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क्या यूरिक एसिड कम होना सेहत के लिए हानिकरक है? जानिए शरीर में कितना होना चाहिए नॉर्मल यूरिक एसिड

यूरिक एसिड बढ़ने पेशाब से जुड़ी समस्याएं, किडनी में पथरी, जोड़ों में असहनीय दर्द की शिकायत रहती है।

क्या यूरिक एसिड कम होना सेहत के लिए हानिकरक है? जानिए शरीर में कितना होना चाहिए नॉर्मल यूरिक एसिड
यूरिक एसिड लेवल के कम होने से शरीर में एंटी -ऑक्सीडेंट्स का प्रभाव कम देखने को मिलता है जिसकी वजह से कैंसर जैसे जानलेवा रोगों का खतरा बढ़ सकता है। photo-freepik

यूरिक एसिड का बढ़ना एक ऐसी परेशानी है जो कम उम्र में ही लोगों को अपना शिकार बना रही है। ये परेशानी लोगों में जोड़ों के दर्द के रूप में देखी जाती है। बढ़ती उम्र के साथ ये परेशानी आम होती जा रही है। अब सवाल ये उठता है कि आखिर यूरिक एसिड है क्या? यूरिक एसिड हमारे खून में मौजूद टॉक्सिन हैं जो हमारा खाने के बाद बनते हैं।

हमारे भोजन में कुछ ऐसे तत्व होते है जिनमें प्यूरिन पाया जाता है। खाना पचाने की प्रक्रिया के दौरान जब प्यूरिन टूटता है तो उससे यूरिक एसिड बनता है। हमारे शरीर में किडनी यूरिक एसिड को फिल्टर करती है और फिर पेशाब के जरिए बॉडी से उसे बाहर निकालती है।

यूरिक एसिड का बनना एक सामान्य प्रक्रिया है जो सभी की बॉडी में बनता है। महिलाओं में यूरिक एसिड की नॉर्मल रेंज 2.4 से 6.0 mg/dL तक है जबकि पुरुषों में 3.4 से 7.0 mg/dL तक नॉर्मल रेंज है। हर इंसान में यूरिक एसिड कम या ज्यादा बनता है। 8.0 mg/dLके बाद बढ़ना खतरनाक साबित होता है। अभी तक हम यही जानते हैं कि यूरिक एसिड का स्तर बढ़ता ही है लेकिन आप जानते हैं कि यूरिक एसिड का स्तर घटना भी सेहत के लिए खतरनाक साबित होता है। आइए जानते हैं कि यूरिक एसिड का घटना किस तरह नुकसानदायक है।

यूरिक एसिड का कम होना किस तरह नुकसानदायक है?

ज्यादातर मरीजों को यूरिक एसिड बढ़ने की शिकायत होती है। यूरिक एसिड कम होने के मामले बहुत कम आते हैं। बॉडी में यूरिक एसिड टॉक्सिन होते हैं जो बॉडी से बाहर निकलकर ब्लड को साफ करते हैं और बॉडी को हेल्दी रखते हैं।

यूरिक एसिड लेवल के कम होने से शरीर में एंटी -ऑक्सीडेंट्स का प्रभाव कम देखने को मिलता है जिसकी वजह से कैंसर जैसे जानलेवा रोगों का खतरा बढ़ सकता है। यह लेवल सामान्य से कम होने पर दिल की बीमारियों का खतरा भी अधिक हो जाता है।

लो यूरिक एसिड लेवल से व्यक्ति को बार-बार पेशाब करने की, यूरिन पास करने की ज़रूरत महसूस नहीं होती। यूरिन के कम डिस्चार्ज होने की वजह से ब्लड में टॉक्सिन बढ़ने लगते हैं। कई बार ज़रूरत से अधिक मेडिकेशन लो यूरिक एसिड का कारण बनता है।

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