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धूम्रपान छोड़ने के 15 साल बाद भी हो सकता है कैंसर, रिपोर्ट में खुलासा

मायो क्लीनिक कैंसर केंद्र के मुख्य लेखक पिंग यांग ने कहा, ‘‘धूम्रपान करने वालों की संख्या में कमी फेफड़ों के कैंसर के जोखिम और उससे होने वाली मौतों को कम करने का एक महत्वपूर्ण कदम है और यह जारी है।’’

Author वॉशिंगटन | Published on: January 27, 2016 8:18 PM
फेफड़ों के कैंसर का मौजूदा मापदंड अमेरिकी प्रिवेंटिव सर्विसेस टास्क फोर्स ने तय किया है।

लगभग 15 साल पहले धूम्रपान की आदत को अलविदा कह चुके लोगों को अभी भी फेफड़ों का कैंसर होने का उच्च स्तरीय जोखिम है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस बीमारी की जांच के लिए तैयार रूपरेखा में ऐसे लोगों को भी शामिल किया जाना चाहिए। शोधार्थियों ने कहा कि फेफड़ों के कैंसर की जांच में उन लोगों को भी शामिल किया जाए जो लगभग 15 साल पहले धूम्रपान की आदत छोड़ चुके हैं। इससे इस बीमारी से ग्रस्त ज्यादा लोगों का पता लगाया जा सकेगा और आगे चलकर इससे लोगों की मृत्युदर कम की जा सकेगी।

मायो क्लीनिक कैंसर केंद्र के मुख्य लेखक पिंग यांग ने कहा, ‘‘धूम्रपान करने वालों की संख्या में कमी फेफड़ों के कैंसर के जोखिम और उससे होने वाली मौतों को कम करने का एक महत्वपूर्ण कदम है और यह जारी है।’’

यांग ने कहा, ‘‘लेकिन इसका यह भी मतलब है कि फेफड़ों के कैंसर का पहले पता लग जाने से कुछ ही लोग लाभान्वित हुए हैं क्योंकि अधिकतर मरीज कम प्रभावी सीटी स्कैन के काबिल भी नहीं होते।’’

फेफड़ों के कैंसर का मौजूदा मापदंड अमेरिकी प्रिवेंटिव सर्विसेस टास्क फोर्स ने तय किया है। लेकिन इस मापदंड के हिसाब से अमेरिका में अधिकतर वयस्क फेफड़ों के कैंसर के दायरे में नहीं आते और इसीलिए शोधार्थी इसमें थोड़े बदलाव चाहते हैं। यह अध्ययन जर्नल ऑफ थोरासिक ओन्कोलॉजी में प्रकाशित हुआ है।

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