कभी-कभार कब्ज होना एक ऐसी परेशानी है जिसके लिए डाइट में बदलाव, कुछ दवाओं का सेवन, पानी का कम सेवन जिम्मेदार हो सकता है। कभी-कभी होने वाली कब्ज को लोग आसानी से सह लेते हैं, लेकिन जब यह समस्या बार-बार होने लगे तो रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होने लगती है। लगातार कब्ज में मल त्याग करने में परेशानी होती है, लंबे समय तक टॉयलेट में बैठने के बावजूद पेट पूरी तरह साफ न होने का एहसास बना रह सकता है। इसकी वजह से व्यक्ति को असहजता, पेट फूलना और चिड़चिड़ापन जैसी परेशानियां भी हो सकती हैं। लंबे समय तक कब्ज की समस्या न सिर्फ बॉडी को परेशान करती है बल्कि यह मानसिक स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता को भी प्रभावित कर सकती है।  पेट की समस्याओं से राहत पाने के लिए अक्सर भारतीय घरों में मुनक्का खाने की सलाह दी जाती है। लेकिन क्या रोज मुनक्का खाने से कब्ज पूरी तरह ठीक हो सकता है और शरीर को सही पोषण पाने के लिए एक दिन में कितने मुनक्के खाने चाहिए?

MOC कैंसर केयर एंड रिसर्च सेंटर, नई दिल्ली में ऑन्कोलॉजी डाइटिशियन Dt. मांसी यादव ने जनसत्ता को बताया कब्ज से राहत पाने के लिए मुनक्का खाने का सही तरीका, इसकी सही खुराक और इसके नियमित सेवन के बारे में समझना जरूरी है। डायटीशियन ने बताया मुनक्का पोषक तत्वों से भरपूर ड्राई फ्रूट है। इसमें डाइटरी फाइबर, प्राकृतिक कार्बोहाइड्रेट, आयरन, पोटैशियम और पॉलीफेनॉल्स अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं। इसके अलावा इसमें कुछ मात्रा में कैल्शियम और मैग्नीशियम भी मौजूद होते हैं। एक्सपर्ट के मुताबिक मुनक्का को संतुलित मात्रा में डाइट में शामिल करने से शरीर को कई जरूरी पोषक तत्व मिल सकते हैं। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि मुनक्का का सेवन कैसे कब्ज का इलाज करता है।  

100 ग्राम मुनक्का में कितनी कैलोरी होती है?

डायटीशियन मानसी के मुताबिक 100 ग्राम मुनक्का में करीब 300 किलो कैलोरी ऊर्जा हो सकती है। इसमें लगभग 3 ग्राम प्रोटीन, 3 से 4 ग्राम फाइबर और करीब 1.5 से 2 मिलीग्राम आयरन मिलता है। हालांकि, मुनक्का को आमतौर पर इतनी बड़ी मात्रा में खाने की जरूरत नहीं होती, क्योंकि यह कैलोरी और प्राकृतिक शुगर से भरपूर ड्राई फ्रूट है। मुनक्का और किशमिश दोनों ही सूखे अंगूर से तैयार किए जाते हैं, लेकिन इनके आकार और प्रकार में अंतर होता है। किशमिश आमतौर पर छोटी होती है, जबकि मुनक्का अपेक्षाकृत बड़ा और गहरे रंग का सूखा अंगूर होता है। दोनों में पोषक तत्व पाए जाते हैं, लेकिन इन्हें पूरी तरह पोषण की दृष्टि से एक जैसा नहीं माना जा सकता।

रोज कितने मुनक्के खाने चाहिए?

डायटीशियन मानसी ने बताया एक हेल्दी इंसान और नॉन-डायबिटिक व्यक्ति रोज करीब 3 से 5 मुनक्के डाइट में शामिल कर सकता है। इन्हें स्नैक के तौर पर, सुबह या ब्रेकफास्ट में लिया जा सकता है। मुनक्का को रातभर पानी में भिगोकर सुबह खाना सेहत के लिए ज्यादा फायदेमंद होता है। हालांकि, किसी भी ड्राई फ्रूट की तरह मुनक्का खाते समय पोर्शन कंट्रोल करना जरूरी है।

मुनक्का भिगोकर खाना कितना फायदेमंद है?

डायटीशियन मानसी ने बताया मुनक्के को रातभर पानी में भिगोकर सुबह खाने का चलन जोरो पर है। एक्सपर्ट के मुताबिक भिगोने से इसमें मौजूद कुछ एंटी-न्यूट्रिशनल कंपाउंड का प्रभाव कम हो सकता है और पोषक तत्वों के उपयोग में मदद मिल सकती है।

कब्ज में कैसे मदद करता है मुनक्का?

डायटीशियन मानसी ने बताया मुनक्का कब्ज का इलाज करने में बेहद असरदार साबित होता है। मुनक्का में डाइटरी फाइबर पाया जाता है, जो मल की मात्रा और नियमित बाउल मूवमेंट को सपोर्ट कर सकता है। इसे डाइट में सीमित मात्रा में शामिल करने से कब्ज की समस्या में राहत पाने में मदद मिल सकती है। आप कब्ज को कंट्रोल करना चाहते हैं तो रोज मुनक्का खाने के साथ ही पर्याप्त पानी, फाइबर वाले फूड और बॉडी को एक्टिव रखें।

क्या मुनक्का ब्लोटिंग में फायदेमंद है?

डायटीशियन मानसी ने बताया फाइबर की वजह से मुनक्का आंतों की नियमित गतिविधि को सपोर्ट कर सकता है। कब्ज के कारण होने वाले पेट के भारीपन या ब्लोटिंग में बाउल मूवमेंट बेहतर होने से कुछ लोगों को फायदा मिल सकता है। हालांकि, ज्यादा मात्रा में मुनक्का खाने से उल्टा गैस या पेट फूलने की समस्या भी हो सकती है।

पेट की सिकाई के लिए मुनक्का कितना असरदार है?

मुनक्के को गर्म करके पोटली में बांधकर पेट की सिकाई करने की घरेलू परंपरा कुछ जगहों पर देखी जाती है। विशेषज्ञ ने इसे एक पारंपरिक उपाय या मिथक बताया और कहा कि मुनक्के को पेट पर लगाने या सिकाई करने के बजाय इसे संतुलित मात्रा में डाइट में शामिल करना ज्यादा उचित है।

डायबिटीज में मुनक्का खा सकते हैं?

डायबिटीज वाले लोगों को मुनक्का पूरी तरह छोड़ना जरूरी नहीं है, लेकिन मात्रा और सेवन की आवृत्ति महत्वपूर्ण है। विशेषज्ञ के अनुसार, ऐसे लोग कभी-कभी 2 से 4 मुनक्के ले सकते हैं, लेकिन रोज खाने के बजाय सप्ताह में कुछ बार लेना बेहतर हो सकता है। हालांकि, वास्तविक मात्रा व्यक्ति के ब्लड शुगर, दवाओं और पूरी डाइट पर निर्भर करती है।

एनीमिया में मुनक्का कितना फायदेमंद है?

मुनक्का में आयरन पाया जाता है, इसलिए इसे आयरन युक्त डाइट का हिस्सा बनाया जा सकता है। विशेषज्ञ ने एनीमिया वाले लोगों के लिए सीमित मात्रा में मुनक्का लेने की बात कही है। लेकिन सिर्फ मुनक्का खाने से एनीमिया का इलाज नहीं होता। आयरन की कमी की पुष्टि होने पर आप डॉक्टर की सलाह से उचित उपचार और आयरन के अन्य स्रोतों को डाइट में शामिल करें।

क्या मुनक्का मेटाबॉलिज्म को बेहतर करता है?

मुनक्का में मौजूद फाइबर गट हेल्थ और नियमित बाउल मूवमेंट को सपोर्ट करता है। स्वस्थ पाचन तंत्र ओवरऑल मेटाबॉलिक हेल्थ के लिए महत्वपूर्ण है। हालांकि, केवल मुनक्का खाने से मेटाबॉलिज्म तेज होने का दावा करना सही नहीं होगा। संतुलित डाइट, पर्याप्त नींद और नियमित शारीरिक गतिविधि भी महत्वपूर्ण हैं।

क्या मुनक्का वजन घटाने में मदद करता है?

मुनक्का में फाइबर होता है, जो पेट भरा हुआ महसूस कराने में मदद कर सकता है। इसलिए सीमित मात्रा में इसे हेल्दी स्नैक के रूप में लिया जा सकता है। लेकिन मुनक्का में कैलोरी और प्राकृतिक शुगर भी होती है, इसलिए ज्यादा मात्रा में सेवन वजन घटाने के बजाय अतिरिक्त कैलोरी बढ़ा सकता है। वजन कम करने के लिए पूरी डाइट और कैलोरी बैलेंस महत्वपूर्ण है।

क्या मुनक्का हार्ट हेल्थ के लिए अच्छा है?

मुनक्का में पोटैशियम और पॉलीफेनॉल्स जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। पॉलीफेनॉल्स एंटीऑक्सीडेंट गुणों वाले पौधों के यौगिक हैं, जबकि पोटैशियम शरीर के सामान्य मसल और नर्व फंक्शन में भूमिका निभाता है। संतुलित डाइट के हिस्से के रूप में मुनक्का हार्ट-हेल्दी डाइट में शामिल किया जा सकता है।

मुनक्का किन चीजों के साथ खा सकते हैं?

मुनक्का को दूसरे ड्राई फ्रूट्स के साथ लिया जा सकता है। इसे बादाम, अखरोट, ओट्स, दलिया, दूध या दही में मिलाकर भी खाया जा सकता है। इस तरह लेने से स्नैक में फाइबर, प्रोटीन और अन्य पोषक तत्वों का संतुलन बेहतर हो सकता है। डायबिटीज वाले लोगों के लिए खासतौर पर कुल कार्बोहाइड्रेट और पोर्शन पर ध्यान देना जरूरी है। मुनक्का को केवल पुरुषों के लिए ज्यादा ताकतवर या फायदेमंद बताना सही नहीं है।  मुनक्का पुरुष और महिला दोनों के लिए संतुलित मात्रा में डाइट का हिस्सा हो सकता है।

डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के उद्देश्य से है। लगातार या गंभीर कब्ज की समस्या होने पर खुद से दवा लेने के बजाय डॉक्टर से परामर्श लें।अगर कब्ज के साथ मल में खून, तेज पेट दर्द, लगातार उल्टी, बिना वजह वजन कम होना या लंबे समय तक मल त्याग न होना जैसी समस्या हो, तो तुरंत चिकित्सीय सलाह लें।