Monsoon Health Care: मानसून की बारिश जहां भीषण गर्मी से राहत दिलाती है, वहीं अपने साथ बीमारियों का खतरा भी लेकर आती है। इस मौसम में हवा में नमी और नमी के कारण हमारे पाचन तंत्र (Digestive System) की कार्यप्रणाली अक्सर धीमी या सुस्त पड़ जाती है। खराब खानपान, अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड, फाइबर की कमी, तनाव, नींद की कमी और बार-बार एंटीबायोटिक दवाओं का इस्तेमाल करने से आंतों के माइक्रोबायोम (Gut Microbiome) का संतुलन बिगड़ सकता है। इस स्थिति को डिस्बायोसिस (Dysbiosis) कहा जाता है, जिसमें गुड बैक्टीरिया कम हो जाते हैं और हानिकारक बैक्टीरिया बढ़ने लगते हैं।
Atiya Herbs की डाइट और हेल्थ एक्सपर्ट Aleena Khan बताती हैं कि आज वैज्ञानिक शोध यह भी बताते हैं कि आंत और मस्तिष्क के बीच गट-ब्रेन एक्सिस (Gut-Brain Axis) के जरिए लगातार संवाद होता रहता है। आंतों में मौजूद बैक्टीरिया सेरोटोनिन (Serotonin) और शॉर्ट-चेन फैटी एसिड्स (Short-Chain Fatty Acids) जैसे कई महत्वपूर्ण यौगिकों के निर्माण में भूमिका निभाते हैं, जो मूड, तनाव, नींद और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं। आयुर्वेद विशेषज्ञों के अनुसार बरसात के दिनों में दूषित पानी और बैक्टीरिया के तेजी से पनपने के कारण आंतों में गंदे बैक्टीरिया का संतुलन बढ़ सकता है, जिससे पेट में गैस, ब्लोटिंग, अपच और इंफेक्शन जैसी समस्याएं होने लगती हैं।
हेल्दी आंतें न केवल बेहतर पाचन बल्कि मजबूत इम्यूनिटी, बेहतर एनर्जी के स्तर और मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी जरूरी मानी जाती हैं। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि कौन-कौन से ऐसे फूड्स है जिनका सेवन बरसात में करने से आंतों में गुड बैक्टीरिया बढ़ते हैं।
दही खाएं, बढ़ेंगे गुड बैक्टीरिया
दही में मौजूद प्रोबायोटिक्स आंतों के अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ाने में मदद करते हैं, जिससे पाचन बेहतर रहता है। इसका नियमित और सीमित मात्रा में सेवन कब्ज, गैस और अपच जैसी समस्याओं का जोखिम कम कर सकता है। ताजा दही इम्यूनिटी और आंतों की सेहत के लिए भी फायदेमंद मानी जाती है। जर्नल ऑफ एप्लाइड माइक्रोबायोलॉजी और जर्नल ऑफ न्यूट्रिशन के अध्ययनों में साबित हुआ है कि दही प्राकृतिक प्रोबायोटिक्स का सबसे बड़ा स्रोत है। दही में लैक्टोबैसिलस और बिफिदोबैक्टीरियम (Bifidobacterium) नाम के जीवित लाइव कल्चर पाए जाते हैं। रिसर्च बताती है कि ये गुड बैक्टीरिया आंतों के pH लेवल को संतुलित करते हैं, जिससे नुकसानदायक बैक्टीरिया खत्म होते हैं और कब्ज व ब्लोटिंग से राहत मिलती है।
छाछ पिएं, पाचन रहेगा दुरुस्त
छाछ हल्का, आसानी से पचने वाला और पेट को ठंडक देने वाला पेय है। इसमें मौजूद प्रोबायोटिक्स पाचन क्रिया को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। मसालेदार भोजन के बाद छाछ पीने से गैस, एसिडिटी और भारीपन में राहत मिल सकती है। भुना जीरा या पुदीना मिलाने से इसके फायदे बढ़ सकते हैं। इंटरनेशनल जर्नल ऑफ फूड साइंस एंड न्यूट्रिशन के अनुसार, छाछ पाचन तंत्र के लिए बहुत हल्की और सुपाच्य होती है। छाछ में दही की तुलना में फैट कम और लैक्टिक एसिड अधिक होता है। रिसर्च के अनुसार, जब इसमें भुना जीरा मिलाया जाता है, तो यह पेट में गैस्ट्रिक जूस के स्राव को संतुलित करता है और भारी भोजन के बाद होने वाली एसिडिटी व हेवीनेस को तुरंत कम करता है।
केला खाएं, पाचन होगा आसान
केला फाइबर और जरूरी पोषक तत्वों से भरपूर होता है, जो आंतों की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। यह आसानी से पच जाता है और कब्ज की समस्या कम करने में सहायक हो सकता है। दस्त या कमजोरी के दौरान भी केला ऊर्जा और आवश्यक मिनरल्स का अच्छा स्रोत माना जाता है। अमेरिकन जर्नल ऑफ क्लिनिकल न्यूट्रिशन (AJCN) और वर्ल्ड जर्नल ऑफ गैस्ट्रोएंटरोलॉजी (WJG) की रिसर्च बताती है कि केला गट हेल्थ के लिए सबसे सुरक्षित और असरदार फल है। केले में मौजूद पेक्टिन (Pectin) नाम का सॉल्युबल फाइबर और फ्रुक्टोऑलिगोसैकेराइड्स (FOS) पाए जाते हैं। FOS आंतों के लिए एक बेहतरीन प्रीबायोटिक (Prebiotic) का काम करता है, जो गुड बैक्टीरिया का भोजन बनता है। इसके अलावा, केले में मौजूद पोटैशियम दस्त के दौरान शरीर से निकले इलेक्ट्रोलाइट्स की भरपाई करता है।
मेथी खाएं, गैस और सूजन होगी कम
मेथी में फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने में मदद कर सकते हैं। भिगोई हुई मेथी या उसके पानी का सेवन कुछ लोगों में गैस, पेट फूलने और अपच की समस्या कम करने में सहायक हो सकता है। हालांकि, इसका सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए। जर्नल ऑफ फूड साइंस एंड टेक्नोलॉजी (JFST) और बायोमेडिसिन एंड फार्माकोथेरेपी की रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार मेथी के दानों में बहुत ज्यादा मात्रा में म्यूसिलेज और सॉल्युबल फाइबर होता है। जब मेथी के बीजों को पानी में भिगोया जाता है, तो इसका म्यूसिलेज फूलकर पेट और आंतों की अंदरूनी परत पर एक सुरक्षात्मक कोटिंग बनाता है। यह कोटिंग एसिड रिफ्लक्स , पेट की जलन और सूजन को शांत करने में मदद करती है।
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य जानकारी और एक्सपर्ट की राय पर आधारित है। हर व्यक्ति का शरीर और उसकी पाचन क्षमता अलग होती है। यदि आप पेट की किसी गंभीर बीमारी जैसे IBS, अल्सर या क्रोनिक एसिडिटी, एलर्जी या किसी विशेष मेडिकल कंडीशन से गुजर रहे हैं, तो इन खाद्य पदार्थों को अपनी डाइट में शामिल करने से पहले किसी प्रमाणित डॉक्टर या गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट की सलाह जरूर लें।
