क्या आपके साथ भी ऐसा होता है कि आप गहरी नींद में सो रहे हों और अचानक पेशाब आने की वजह से आपकी आंख खुल जाए? रात में एक या दो बार ऐसा होना सामान्य हो सकता है, लेकिन अगर यह सिलसिला बार-बार चल रहा है तो इसे नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। मेडिकल साइंस में इस स्थिति को ‘नोक्टूरिया’ (Nocturia) कहा जाता है। यह न सिर्फ आपकी नींद खराब करती है, बल्कि मानसिक और शारीरिक थकान की बड़ी वजह भी बनती है।
भारतीय योग गुरु, लेखक, शोधकर्ता और टीवी पर्सनालिटी डॉक्टर हंसा योगेंद्र (Hansa Yogendra) के मुताबिक रात में ज्यादा पेशाब आने की परेशानी को नोक्टूरिया कहा जाता है जो कई तरह की परेशानियों की वजह से होती है। योग एक्सपर्ट के मुताबिक लगभग 90 प्रतिशत मामलों में ये परेशानी लाइफस्टाइल और खानपान में बदलाव की वजह से होती है। एक्सपर्ट ने बताया इस परेशानी के लिए कुछ कारण जिम्मेदार हैं जिन्हें बदलकर रात में सुकून की नींद ली जा सकती है। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि रात में पेशाब आने के लिए कौन-कौन से कारण जिम्मेदार हैं जिन्हें बदलकर सुकून की नींद पाई जा सकती है।
गलत समय पर ज्यादा पानी पीना
कई लोग दिनभर कम पानी पीते हैं और रात में सोने से पहले अधिक मात्रा में पानी, चाय या दूसरे ड्रिंक का सेवन करते हैं। इससे किडनी रातभर एक्टिव रहती है और बार बार पेशाब आने की समस्या हो सकती है। बचाव के लिए एक्सपर्ट ने बताया पानी का अधिक सेवन सुबह से शाम तक करें और रात के भोजन के बाद तरल पदार्थों की मात्रा कम कर दें। इसके अलावा शाम के समय चाय, कॉफी, कोल्ड ड्रिंक या अधिक ग्रीन टी पीने से भी पेशाब बनने की प्रक्रिया बढ़ सकती है।
रात का भोजन भी हो सकता है जिम्मेदार
देर रात खाना खाने, अधिक नमक वाले फूड का सेवन करने,अचार, पापड़, चिप्स और तले हुए स्नैक्स का सेवन करने से शरीर में पानी जमा होने लगता है। जब व्यक्ति रात में लेटता है तो यह अतिरिक्त तरल पदार्थ किडनी तक पहुंचता है और पेशाब की मात्रा बढ़ जाती है। परेशानी से बचने के लिए रात के खाने में हल्की खिचड़ी, दाल, सब्जियों का सूप, स्टीम्ड सब्जियां और मोटे अनाज की रोटी जैसे विकल्प बेहतर माने जाते हैं। रात के खाने के बाद कुछ मिनट वज्रासन करने से भी पाचन में मदद मिल सकती है।
लंबे समय तक बैठे रहना
ऑफिस में लगातार बैठकर काम करना, लंबी ड्राइविंग या लंबे समय तक खड़े रहने से पैरों और टखनों में तरल पदार्थ जमा हो सकता है। रात में लेटने पर यह तरल पदार्थ दोबारा रक्त प्रवाह में शामिल होकर किडनी तक पहुंचते हैं, जिससे बार-बार पेशाब आने की समस्या बढ़ सकती है। विशेषज्ञ हर घंटे कुछ मिनट टहलने और शाम को दीवार के सहारे विपरीतकरणी मुद्रा (Legs Up The Wall Pose) करने की सलाह देते हैं। इससे रक्त संचार बेहतर होता है और शरीर में जमा अतिरिक्त तरल पदार्थ का संतुलन बनता है।
ब्लैडर और पेल्विक फ्लोर मसल्स का कमजोर होना
बढ़ती उम्र, मोटापा, प्रसव के बाद की स्थिति, लंबे समय तक बैठे रहना और शारीरिक गतिविधियों की कमी पेल्विक फ्लोर मसल्स को कमजोर कर सकती है। यही मांसपेशियां मूत्राशय को सहारा देती हैं। इन मांसपेशियों को मजबूत करने के लिए अश्विनी मुद्रा उपयोगी मानी जाती है। इसमें गुदा और पेल्विक क्षेत्र की मांसपेशियों को कुछ सेकंड के लिए सिकोड़कर फिर ढीला किया जाता है। नियमित अभ्यास से ब्लैडर कंट्रोल बेहतर हो सकता है।
डायबिटीज भी हो सकती है वजह
विशेषज्ञों के अनुसार हाई ब्लड शुगर का स्तर होने पर शरीर अतिरिक्त शुगर को पेशाब के जरिए बाहर निकालने की कोशिश करता है। इसके कारण पेशाब की मात्रा बढ़ जाती है, खासकर रात के समय। अगर आपको बार-बार पेशाब आने की समस्या है तो ब्लड शुगर की जांच करानी चाहिए। साथ ही मीठे पेय पदार्थ, मैदा और प्रोसेस्ड फूड्स का सेवन कम करना चाहिए। फाइबर युक्त भोजन और नियमित वॉक को अपनी डेली रूटीन का हिस्सा बनाएं।
कब डॉक्टर से मिलना जरूरी है?
अगर रात में बार-बार पेशाब आने के साथ पेशाब में जलन, बुखार, दर्द, पेशाब में खून, पेशाब करने में कठिनाई, तेज खर्राटे या अत्यधिक थकान जैसी समस्याएं भी हों तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। एक्सपर्ट ने बताया यह समस्या स्लीप एपनिया, यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (UTI), प्रोस्टेट बढ़ने, किडनी की बीमारी या अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से भी जुड़ी हो सकती है। ऐसे में चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है। एक्सपर्ट के मुताबिक शरीर के संकेतों को समझना और समय रहते लाइफस्टाइल में छोटे-छोटे बदलाव करना बेहतर नींद और बेहतर स्वास्थ्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी और सुझाव केवल सामान्य जागरूकता और शैक्षिक उद्देश्यों के लिए हैं। इसे किसी पेशेवर चिकित्सा सलाह, निदान या इलाज के विकल्प के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। हर व्यक्ति के शरीर की क्षमता और स्वास्थ्य स्थिति अलग होती है। नोक्टूरिया के कारणों को ठीक से समझने या कोई भी प्राकृतिक उपाय आजमाने से पहले किसी प्रमाणित डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श ज़रूर लें।
