Medication and Blood Sugar: डायबिटीज को कंट्रोल करने के लिए लाइफस्टाइल और डाइट में बदलाव करना जरूरी है। साथ ही, तनाव को कंट्रोल करना और डॉक्टर की सलाह के अनुसार ब्लड शुगर को मैनेज करने वाली दवाओं का सेवन करना भी जरूरी है। अक्सर देखा जाता है कि डायबिटीज की जिस दवा से एक व्यक्ति का ब्लड शुगर कंट्रोल में रहता है, उसी दवा का सेवन करने पर दूसरे व्यक्ति के ब्लड शुगर पर वैसा असर नहीं होता। अब सवाल यह उठता है कि एक ही दवा किसी एक व्यक्ति पर असर करती है, जबकि उसी दवा का दूसरे व्यक्ति पर असर अलग क्यों होता है? इन अंतर को समझना इसलिए जरूरी है क्योंकि किसी दवा को शुरू करने के बाद ब्लड शुगर में बदलाव होने का मतलब यह जरूरी नहीं है कि उस दवा का असर हर व्यक्ति पर इसी तरह होगा।
कंसल्टेंट डायटीशियन और सर्टिफाइड डायबिटीज एजुकेटर कनिका मल्होत्रा ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया,हर व्यक्ति का शरीर दवाओं को थोड़े अलग तरीके से प्रोसेस करता है और इसका असर ब्लड शुगर पर भी पड़ सकता है। कुछ लोगों में लिवर के एंजाइम को कंट्रोल करने वाले जीन के कारण दवाएं शरीर में तेजी से टूटती हैं, जबकि कुछ लोगों में धीरे-धीरे। ऐसे में एक ही गोली का असर एक व्यक्ति के शरीर में दूसरे व्यक्ति की तुलना में ज्यादा समय तक रह सकता है।
शरीर में मौजूद फैट भी इसमें भूमिका निभाता है। जिन लोगों के पेट के आसपास ज्यादा फैट होता है, उनमें इंसुलिन रेजिस्टेंस की समस्या अधिक हो सकती है। इसलिए अगर कोई दवा ब्लड शुगर को थोड़ा बढ़ाती है, तो उसका असर दुबले व्यक्ति की तुलना में ऐसे व्यक्ति में ज्यादा हो सकता है। पैंक्रियाज कितनी मात्रा में इंसुलिन बना रहा है, यह भी मायने रखता है। कुछ लोगों में बिना डायबिटीज का पता चले भी इंसुलिन बनाने की क्षमता कम हो सकती है। ऐसे में किसी दवा से शरीर पर अतिरिक्त दबाव पड़ने पर ब्लड शुगर में ज्यादा उतार-चढ़ाव हो सकता है।
एक ही दवा अलग-अलग लोगों पर अलग असर क्यों करती है?
डायबिटीज की एक ही दवा दो अलग-अलग मरीजों पर बिल्कुल अलग असर दिखाती है जिसके लिए हर शरीर का मेटाबॉलिज्म, जेनेटिक्स कारण उम्र और लाइफस्टाइल जिम्मेदार हो सकता है। डॉक्टर कनिका ने बताया किसी दवा के प्रति शरीर की प्रतिक्रिया कई कारकों पर निर्भर कर सकती है जिसमें आनुवंशिक, उम्र, शरीर की संरचना, किडनी और लिवर की कार्यक्षमता, खान-पान और दूसरी दवाएं शामिल हैं।
दवा किस समय ली जाती है और उसे भोजन के साथ लिया जाता है या नहीं, इसका भी असर पड़ सकता है। किसी दवा को शुरू करने के बाद ब्लड शुगर में बदलाव होने का मतलब यह जरूरी नहीं है कि उस दवा का असर हर व्यक्ति पर इसी तरह होगा। डॉक्टर ने बताया आंतों में मौजूद बैक्टीरिया भी इस बात को प्रभावित कर सकते हैं कि कोई दवा शरीर में किस तरह अवशोषित होती है। दवा लेने का समय भी मायने रखता है। सुबह और शाम शरीर ब्लड शुगर को अलग-अलग तरीके से कंट्रोल करता है। इसलिए एक ही खुराक का असर इस बात पर निर्भर कर सकता है कि दवा किस समय ली गई है।
कौन-सी दवाएं ब्लड ग्लूकोज को बदल सकती हैं?
डॉक्टर ने बताया कुछ स्टेरॉयड, कुछ वॉटर पिल्स यानी मूत्रवर्धक दवाएं, कुछ एंटीसाइकोटिक दवाएं और बीटा ब्लॉकर्स ब्लड शुगर बढ़ा सकते हैं। वहीं इंसुलिन, सल्फोनिलयूरिया जैसी डायबिटीज की दवाएं और कुछ एंटीबायोटिक्स ब्लड शुगर को कम कर सकती हैं। ब्लड शुगर को नॉर्मल रखने में किडनी और लिवर की कार्यक्षमता भी काफी महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि ये अंग शरीर से दवाओं को बाहर निकालने में मदद करते हैं। अगर उनकी कार्यक्षमता धीमी हो जाती है, तो दवा शरीर में ज्यादा समय तक रह सकती है और ब्लड शुगर पर उसका प्रभाव अधिक पड़ सकता है। जेनेटिक कारणों से यह भी प्रभावित हो सकता है कि किसी दवा की कितनी मात्रा शरीर की कोशिकाओं तक पहुंचती है, न कि केवल खून में दवा की मात्रा कितनी है।
मल्होत्रा के अनुसार, आप क्या खाते हैं, इसका भी ब्लड शुगर पर असर पड़ सकता है। अधिक फैट वाला भारी खाना पाचन की प्रक्रिया को धीमा कर सकता है और इससे डायबिटीज की दवा कितनी तेजी से काम करती है, उसमें बदलाव आ सकता है। एक साथ कई दवाएं लेना भी जोखिम बढ़ा सकता है, क्योंकि एक दवा दूसरी दवा के कारण होने वाले लो ब्लड शुगर के वार्निंग साइन को छिपा सकती है। दवा लेने का समय, भोजन और शरीर की प्राकृतिक जैविक लय के साथ उसका संबंध भी यह तय कर सकता है कि उस दवा का ब्लड शुगर पर कितना असर पड़ेगा।
डिस्क्लेमर: डायबिटीज के मरीजों को अपनी दवा या खुराक में बदलाव केवल अपने डॉक्टर की सलाह पर ही करना चाहिए। यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी या विशेषज्ञों से बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है।
