बिना वजह ‘साइलेंट किलर’ (Silent Killer) नहीं कहा जाता। इसकी सबसे खतरनाक बात यही है कि यह शरीर के अंदर चुपचाप पनपता है और जब तक इसके लक्षण सामने आते हैं, तब तक यह दिल, किडनी और दिमाग को भारी नुकसान पहुंचा चुका होता है। भागदौड़ भरी जिंदगी में हाई बीपी अब सिर्फ बुजुर्गों की बीमारी नहीं रही, बल्कि युवा भी तेजी से इसकी चपेट में आ रहे हैं। भारत में हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों की संख्या में तेजी से इज़ाफा हो रहा है। लाखों भारतीय स्टेज-1 हाइपरटेंशन के साथ भी खुद को पूरी तरह स्वस्थ और ऊर्जावान महसूस करते हैं। स्टेज-1 हाइपरटेंशन एक ऐसी स्थिति है जिसमें सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर 130–139 mmHg या डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर 80–89 mmHg के बीच रहता है। लाखों भारतीय साइलेंट किलर डिजीज हाई बीपी का शिकार हैं और उन्हें अंदाजा भी नहीं है।

नारायणा इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियक साइंसेज, बेंगलुरु में वरिष्ठ सलाहकार एवं हृदय प्रत्यारोपण कार्यक्रम के निदेशक डॉ. बागीरथ रघुरामन ने बताया  लाखों भारतीय मास्क्ड हाइपरटेंशन (Masked Hypertension) से जूझ रहे हैं। ये एक ऐसी स्थिति है जिसमें व्यक्ति का ब्लड प्रेशर डॉक्टर के क्लिनिक या अस्पताल में सामान्य दिखाई देता है, लेकिन घर, ऑफिस या रोजमर्रा की जिंदगी में बढ़ा हुआ रहता है। यानी हाई ब्लड प्रेशर छिपा रहता है, इसलिए इसे मास्क्ड हाइपरटेंशन कहा जाता है। ये एक ऐसी स्थिति है जिसमें इंसान सही महसूस करता है और ये साइलेंट किलर बॉडी को अंदर ही अंदर नुकसान पहुंचाता है। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि मास्क्ड हाई बीपी के लक्षण कौन कौन से हैं और युवाओं को कैसे इससे अपना बचाव करना चाहिए।

आखिर क्यों बढ़ता है ब्लड प्रेशर?

हाई ब्लड प्रेशर के लिए खराब डाइट और बिगड़ता लाइफस्टाइल जिम्मेदार है। खाने में ज्यादा नमक का सेवन हाई बीपी का सबसे बड़ा कारण है। हम भारतीय नमक का सेवन सिर्फ अचार और पापड़ जैसे पारंपरिक खाद्य पदार्थों में ही नहीं, बल्कि पैकेज्ड ‘डाइट’ स्नैक्स, रेडी-टू-ईट फूड और फास्ट फूड के रूप में  में भी करते हैं। इसके अलावा बढ़ता मोटापा, लंबे समय तक बैठे रहने वाला लाइफस्टाइल और लगातार मानसिक या भावनात्मक तनाव भी समस्या को गंभीर बना सकता हैं।

शरीर को चुपचाप कैसे नुकसान पहुंचाता है ये मास्क हाई BP?

ब्लड प्रेशर धमनियों की दीवारों पर पड़ने वाले रक्त के दबाव को मापता है। जब यह दबाव लंबे समय तक अधिक रहता है तो धमनियां इस दबाव को सहने के लिए धीरे-धीरे कठोर और मोटी होने लगती हैं। चूंकि यह प्रक्रिया धीरे-धीरे और कोशिकीय स्तर पर होती है, इसलिए मस्तिष्क अक्सर इस बढ़े हुए दबाव को शरीर की नई सामान्य स्थिति मान लेता है। नतीजा यह होता है कि व्यक्ति अपने दिल और किडनी पर पड़ रहे अतिरिक्त दबाव से अनजान रहता है। युवाओं के लिए यह स्थिति खासतौर पर चिंताजनक है। भारत के करीब 12.1 प्रतिशत युवा हाइपरटेंशन से प्रभावित हैं। इससे कम उम्र में दिल के रोगों का खतरा बढ़ रहा है।

मास्क्ड हाइपरटेंशन क्यों खतरनाक है?

इस स्थिति का समय पर पता नहीं चल पाता, इसलिए बिना इलाज के लंबे समय तक हाई ब्लड प्रेशर बना रह सकता है। इससे कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है जैसे

  • हार्ट अटैक
  • स्ट्रोक
  • किडनी की बीमारी
  • हार्ट फेल्योर
  • आंखों की रक्त वाहिकाओं को नुकसान होने का खतरा रहता है।

किन लोगों को मास्क बीपी का खतरा ज्यादा है?

मास्क्ड बीपी का खतरा धूम्रपान और शराब का सेवन करने वाले लोगों में तेजी से पनपता है।
मोटापा या बढ़ता वजन इस बीमारी के जोखिम कारक है।
कुछ बीमारियों जैसे डायबिटीज,क्रोनिक किडनी डिजीज, बीपी की फैमिली हिस्ट्री वाले लोगों और तनाव में रहने वाले लोगों में हाई बीपी का खतरा ज्यादा रहता है।

हाई BP के इन हल्के लक्षणों को लोग अक्सर करते हैं नजरअंदाज

  • रात में बार-बार पेशाब के लिए उठना जिसे नेक्टोरिया कहा जाता है, इस बात का संकेत हो सकता है कि हाई बीपी किडनी पर अतिरिक्त दबाव डाल रहा है। इससे आराम के समय भी किडनी को अधिक काम करना पड़ सकता है।
  • कान में कुछ आवाजें सुनाई देना जैसे दिल की धड़कन की ‘धक-धक’ या ‘हूश’ जैसी आवाज सुनाई देना। यह आवाजें संकरी धमनियों से रक्त के असामान्य या अशांत प्रवाह के कारण सुनाई दे सकती है।
  • सिर के पिछले हिस्से या कंधों के ऊपरी हिस्से में लगातार तनाव या भारीपन को अक्सर खराब पोस्चर से जोड़ा जाता है। हालांकि, कुछ मामलों में यह रक्त वाहिकाओं पर पड़ रहे दबाव की प्रतिक्रिया भी हो सकती है।
  • जर्नल ऑफ क्लिनिकल स्लीप मेडिसिन में प्रकाशित शोध हाइपरटेंशन और बार-बार नींद टूटने के बीच संबंध की ओर इशारा करते हैं।
  • आंख के सफेद हिस्से में बिना दर्द वाला लाल धब्बा छोटी और नाजुक रक्त वाहिकाओं के फटने के कारण हो सकता है। कुछ स्थितियों में बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर इसका एक कारण हो सकता है।

मास्क्ड हाइपरटेंशन को कैसे करें कंट्रोल

मास्क्ड हाइपरटेंशन के मामले बढ़ रहे हैं। इस स्थिति को कंट्रोल करने के लिए ‘रूल ऑफ थ्री’ अपनाया जा सकता है। लगातार तीन दिनों तक एक ही समय पर घर में अपना ब्लड प्रेशर मापें। अगर औसत BP लगातार 135/85 mmHg से अधिक है तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

24 घंटे की एम्बुलेटरी ब्लड प्रेशर मॉनिटरिंग (ABPM) जांच दिन और रात के दौरान BP में होने वाले बदलावों की महत्वपूर्ण जानकारी दे सकती है। यह जांच न केवल हाइपरटेंशन का पता लगाने में मदद करती है, बल्कि BP बढ़ाने वाले संभावित ट्रिगर पहचानने और बीमारी को मैनेज करने में भी उपयोगी हो सकती है।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी डॉ. बागीरथ रघुरामन, नारायणा इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियक साइंसेज, बेंगलुरु में वरिष्ठ सलाहकार एवं हृदय प्रत्यारोपण कार्यक्रम के निदेशक द्वारा साझा की गई विशेषज्ञ राय पर आधारित है। यह लेख केवल सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित किया गया है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या, बीमारी या उपचार से संबंधित निर्णय लेने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श करें।