ताज़ा खबर
 

बीस की उम्र लेकिन खतरे में दिल

विश्व हृदय दिवस की पूर्व संध्या पर हृदय रोग विशेषज्ञों ने कहा कि वायु प्रदूषण हमारे हृदय और नाड़ी तंत्र को प्रतिकूल रूप से प्रभावित कर सकता है।

Author नोएडा | September 30, 2016 12:42 AM
फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हार्ट इंस्टिट्यूट में कार्यकारी निदेशक और डीन कार्डियोलॉजी, डॉक्टर उपेंद्र कौल

विश्व हृदय दिवस की पूर्व संध्या पर हृदय रोग विशेषज्ञों ने कहा कि वायु प्रदूषण हमारे हृदय और नाड़ी तंत्र को प्रतिकूल रूप से प्रभावित कर सकता है। इसके साथ ही इस बात पर चिंता जताई कि अब बीस साल के लोगों पर भी हृदयाघात का खतरा है। फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हार्ट इंस्टिट्यूट में कार्यकारी निदेशक और डीन कार्डियोलॉजी, डॉक्टर उपेंद्र कौल ने कहा कि चिकित्सकीय अध्ययनों से यह पता चला है कि वायु प्रदूषण की वजह से दिल का दौरा पड़ सकता है और हृदय संबंधी अन्य रोग हो सकते हैं। धुआं और धुंध में पाए जाने वाले बहुत छोटे कण इन रोगों का कारण बनते हैं।  29 सितंबर को विश्व हृदय दिवस है और उससे एक दिन पहले कौल ने कहा कि ये कण फेफड़ों के माध्यम से व्यक्ति के अंदर चले जाते हैं और सांस संबंधी कई बीमारियों का कारण बनते हैं।

उन्होंने बताया कि ये छोटे कण फेफड़ों के माध्यम से व्यक्ति के खून में प्रवेश कर जाते हैं और इसकी वजह से अत्यधिक क्लॉटिंग दिल और दिमाग की धमनियों को नुकसान पहुंचाता है। इससे दिल का दौरा पड़ने और मस्तिष्काघात होने का खतरा रहता है। मंगलवार को प्रकाशित डब्लूएचओ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिण पूर्व एशियाई क्षेत्र में वायु प्रदूषण प्रतिवर्ष करीब आठ लाख लोगों की जान ले रहा है।

कौल ने कहा कि जिन लोगों की उम्र 45 वर्ष से अधिक है या जिनके परिवार में हृदय रोग का इतिहास रहा हो और जो उच्च रक्तचाप, मधुमेह से पीड़ित, शारीरिक रूप से निष्क्रिय और धूम्रपान करने वाले हों, उन्हें वायु प्रदूषण की वजह से हृदय संबंधी बीमारियों का शिकार बनने का अधिक खतरा रहता है। वहीं कार्डियोलॉजी विशेषज्ञ डॉक्टर गुंजन कपूर ने कहा कि कुछ सालों में भारत में दिल का दौरा पड़ने की उम्र में काफी कमी आई है। अब 20 साल की उम्र में भी लोगों को दिल के दौरे पड़ने लगे हैं।

भारत में ह्रदयघात से ग्रसित सभी रोगियों में करीब 50 फीसद लोगों की उम्र 50 साल से कम और 25 फीसद लोगों की उम्र तो 40 साल से कम है। जिसकी मुख्य वजह आनुवांशिक के अलावा लिपोप्रोटीन (ए) के उच्च स्तर से ग्रस्त हैं। एलपी (ए) शहरों की प्रतिकूल जीवनशैली और लोगों के खान- पान में हुए बदलाव के चलते ह्रदय रोग की संभावना बढ़ाती है। उन्होंने बताया कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं में ह्रदय रोग होने की ज्यादा आशंका है।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App