ब्रिटेन के कार्डिफ़ की रहने वाली 42 वर्षीय लोरी डेनमैन (Lowri Denman) 2010 में भारत की यात्रा के लिए आई थी, उनकी ये यात्रा जिंदगी का सबसे मुश्किल अनुभव बन गई। लोरी उस समय डर गईं, जब रेस्टोरेंट के टॉयलेट का इस्तेमाल करते समय उनके शरीर से करीब 1 मीटर लंबा टेपवर्म (Tapeworm) बाहर निकला। शुरुआती मेडिकल जांच में कोई गंभीर समस्या सामने नहीं आई। लेकिन करीब एक साल बाद उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई और उन्हें पहली बार दौरा (Seizure) पड़ा। आगे की जांच में पता चला कि महिला को न्यूरोसिस्टिसरकोसिस (Neurocysticercosis) नाम की बीमारी है, जो दिमाग में परजीवी संक्रमण के कारण होती है। BBC की रिपोर्ट के अनुसार डॉक्टरों ने उनके मस्तिष्क में 38 परजीवी सिस्ट (Parasite Cysts) पाए।

आपको बता दें कि न्यूरोसिस्टिसरकोसिस आज भी दुनिया के कई देशों में वयस्कों में होने वाली मिर्गी (Epilepsy) के प्रमुख कारणों में से एक माना जाता है। इस बीमारी को लेकर लोगों में जागरूकता अभी भी कम है और इसके फैलने के तरीकों को लेकर कई गलतफहमियां मौजूद हैं। आइए जानते हैं कि क्या है ये बीमारी जिसमें दिमाग में बनने लगती हैं गांठे।

क्या है न्यूरोसिस्टिसरकोसिस?

दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. पी. एन. रेनजेन के अनुसार, न्यूरोसिस्टिसरकोसिस पोर्क टेपवर्म (Taenia solium) के लार्वा (Larvae) से होने वाला संक्रमण है। लोगों का मानना है कि ये बीमारी पोर्क खाने से होती है लेकिन आम धारणा के विपरीत ये बीमारी सिर्फ पोर्क खाने से नहीं होती। संक्रमण तब होता है, जब कोई व्यक्ति दूषित भोजन, गंदा पानी या बिना हाथ धोए भोजन करने के दौरान टेपवर्म के सूक्ष्म अंडों को निगल लेता है। ये अंडे आंत में पहुंचकर लार्वा में बदल जाते हैं और फिर खून के जरिए शरीर के विभिन्न अंगों, खासकर दिमाग, तक पहुंचकर सिस्ट बना सकते हैं। यही कारण है कि जो लोग कभी पोर्क नहीं खाते, वे भी इस बीमारी का शिकार हो सकते हैं। ये बीमारी दूषित भोजन और साफ-सफाई का ध्यान नहीं रखने की वजह से होती है।

न्यूरोसिस्टिसरकोसिस के लक्षण कितने दिनों में दिखते हैं?

एक्सपर्ट के मुताबिक ये बीमारी कई सालों तक बिना लक्षणों के रह सकती है। परजीवी के शरीर में जाने के बाद शुरुआत में बनी सिस्ट कोई परेशानी नहीं करती लेकिन समस्या तब शुरू होती है, जब परजीवी मरने लगते हैं। उस समय शरीर की इम्यूनिटी इनके खिलाफ प्रतिक्रिया करती है, जिससे दिमाग में सूजन हो सकती है। यही सूजन अचानक दौरे या अन्य न्यूरोलॉजिकल समस्याओं का कारण बनती है। इसलिए कई बार यह पता लगाना मुश्किल हो जाता है कि संक्रमण कब और कहां हुआ था।

इन लक्षणों को नहीं करें नजरअंदाज

न्यूरोसिस्टिसरकोसिस के लक्षण इस बात पर निर्भर करते हैं कि दिमाग में कितनी सिस्ट हैं और वहां सूजन कितनी है। इस बीमारी के लक्षणों की बात करें तो  

  • पहली बार मिर्गी का दौरा पड़ना
  • लगातार सिरदर्द होना
  • मतली और उल्टी होना
  • हाथ-पैरों में कमजोरी या सुन्नपन होना
  • संतुलन बनाने में कठिनाई होना
  • आंखों से धुंधला या दोहरा दिखाई देना
  • याददाश्त, व्यवहार या सोचने की क्षमता में बदलाव होने जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करें। हालांकि बॉडी में दिखने वाले इन लक्षणों को स्ट्रोक या ब्रेन ट्यूमर जैसी बीमारियों से भी जोड़ा जाता है, इसलिए समय पर जांच कराना जरूरी है।

बीमारी का पता कैसे लगाएं?

इस बीमारी का पता लगाने के लिए डॉक्टर आमतौर पर सीटी स्कैन (CT Scan) एमआरआई (MRI), ब्लड टेस्ट कराने की सलाह देते हैं। इस बीमारी का पता लगाने में मरीज की मेडिकल हिस्ट्री भी बहुत मायने रखती है। इस परेशानी का इलाज मरीज की स्थिति को ध्यान में रखते हुए ही किया जाता है। बीमारी का इलाज करने के लिए मरीज को परजीवी खत्म करने वाली दवाएं दी जाती है। दौरा को रोकने की और दिमाग की सूजन कंट्रोल करने की दवाएं दी जाती हैं।  कुछ मामलों में अगर सिस्ट मस्तिष्क में सेरेब्रोस्पाइनल फ्लूइड (CSF) के प्रवाह को रोक रही हों या दिमाग के महत्वपूर्ण हिस्सों को प्रभावित कर रही हों, तो सर्जरी की भी जरूरत पड़ सकती है। एक्सपर्ट के मुताबिक परजीवियों के नष्ट होने के दौरान सूजन कुछ समय के लिए बढ़ सकती है, इसलिए इलाज हमेशा डॉक्टर की निगरानी में ही होना चाहिए।

न्यूरोसिस्टिसरकोसिस से बचाव कैसे करें?

  • न्यूरोसिस्टिसरकोसिस से काफी हद तक बचाव किया जा सकता है। इसके लिए
  • भोजन से पहले और शौच के बाद साबुन से हाथ धोएं।
  • केवल साफ और सुरक्षित पानी पिएं।
  • फल और सब्जियों को अच्छी तरह धोकर खाएं।
  • पोर्क को अच्छी तरह पकाकर ही खाएं ताकि आंतों में टेपवर्म का संक्रमण न हो।
  • घर और आसपास साफ-सफाई रखें।
  • जिन लोगों में वयस्क टेपवर्म का संक्रमण हो, उनका समय पर इलाज कराएं, क्योंकि वही दूसरों में संक्रमण फैलाने का मुख्य स्रोत होते हैं। डॉ. रेनजेन के अनुसार, दिमाग में परजीवी पहुंचने की बात सुनने में डरावनी जरूर लगती है, लेकिन न्यूरोसिस्टिसरकोसिस का समय पर पता लग जाए तो इसका इलाज संभव है।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी विशेषज्ञों द्वारा साझा की गई मेडिकल जानकारी पर आधारित है। यदि आपको दौरे, लगातार सिरदर्द या ऊपर बताए गए कोई भी न्यूरोलॉजिकल लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत न्यूरोलॉजिस्ट से संपर्क करें।