बरसात का मौसम भले ही सुहाना लगता है, लेकिन सेहत के लिहाज से यह कई तरह की परेशानियां भी साथ लाता है। इस दौरान बढ़ी हुई नमी और तेजी से पनपने वाले बैक्टीरिया संक्रमण का खतरा बढ़ा देते हैं। खासकर महिलाओं में इस मौसम में यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI) यानी ब्लैडर इंफेक्शन का जोखिम अधिक हो सकता है। अगर मानसून के दौरान आपको बार-बार पेशाब लग रही है और हर 10–15 मिनट में बाथरूम जाना पड़ रहा है, तो इसे सामान्य समझकर नजरअंदाज न करें। यह ब्लैडर इंफेक्शन (Bladder Infection) या यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI) का संकेत हो सकता है। समय पर इसके लक्षणों की पहचान और सही इलाज संक्रमण को गंभीर होने से रोकने में मदद कर सकता है।

VNA Hospital मालवीय नगर, नई दिल्ली में यूरोलॉजी एंड एंड्रोलॉजी विभाग के निदेशक डॉ. विनीत मल्होत्रा ने बताया बरसात में ब्लैडर इंफेक्शन की समस्या को अनदेखा करना सेहत पर भारी पड़ सकता है। बरसात का मौसम कई तरह के संक्रमण का कारण बनता है जिनमें से एक है ब्लैडर इंफेक्शन। इस इंफेक्शन को UTI भी कह सकते हैं। डॉक्टर विनीत ने बताया मानसून में कुछ आदतें और मौसम से जुड़े बदलाव इस संक्रमण के जोखिम को बढ़ा सकते हैं। आइए जानते हैं कि बरसात में ब्लैडर इंफेक्शन क्यों होता है इसके कारण, लक्षण और बचाव कैसे करें।

ब्लैडर इन्फेक्शन क्या होता है?

ब्लैडर इंफेक्शन यानी मूत्राशय में होने वाला संक्रमण, यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI) का एक सामान्य रूप है। यह बैक्टीरिया या कुछ मामलों में फंगस के कारण हो सकता है। महिलाओं में यह समस्या पुरुषों की तुलना में अधिक देखी जाती है, क्योंकि उनकी यूरिनरी ट्रैक्ट अपेक्षाकृत छोटी होती है, जिससे संक्रमण पैदा करने वाले जीवाणु आसानी से ब्लैडर तक पहुंच सकते हैं।

बरसात में ब्लैडर इंफेक्शन का खतरा क्यों बढ़ जाता है?

डॉक्टर विनीत के मुताबिक मानसून में कई ऐसे कारण होते हैं जो संक्रमण का जोखिम बढ़ा सकते हैं जैसे

कम पानी पीना

बारिश के मौसम में तापमान कम होने के कारण लोगों को प्यास कम लगती है और वे सामान्य दिनों की तुलना में कम पानी पीते हैं। इससे यूरिन कम बनता है और बैक्टीरिया लंबे समय तक मूत्राशय में रह सकते हैं, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।

लंबे समय तक गीले कपड़े पहनना

बारिश में भीगने के बाद अगर लंबे समय तक गीले कपड़े या अंडरगारमेंट्स पहने रहें तो नमी के कारण बैक्टीरिया और फंगस तेजी से पनप सकते हैं। इससे यूरिनरी और फंगल दोनों तरह के संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।

पेशाब रोककर रखना

बरसात में यात्रा के दौरान या साफ शौचालय न मिलने पर कई लोग देर तक पेशाब रोककर रखते हैं। यह आदत ब्लैडर में बैक्टीरिया को बढ़ने का मौका देती है और संक्रमण की संभावना बढ़ सकती है।

साफ-सफाई में कमी

मानसून के दौरान नमी, गंदगी और दूषित वातावरण के कारण व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। अगर हाइजीन का ध्यान न रखा जाए तो संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।

दूसरे संक्रमण भी बन सकते हैं वजह

बरसात में पेट का संक्रमण या श्वसन संक्रमण (Respiratory Infection) होने पर शरीर की इम्यूनिटी प्रभावित हो सकती है। ऐसे में कुछ लोगों में यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन का जोखिम भी बढ़ सकता है।

किन लोगों को ज्यादा रहता है खतरा?

हालांकि ब्लैडर इंफेक्शन किसी भी उम्र में हो सकता है, लेकिन कुछ लोगों में इसका जोखिम अधिक होता है।

  • महिलाएं
  • बुजुर्ग
  • डायबिटीज के मरीज
  • कमजोर इम्यूनिटी वाले लोग
  • बार-बार UTI होने का इतिहास रखने वाले मरीज

डायबिटीज मरीजों को क्यों रहना चाहिए ज्यादा सतर्क?

डॉक्टर के अनुसार डायबिटीज शरीर की इम्यूनिटी को कमजोर कर सकती है और संक्रमण का खतरा बढ़ा सकती है। इसके अलावा डायबिटीज के मरीजों में पेशाब की फ्रीक्वेंसी पहले से अधिक हो सकती है, इसलिए मानसून में उन्हें संक्रमण के लक्षणों पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

ब्लैडर इंफेक्शन के शुरुआती लक्षण

यदि ये लक्षण दिखाई दें तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

  • बार-बार पेशाब आना
  • अचानक तेज पेशाब लगना और रोक न पाना
  • पेशाब करते समय जलन या दर्द
  • बार-बार थोड़ी-थोड़ी मात्रा में पेशाब आना
  • ब्लैडर के आसपास दर्द
  • बुखार या ठंड लगना
  • कमर या किडनी वाले हिस्से में दर्द (संक्रमण बढ़ने पर)
  • गंभीर संक्रमण में पेशाब में खून आना

कितनी बार पेशाब आना सामान्य है?

आमतौर पर स्वस्थ व्यक्ति में 2 से 3 घंटे के अंतराल पर पेशाब आना सामान्य माना जाता है। यदि हर आधे घंटे, 15 मिनट या 5–10 मिनट में बार-बार पेशाब की जरूरत महसूस होने लगे, तो यह ब्लैडर इंफेक्शन या अन्य यूरिनरी समस्या का संकेत हो सकता है।

ब्लैडर इंफेक्शन की जांच कैसे होती है?

ब्लैडर इंफेक्शन के जांच की पुष्टि के लिए डॉक्टर आमतौर पर ये जांच लिखते हैं।

  • यूरिन रूटीन एग्जामिनेशन
  • यूरिन कल्चर टेस्ट
  • इन जांचों से यह पता लगाया जा सकता है कि संक्रमण बैक्टीरिया की वजह से है या फंगस की वजह से।

क्या ब्लैडर इंफेक्शन में हर मरीज को एंटीबायोटिक की जरूरत होती है?

डॉक्टर के अनुसार अगर संक्रमण शुरुआती और हल्का है तो पर्याप्त पानी पीने, पेशाब न रोकने और साफ-सफाई रखने से कई मामलों में सुधार हो सकता है। लेकिन यदि संक्रमण गंभीर हो जाए, तेज बुखार, ज्यादा दर्द या जांच में बैक्टीरिया की पुष्टि हो, तब डॉक्टर एंटीबायोटिक दे सकते हैं। यदि संक्रमण फंगस के कारण है तो एंटीबायोटिक असर नहीं करेगी। ऐसे मामलों में एंटीफंगल दवा की जरूरत पड़ती है।

बरसात में ब्लैडर इंफेक्शन से कैसे बचें?

  • दिन भर में लगभग 2.5 से 3 लीटर पानी पिएं , अगर डॉक्टर ने किसी बीमारी के कारण पानी सीमित करने को न कहा हो तो।
  • लंबे समय तक पेशाब न रोकें।
  • बारिश में भीगने के बाद तुरंत सूखे कपड़े पहनें।
  • गीले अंडरगारमेंट्स तुरंत बदलें।
  • सिंथेटिक की बजाय कॉटन अंडरगारमेंट्स पहनें।
  • निजी स्वच्छता का पूरा ध्यान रखें।
  • बाहर का अस्वच्छ भोजन खाने से बचें।
  • बहुत ज्यादा मसालेदार भोजन, कोल्ड ड्रिंक और जरूरत से ज्यादा रेड मीट का सेवन सीमित करें।

कब तुरंत डॉक्टर से मिलें?

यदि बार-बार पेशाब आने के साथ तेज जलन, बुखार, ठंड लगना, पेशाब में खून आना या कमर के निचले हिस्से में दर्द हो, तो बिना देरी किए यूरोलॉजिस्ट से संपर्क करना चाहिए। समय पर इलाज न मिलने पर संक्रमण किडनी तक भी पहुंच सकता है।

डिस्क्लेमर: यह लेख विशेषज्ञ से हुई बातचीत पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल सामान्य स्वास्थ्य जानकारी देना है। यदि आपको पेशाब में जलन, बार-बार पेशाब आना, बुखार, खून आना या अन्य गंभीर लक्षण महसूस हों, तो खुद से दवा लेने के बजाय डॉक्टर से सलाह लें।