बरसात का मौसम अपने साथ कई तरह की बीमारियां भी लेकर आता है। इस मौसम में बढ़ी हुई नमी यानी ज्यादा मॉइश्चर ही बैक्टीरिया, वायरस और फंगस के पनपने के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करता है, जिससे संक्रमण और कई बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इस मौसम में दूषित पानी या उसमें मौजूद बैक्टीरिया, वायरस और फंगस नाक, कान या आंखों के संपर्क में आने पर शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। इससे ईएनटी (ENT) से जुड़ी समस्याएं, जैसे कान का संक्रमण, साइनस संक्रमण और गले की तकलीफ होने का खतरा बढ़ जाता है। बरसात के इस मौसम में अक्सर लोग कान को खुजलाते हुए या कान को सहलाते हुए दिखते हैं। कई बार तो लोग कान की खुजली से परेशान होकर कान में कॉटन बड्स तक तेज-तेज चला लेते है। आप जानते हैं कि कान में कॉटन बड्स डालना और हर वक्त कान में ईयरबड्स लगाना हर मौसम में खराब आदत हैं, खासकर बरसात के दिनों में ये आदत आपकी परेशानी को बढ़ा सकती है।

मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज, नई दिल्ली में निदेशक प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, ईएनटी (कान, नाक और गला) हेड एंड नेक सर्जरी विभाग में डॉ. रवि मेहर ने बताया बरसात के मौसम में कानों में ईयरबड्स या ईयरफोन लगाकर संगीत सुनना आपकी सुनने की क्षमता और कान की सेहत को खतरे में डाल सकता है। इस मौसम में कान में कॉटन बड्स का इस्तेमाल आपके कान में संक्रमण का खतरा बढ़ा सकता है। मानसून के दौरान हवा में मौजूद नमी और ईयरबड्स के लंबे इस्तेमाल से कान के अंदर फंगल या बैक्टीरियल इन्फेक्शन फैलने का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।  डॉ. रवि मेहर ने बताया बारिश के दिनों में कानों की देखभाल न करना बेहद नुकसानदायक साबित हो सकता है। आइए डॉक्टर से जानते हैं कि मानसून में कॉटन बड्स का इस्तेमाल क्यों खतरनाक है, इस मौसम में कान में संक्रमण क्यों होता है और इसके शुरुआती लक्षण क्या हैं और कानों को सुरक्षित रखने के लिए किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है।  
बरसात में कान का संक्रमण क्यों बढ़ जाता है?

डॉक्टर रवि के मुताबिक बरसात के मौसम में वातावरण में नमी (Humidity) काफी बढ़ जाती है। अगर कान के अंदर मॉइश्चर चला जाए तो फंगस पनपने की संभावना बढ़ जाती है। यही वजह है कि इस मौसम में कान में फंगल इंफेक्शन के मामले अधिक देखने को मिलते हैं। फंगल संक्रमण के कारण कान में दर्द, खुजली और डिस्चार्ज जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

क्या बारिश का पानी संक्रमण का कारण बन सकता है?

डॉक्टर रवि ने बताया हां बारिश का पानी संक्रमण का कारण बन सकता है। अगर बारिश का पानी या किसी भी वजह से कान के अंदर पानी चला जाता है तो संक्रमण होने का खतरा बढ़ सकता है। नमी फंगस के बढ़ने के लिए अनुकूल माहौल तैयार करती है, जिससे कान में इंफेक्शन हो सकता है। बरसात के दौरान सबसे ज्यादा फंगल इंफेक्शन (Fungal Ear Infection) देखने को मिलता है। यह संक्रमण मुख्य रूप से कान के अंदर नमी बढ़ने के कारण होता है।

फंगल इंफेक्शन के लक्षण क्या हैं?

फंगल संक्रमण होने पर मरीज को कान में लगातार खुजली हो सकती है। इसके अलावा कान में दर्द, सुनाई कम देना, कान बंद या भरा हुआ महसूस होना और कई मामलों में कान से पानी, मवाद या डिस्चार्ज निकलना भी इसके प्रमुख लक्षण हैं।

फंगल इंफेक्शन का इलाज कैसे किया जाता है?

डॉक्टर रवि बताते हैं कि केवल दवा लेने से इलाज पूरा नहीं होता। इस संक्रमण से बचाव करने के लिए ईएनटी स्पेशलिस्ट कान के अंदर मौजूद फंगस को साफ करते हैं। जरूरत पड़ने पर सक्शन मशीन से फंगस और जमा मलबा निकालते हैं। इसके बाद दवाएं दी जाती हैं, जिससे संक्रमण पूरी तरह ठीक हो सके।

क्या वैक्स भी कान दर्द का कारण बन सकता है?

डॉक्टर रवि ने बताया अगर कान में पहले से वैक्स जमा है और उसमें पानी चला जाए तो वैक्स फूल सकता है। इससे कान में दर्द, कान बंद महसूस होना और सुनने में परेशानी हो सकती है। ऐसे में ईएनटी डॉक्टर से वैक्स निकलवाना जरूरी होता है। वैक्स से मतलब कान के मेल से हैं, अगर आप कान में संक्रमण होने  पर या मेल होने पर कॉटन बर्ड चलाते हैं तो कान का मेल कान के अंदर जा सकता है और कान में कई तरह की परेशानियां पैदा कर सकता है।

क्या कान का संक्रमण सुनने की क्षमता को प्रभावित करता है? 

अगर कान के अंदर संक्रमण या सूजन हो जाए या वैक्स की वजह से कान बंद हो जाए तो कुछ समय के लिए सुनने में दिक्कत हो सकती है। इलाज के बाद आमतौर पर यह समस्या ठीक हो जाती है।

किन लोगों को ज्यादा खतरा रहता है?

डॉक्टर रवि ने बताया जो लोग बारिश में ज्यादा बाहर रहते हैं या जिनके कान में बार-बार नमी जाती है, उनमें संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। इसके अलावा जिन लोगों की डायबिटीज कंट्रोल नहीं रहती या जिनकी इम्यूनिटी कमजोर होती है, उनमें गंभीर कान संक्रमण का जोखिम अधिक होता है। डॉक्टर ने बताया कि हर कान दर्द का कारण कान का संक्रमण नहीं होता। कई बार साइनस या गले की समस्या की वजह से भी कान में दर्द, भारीपन या असहजता महसूस हो सकती है। इसलिए लगातार परेशानी होने पर ईएनटी विशेषज्ञ से जांच कराना जरूरी है।

डायबिटीज मरीजों में संक्रमण क्यों हो सकता है गंभीर?

अनियंत्रित डायबिटीज वाले मरीजों की इम्यूनिटी कम हो जाती है। ऐसे मरीजों में कान का संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है। इसमें कान में तेज दर्द, डिस्चार्ज, कभी-कभी खून मिला हुआ डिस्चार्ज और कान की हड्डी तक संक्रमण फैलने का खतरा रहता है। इस स्थिति को मैलिग्नेंट ओटाइटिस एक्सटर्ना (Malignant Otitis Externa) कहा जाता है। गंभीर मामलों में मरीज को अस्पताल में भर्ती कर एंटीबायोटिक उपचार देना पड़ सकता है।

क्या इससे चेहरे की नस भी प्रभावित हो सकती है?

गंभीर कान के संक्रमण में चेहरे की नस (Facial Nerve) प्रभावित हो सकती है, जिससे चेहरे का एक हिस्सा टेढ़ा दिखाई देने लगता है। इसे फेशियल नर्व पैरालिसिस कहा जाता है। हालांकि यह सामान्य संक्रमण में नहीं बल्कि गंभीर और उपेक्षित मामलों में देखा जाता है।

बारिश के बाद कान की देखभाल कैसे करें?

अगर कान में दर्द, ब्लॉकेज, डिस्चार्ज या लगातार खुजली हो रही है तो खुद इलाज करने के बजाय ईएनटी विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए। अगर कान में फंगस, वैक्स या कोई मलबा जमा है तो पहले उसकी सफाई जरूरी होती है। केवल दवा लेने से समस्या पूरी तरह ठीक नहीं होती।

कान को सूखा रखने का सही तरीका क्या है?

डॉक्टर बताते हैं कि सामान्य परिस्थितियों में कान की बनावट ऐसी होती है कि नहाने के दौरान पानी आसानी से कान के अंदर नहीं जाता। अगर हल्की नमी चली भी जाए तो कान में कुछ भी डालने की जरूरत नहीं है। कान को नेचुरल तरीके से सूखने देना सबसे सुरक्षित तरीका है। बाहर से कॉटन का इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन कॉटन बड्स या कोई भी चीज कान के अंदर नहीं डालनी चाहिए।

कान दर्द होने पर तुरंत क्या करें?

अगर कान में तेज दर्द हो तो डॉक्टर की सलाह मिलने तक जरूरत पड़ने पर दर्द कम करने की दवा (पेनकिलर) ली जा सकती है। लेकिन बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक शुरू नहीं करनी चाहिए। सही इलाज के लिए ईएनटी विशेषज्ञ से जांच कराना जरूरी है।

क्या सरसों का तेल या लहसुन का तेल कान में डालना चाहिए?

डॉक्टर रवि ने बताया कान में सरसों का तेल या लहसुन के तेल जैसे नुस्खे बिल्कुल नहीं अपनाने चाहिए। डॉक्टर के मुताबिक, सरसों का तेल, लहसुन का तेल या अन्य घरेलू नुस्खे कान में डालने से संक्रमण बढ़ सकता है और नुकसान होने का खतरा रहता है। इसलिए ऐसे घरेलू उपायों से बचना चाहिए।

डॉक्टर की सलाह

डॉक्टर रवि के अनुसार, ईयर बड्स कान साफ करने का सही तरीका नहीं हैं। इससे वैक्स और मलबा कान के अंदर और गहराई तक चला जाता है। इसके अलावा ईयर बड्स कान की नाजुक त्वचा को नुकसान पहुंचा सकते हैं, जिससे संक्रमण का खतरा और बढ़ जाता है।

डिस्क्लेमर: यह लेख ईएनटी विशेषज्ञ से हुई बातचीत और सामान्य स्वास्थ्य जानकारी पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल जागरूकता बढ़ाना है। यदि आपको कान में तेज दर्द, लगातार खुजली, कान से पानी या मवाद आना, सुनने में कमी या कोई अन्य गंभीर लक्षण दिखाई दें, तो स्वयं दवा लेने या घरेलू नुस्खे अपनाने के बजाय तुरंत ईएनटी विशेषज्ञ से सलाह लें। किसी भी उपचार या दवा का उपयोग डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही करें।