अगर आपको या आपके परिवार में किसी को कई दिनों से लगातार खांसी की शिकायत है और दवाइयों से भी आराम नहीं मिल रहा, तो इसे मामूली मानकर नजरअंदाज न करें। सिगरेट न पीने वाले लोगों में भी फेफड़ों का कैंसर अब एक बड़ी चिंता बनता जा रहा है। डॉक्टर के मुताबिक भारत में हर साल लगभग 70–80 हजार नए लंग्स कैंसर के मामले डायग्नोज होते हैं। कुल कैंसर मामलों में लंग्स कैंसर की हिस्सेदारी लगभग 6–8% या कुछ जगहों पर 10% तक हो सकती है। हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक समय पर लक्षणों की पहचान ही इस बीमारी से बचाव और सही इलाज की सबसे बड़ी चाबी है।
फोर्टिस अस्पताल, मानेसर में पल्मोनोलॉजी विभाग, सीनियर कंसल्टेंट एवं हेड,डॉ. कर्ण मेहरा ने जनसत्ता डॉट कॉम को बताया लंग्स कैंसर युवाओं में तेजी से फैलने वाला कैंसर बनता जा रहा है। ये बीमारी पहले युवा पुरुषों में ज्यादा देखने को मिलती थी लेकिन अब महिलाओं में भी इस बीमारी के मामले बढ़ रहे हैं। लंग्स कैंसर के लिए सिगरेट को जिम्मेदार माना जाता है लेकिन पुरानी केस स्टडी के मुताबिक अब ये कैंसर नॉन स्मोकर्स को भी अपनी चपेट में ले रहा है।
भारत में हर साल कितने लंग्स कैंसर के नए मामले होते हैं डायग्नोज?
डॉ. कर्ण मेहरा के मुताबिक भारत में हर साल लगभग 70–80 हजार नए लंग्स कैंसर के मामले डायग्नोज होते हैं। पहले लंग्स कैंसर को मुख्य रूप से पुरुषों और स्मोकिंग से जोड़कर देखा जाता था। डॉक्टर के मुताबिक अब महिलाओं में भी इसके मामले देखने को मिल रहे हैं। इसके पीछे बढ़ता वायु प्रदूषण एक संभावित कारण हो सकता है। हालांकि महिलाओं में लंग्स कैंसर के बढ़ते मामलों के पीछे अन्य कारकों की भी भूमिका हो सकते है। लंग्स कैंसर के लिए स्मोकिंग के अलावा एयर पॉल्यूशन, चूल्हे के धुएं और इंडस्ट्रियल एक्सपोजर जैसे कारक भी जिम्मेदार हो सकते हैं।
लंबे समय तक रहने वाली खांसी को नजरअंदाज न करें
लंग्स कैंसर के शुरुआती संकेतों में लगातार बनी रहने वाली खांसी महत्वपूर्ण है। खासकर अगर खांसी दिनों या महीनों तक ठीक नहीं हो रही है और व्यक्ति में अन्य जोखिम कारक भी मौजूद हैं, तो तुरंत डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।
लंग्स कैंसर के प्रमुख लक्षण
डॉक्टर मेहरा के मुताबिक लंग्स कैंसर में लगातार खांसी, सांस फूलना और सीने में दर्द जैसे लक्षण हो सकते हैं। बीमारी बढ़ने पर बलगम या खांसी में खून आना भी वॉर्निंग साइन हो सकते हैं। इसके अलावा भूख कम लगना और बिना वजह वजन कम होना भी ध्यान देने योग्य लक्षण हैं।
लंग्स कैंसर के मरीज को बार-बार निमोनिया क्यों हो सकता है?
लंग्स कैंसर के मरीजों में फेफड़ों की कार्यक्षमता और शरीर की इम्यूनिटी प्रभावित हो सकती है, जिसके कारण निमोनिया और अन्य फेफड़ों के संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। डॉक्टर ने खासतौर पर स्मोकर्स में लंग इंफेक्शन का खतरा अधिक होने की बात कही। उन्होंने ऐसे मरीजों में डॉक्टर की सलाह से निमोनिया और इन्फ्लूएंजा वैक्सीन लगवाने की सलाह दी।
एलर्जी वाली खांसी और कैंसर की खांसी में अंतर
मौसम बदलने पर होने वाली खांसी के साथ अगर छींक, नाक बहना और अन्य एलर्जी के लक्षण भी हैं, तो वह एलर्जी के कारण हो सकती है। लेकिन ऐसी खांसी जो लगातार दिनों या महीनों तक बनी रहे और उसके साथ भूख कम होना, वजन घटना, सांस फूलना या खांसी में खून जैसे लक्षण हों, तो इसे केवल एलर्जी मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
लंग्स कैंसर की जांच के लिए कौन-से टेस्ट होते हैं?
डॉक्टर के मुताबिक हाई-रिस्क लोगों में स्क्रीनिंग के लिए चेस्ट CT स्कैन महत्वपूर्ण जांच है। CT स्कैन में किसी संदिग्ध गांठ या अन्य बदलाव का पता चलने के बाद डॉक्टर जरूरत के अनुसार आगे की जांच की सलाह दे सकते हैं, जिसमें ब्रोंकोस्कोपी या बायोप्सी शामिल हो सकती है।
क्या Chest X-ray से लंग्स कैंसर का पता चल सकता है?
Chest X-ray से फेफड़ों में कुछ असामान्य बदलाव दिखाई दे सकते हैं, लेकिन डॉक्टर के अनुसार छोटे और शुरुआती कैंसर X-ray में छूट सकते हैं। इसलिए जिन लोगों में लंग्स कैंसर का जोखिम अधिक है और जिन्हें स्क्रीनिंग की जरूरत है, उनमें डॉक्टर की सलाह के अनुसार Low-dose CT ज्यादा उपयुक्त स्क्रीनिंग टेस्ट हो सकता है। डॉक्टर ने बताया जिन लोगों ने लंबे समय तक स्मोकिंग की है और जिनकी उम्र 35 साल से ज्यादा है, उन्हें सालाना स्क्रीनिंग के बारे में अपने चेस्ट फिजिशियन से बात करनी चाहिए।
लंग्स कैंसर से बचाव कैसे करें?
- डॉक्टर ने बताया लंग्स कैंसर से बचाव करना है तो सबसे पहले स्मोकिंग छोड़ दें।
- जो लोग खुद से smoking नहीं छोड़ पा रहे हैं, वे डॉक्टर की मदद और smoking-cessation treatments ले सकते हैं।
- एयर पॉल्यूशन अधिक होने के दौरान उचित N95 मास्क का इस्तेमाल किया जा सकता है।
- इंडस्ट्री में काम करने वाले लोगों को अपने काम के दौरान प्रोटेक्टिव गियर का इस्तेमाल करना चाहिए।
डॉक्टर की सलाह
लंग्स कैंसर का जोखिम केवल स्मोकर्स तक सीमित नहीं है। लंबे समय तक रहने वाली खांसी, सांस फूलना, सीने में दर्द, बिना वजह वजन कम होना या खांसी में खून जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, खासकर जब व्यक्ति स्मोकिंग, प्रदूषण या इंडस्ट्रियल एक्सपोजर जैसे जोखिमों के संपर्क में हो। समय पर जांच से बीमारी का जल्दी पता लगाने और इलाज शुरू करने में मदद मिल सकती है।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी डॉक्टर से हुई बातचीत और उपलब्ध स्वास्थ्य जानकारी पर आधारित है। लंग्स कैंसर के बताए गए लक्षण अन्य सामान्य बीमारियों में भी दिखाई दे सकते हैं, इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर कैंसर का निष्कर्ष न निकालें। लगातार या गंभीर लक्षण होने पर योग्य डॉक्टर से जांच और सलाह लें। स्क्रीनिंग या किसी भी जांच का निर्णय अपनी उम्र, स्वास्थ्य और जोखिम कारकों के आधार पर डॉक्टर की सलाह से ही करें।
