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बच्चों में कितना होना चाहिए ब्लड शुगर लेवल, जानें High Blood Sugar लक्षण और बचाव के उपाय

Diabetes Risk in Kids: बच्चों में डायबिटीज टाइप 1 के लक्षणों की पहचान अगर समय रहते है हो जाती है तो कॉम्प्लिकेशन्स को रोका जा सकता है

6 साल से 12 साल की बच्चों का फास्टिंग शुगर लेवल 80 से 180 mg/dl के बीच होता है

Diabetes Type 1 in Children: डायबिटीज एक मेटाबॉलिक डिसॉर्डर के कारण होने वाला रोग है। अक्सर लोगों को लगता है कि ये बीमारी उम्रदराज लोगों को ही होती है। लेकिन ये गलत धारणा है, एक्सपर्ट्स के मुताबिक ये बीमारी किसी भी उम्र के व्यक्ति को अपनी चपेट में ले सकती है। यहां तक कि बच्चे भी इस रोग का शिकार हो सकते हैं। बता दें कि टाइप 1 डायबिटीज का जोखिम बच्चों में होता है। इस स्थिति में शरीर एक महत्वपूर्ण हार्मोन (इंसुलिन) नहीं बना पाता है।

डायबिटीज से ग्रस्त बच्चों का कितना होता है ब्लड शुगर: 6 साल से 12 साल की बच्चों का फास्टिंग शुगर लेवल 80 से 180 mg/dl के बीच होता है, वहीं खाने से पहले इसका स्तर 90-180 mg/dl हो सकता है। पोस्ट प्रैंडियल शुगर लेवल 140mg/dL होना चाहिए। जबकि रात को 100-180 mg/dl हो सकता है।

इसके अलावा, 13 से 19 साल के टीनेजर्स में फास्टिंग ब्लड शुगर लेवल 70 से 150 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर होता है। वहीं, खाने से पहले युवाओं के रक्त शर्करा का स्तर 90 से 130 एमजी/डीएल होना चाहिए। अगर ये लोग व्यायाम करते हैं तो उससे पहले ब्लड शुगर 150 हो सकता है। जबकि रात के समय रक्त शर्करा का स्तर 90 से 150 एमजी/डीएल के बीच हो सकता है।

क्या हैं बच्चों में मधुमेह के लक्षण: एक्सपर्ट्स के मुताबिक बच्चों में डायबिटीज टाइप 1 के लक्षणों की पहचान अगर समय रहते है हो जाती है तो कॉम्प्लिकेशन्स को रोका जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार अगर बच्चे कुछ देर में ही थक जाते हैं तो ऐसा बढ़े ब्लड शुगर के कारण हो सकता है। इसके अलावा, हाई ब्लड शुगर के कारण बच्चों को ज्यादा भूख और प्यास लग सकती है।

विशेषज्ञों के अनुसार जिन बच्चों का रक्त शर्करा ज्यादा होता है, उन्हें बार-बार पेशाब लगने की शिकायत हो सकती है। इसके अलावा, पर्याप्त खाने के बावजूद अगर बच्चों का वजन कम होता है तो ऐसा डायबिटीज के कारण हो सकता है।

किन बातों का रखें ख्याल: छोटे बच्चों के अभिभावकों को ही उनका ख्याल रखना पड़ता है। ध्यान रखें कि उन्हें अधिक ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले खाने को डाइट में शामिल करने से बचें। साथ ही, जंक फूड से बच्चों को दूर रखें और पौष्टिक फूड खाने के लिए प्रेरित करें। समय-समय पर ब्लड शुगर लेवल की जांच करें।

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