मैं डॉ. सप्तर्षि भट्टाचार्य एक एंडोक्रिनोलॉजिस्ट हूं और मेरे पास 15 सालों का अनुभव है। मैं दिल्ली के अपोलो हॉस्पिटल्स और इंद्रप्रस्थ हॉस्पिटल से जुड़ा हूं। मैं एंडोक्रिनोलॉजी से जुड़ी कई तरह की बीमारियों का इलाज करता हूं। आज मैं आपको केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की वेट लॉस जर्नी की कहानी बता रहा हूं। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी अपने काम के साथ-साथ अपने गजब के बॉडी ट्रांसफॉर्मेशन के लिए भी खूब सुर्खियां बटोर रहे हैं। नियमित प्राणायाम, संतुलित आहार और अनुशासित जीवनशैली के दम पर उन्होंने अपना 46 किलो वजन घटाया है।
हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि हर व्यक्ति का मेटाबॉलिज्म और बॉडी टाइप अलग होता है, इसलिए वजन घटाने का कोई एक ‘यूनिवर्सल’ तरीका नहीं हो सकता। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने हाल ही में बताया कि उन्होंने अपना वजन करीब 135 किलो से घटा कर 89 किलो किया। उन्होंने यह भी बताया कि वह रोजाना करीब ढाई घंटे एक्सरसाइज करते हैं। उनका अनुभव यह बताता है कि वजन कम करना जितना महत्वपूर्ण है, उससे कहीं बड़ी चुनौती लंबे समय तक उस वजन को बनाए रखना है।
वजन घटाने के बाद उसे मेंटेन रखना क्यों है मुश्किल?
फिटनेस एक्सपर्ट के मुताबिक एक बार शरीर का वजन कम होने के बाद बॉडी दोबारा वजन बढ़ाने की कोशिश कर सकती है। जब कोई व्यक्ति काफी वजन घटाता है, तो शरीर ऊर्जा बचाने के लिए कई तरह के बदलाव करता है। ऐसे में भूख बढ़ सकती है और पेट खाली होने का एहसास ज्यादा हो सकता है। इतना ही नहीं बॉडी की एनर्जी बर्न करने की क्षमता भी घट सकती है। इस प्रक्रिया को मेटाबॉलिक अडॉप्टेशन (Metabolic Adaptation) कहा जाता है।
वजन घटने के बाद बदलते हैं हार्मोन
वजन कम होने के बाद भूख और तृप्ति को कंट्रोल करने वाले कई हार्मोन और शरीर के सिग्नल बदल सकते हैं। लेप्टिन और घ्रेलिन हॉर्मोन, आंतों से जुड़े दूसरे हार्मोन भूख बढ़ाने और पेट भरा होने का एहसास कम कर सकते हैं। इनमें से कुछ बदलाव वजन घटाने के काफी समय बाद तक बने रह सकते हैं। यही वजह है कि 20-30 किलो वजन कम करने के बाद भी उसे बनाए रखना कई लोगों के लिए चुनौतीपूर्ण होता है।
मोटापा क्या है ये समझना है जरूरी?
मोटापे को केवल ज्यादा खाना या इच्छाशक्ति की कमी के तौर पर देखना सही नहीं है। यह एक क्रॉनिक बीमारी है, जिसमें शरीर की भूख, ऊर्जा खर्च करने और वजन को कंट्रोल करने वाली जैविक प्रक्रियाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इसलिए वजन कम होने के बाद भी शरीर में दोबारा वजन बढ़ने का खतरा बना रहता है।
बैरिएट्रिक सर्जरी से वजन कम होने के बाद क्या होता है?
नितिन गडकरी वजन को कम करने के लिए पहले बैरिएट्रिक सर्जरी करा चुके हैं। आपको बता दें कि बैरिएट्रिक या मेटाबोलिक सर्जरी को सिर्फ पेट का आकार छोटा करने वाली प्रक्रिया समझना सही नहीं है। स्लीव गेस्ट्रोक्टॉमी और गैस्ट्रिक बाईपास जैसी प्रक्रिया भूख, पेट भरा होने के एहसास, आंतों के हार्मोन और शरीर की कई मेटाबॉलिक प्रक्रियाओं को प्रभावित करती हैं। टाइप-2 डायबिटीज वाले कुछ मरीजों में सर्जरी के बाद ब्लड शुगर में तेजी से सुधार देखा जा सकता है।
क्या सर्जरी के बाद भी वजन बढ़ सकता है
बैरिएट्रिक सर्जरी वजन कम करने में प्रभावी हो सकती है, लेकिन यह वजन दोबारा बढ़ने से हमेशा के लिए सुरक्षा नहीं देती। कुछ लोगों में समय के साथ शुरुआती वजन का एक हिस्सा वापस बढ़ सकता है। अगर वजन दोबारा बढ़ता है, तो पहले से नियंत्रित या रिमिशन में गई डायबिटीज भी वापस आ सकती है। इसलिए सर्जरी को मोटापे के इलाज का अंत नहीं, बल्कि लंबे समय तक चलने वाले मैनेजमेंट की शुरुआत समझना बेहतर है।
सर्जरी के बाद डाइट और न्यूट्रिशन पर ध्यान जरूरी
बैरिएट्रिक सर्जरी के बाद भी भोजन की गुणवत्ता, पोर्शन साइज, पर्याप्त प्रोटीन, शारीरिक गतिविधि, नींद और नियमित मेडिकल फॉलोअप जरूरी रहते हैं। सर्जरी के बाद कुछ लोगों में आयरन, विटामिन B12, विटामिन D और कैल्शियम जैसे पोषक तत्वों की कमी हो सकती है। इसलिए डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियमित न्यूट्रिशन मॉनिटरिंग जरूरी है।
46 किलो वजन कम करने के लिए क्या रोजाना ढाई घंटे एक्सरसाइज करना जरूरी है?
नितिन गडकरी का रोजाना करीब ढाई घंटे एक्सरसाइज करना उनकी व्यक्तिगत दिनचर्या का हिस्सा है। इसका मतलब यह नहीं है कि वजन कम करने या उसे बनाए रखने के लिए हर व्यक्ति को रोजाना इतनी लंबी एक्सरसाइज करनी ही होगी। ज्यादातर लोगों के लिए ऐसा रूटीन लंबे समय तक अपनाना मुश्किल हो सकता है। इसलिए लक्ष्य ऐसी शारीरिक गतिविधि होना चाहिए जिसे व्यक्ति अपनी क्षमता और दिनचर्या के अनुसार लगातार जारी रख सके।
सिर्फ एक्सरसाइज से क्या वजन कंट्रोल रहता है?
एक्सरसाइज महत्वपूर्ण है, लेकिन यह खराब डाइट के प्रभाव को पूरी तरह खत्म नहीं कर सकती। कुछ ही समय में कई सौ कैलोरी का सेवन करना आसान है, जबकि उतनी कैलोरी खर्च करने में काफी अधिक समय लग सकता है। इसलिए वजन कम करने के बाद ऐसी डाइट अपनाना जरूरी है जिसे व्यक्ति लंबे समय तक जारी रख सके।
वजन बनाए रखने के लिए कैसी डाइट बेहतर है?
डाइट में पर्याप्त प्रोटीन, सब्जियां, फल, साबुत अनाज और कम प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ शामिल करने से पेट लंबे समय तक भरा महसूस हो सकता है और कैलोरी का सेवन कंट्रोल रखने में मदद मिल सकती है। दूसरी ओर, मीठे पेय, बार-बार स्नैकिंग और कैलोरी से भरपूर अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड वजन दोबारा बढ़ने में योगदान दे सकते हैं इसलिए इनसे परहेज करें।
वजन घटाने वाली दवाओं का क्या रोल है?
आज मोटापे के इलाज में सेमाग्लूटाइड (Semaglutide) और टिर्जेपाटाइड (Tirzepatide) जैसी दवाओं का भी इस्तेमाल किया जाता है। ये कुछ लोगों में ऐसा वजन घटाने में मदद कर सकती हैं जो केवल लाइफस्टाइल बदलावों से हासिल करना मुश्किल होता है। हालांकि, दवाएं मोटापे को पूरी तरह खत्म नहीं करतीं। कुछ लोगों को वजन बनाए रखने के लिए लंबे समय तक दवा की जरूरत पड़ सकती है, जबकि कुछ लोग डॉक्टर की निगरानी में इसे कम या बंद कर सकते हैं।
वजन घटाने के बाद सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
वजन कम करने के बाद असली चुनौती उसे लंबे समय तक बनाए रखना है। शरीर वजन वापस बढ़ाने की कोशिश कर सकता है, इसलिए केवल लक्ष्य वजन हासिल करना पर्याप्त नहीं है। नियमित एक्सरसाइज, संतुलित डाइट, पर्याप्त प्रोटीन, अच्छी नींद, मसल्स को बनाए रखना और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की निगरानी में दवाओं या अन्य उपचारों का इस्तेमाल वजन को लंबे समय तक कंट्रोल रखने में मदद कर सकता है।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के लिए है और उपलब्ध विशेषज्ञ जानकारी पर आधारित है। वजन घटाने के लिए बैरिएट्रिक सर्जरी, सेमाग्लूटाइड, टिर्जेपाटाइड या किसी अन्य दवा का इस्तेमाल हर व्यक्ति के लिए उपयुक्त नहीं होता। किसी भी दवा, डाइट या एक्सरसाइज रूटीन को शुरू या बंद करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
