मां बनना हर महिला के लिए एक सुखद अनुभव है, लेकिन जब बात सिजेरियन (C-Section) के बाद दूसरी प्रेग्नेंसी की आती है तो मन में कई सवाल और डर होते हैं। दो बच्चों के बीच कितना अंतर होना चाहिए? और क्या सिजेरियन के बाद कभी नॉर्मल डिलीवरी संभव है? ये वो सवाल हैं जो अक्सर ओपीडी में महिलाओं द्वारा पूछे जाते हैं। आज जंसत्ता के हेल्थ पेज में स्त्री रोग विशेषज्ञों (Gynecologists) के हवाले से जानेंगे कि टांकों को भरने में कितना समय लगता है और क्या सिजेरियन के बाद VBAC यानी Vaginal Birth After Cesarean का विकल्प चुनना सुरक्षित है।

  • एशियन हॉस्पिटल में सीनियर कंसल्टेंट प्रसूति स्त्री रोग और रोबोटिक सर्जन डॉ. उषा प्रियंबदा ने बताया महिला की सी सेक्शन डिलीवरी के लिए कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं जैसे
  • बच्चे का गर्भ में उल्टा होना
  • महिला की हाइट का छोटा होना
  • लेबर में बच्चे की धड़कन का अनियंत्रित होना शामिल है।
  • कुछ मामलों में सी सेक्शन डिलीवरी तब कराई जाती है जब महिला की दूसरी डिलीवरी होती है और दर्द की दवा देने के बाद भी बच्चा नीचे नहीं आता तो ऐसे में महिला की सीजेरियन डिलीवरी कराई जाती है।
  • अगर किसी महिला की पहली डिलीवरी सिजेरियन हुई है और दूसरी गर्भावस्था में बच्चा या प्लेसेंटा सामान्य रूप से बाहर नहीं आ रहा तो पहले लगे हुए टांकों पर दबाव पड़ने का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे मामलों में डॉक्टर मां और बच्चे की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए दोबारा सिजेरियन करने का फैसला ले सकते हैं।

पहली डिलीवरी सिजेरियन होने के बाद क्या दूसरी डिलीवरी नॉर्मल हो सकती है?

पहली डिलीवरी सिजेरियन होने के बाद दूसरी डिलीवरी नॉर्मल (VBAC – Vaginal Birth After Cesarean) हो सकती है। लेकिन यह पूरी तरह महिला की शारीरिक स्थिति, पिछले ऑपरेशन के कारण, गर्भाशय के टांकों की मजबूती और वर्तमान गर्भावस्था की स्थिति पर निर्भर करता है। अगर पहले सिजेरियन के निशान कमजोर है या लेबर के दौरान अधिक दबाव पड़ने की आशंका है तो गर्भाशय फटने का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए डॉक्टर अल्ट्रासाउंड और दूसरी जरूरी जांचों के आधार पर यह तय करते हैं कि नॉर्मल डिलीवरी सुरक्षित रहेगी या दोबारा सिजेरियन करना बेहतर होगा। सिजेरियन के बाद नॉर्मल डिलीवरी या दूसरी प्रेग्नेंसी पूरी तरह से आपकी मेडिकल हिस्ट्री और वर्तमान रिकवरी पर निर्भर करती है। डॉक्टर की निगरानी और सही अंतराल न केवल मां की सेहत सुरक्षित रखता है, बल्कि आने वाले बच्चे की सेहत का भी ख्याल रखता है।

एक महिला कितनी बार सिजेरियन डिलीवरी करा सकती है?

अगर किसी महिला की पहली बार सीजेरियन डिलीवरी हुई है तो वो 3 से चार बार डिलीवरी करा सकती है। इसमें महिला की स्थिति बहुत मायने रखती है। भारत में महिलाएं सिर्फ 3 से 4 बार ही सिजेरियन कराती हैं।

हर बार सीजेरियन कराने पर कौन-कौन से हेल्थ रिस्क रहते हैं?

बार-बार सिजेरियन डिलीवरी कराने से महिला की सीजेरियन कराने वाला हिस्सा वीक होने लगता है। इस हिस्से के टांके फट सकते हैं। कई बार प्लेसेंटा (ओवन नाल) उसी निशान वाली जगह पर जाकर चिपक जाता है। इस स्थिति को Placenta Accreta कहा जाता है जो मां के लिए गंभीर और जानलेवा साबित हो सकती है। इस अवस्था में प्लेसेंटा गर्भाशय की दीवार से असामान्य रूप से गहराई तक जुड़ जाता है और सामान्य तरीके से अलग नहीं हो पाता। गंभीर मामलों में ये आसपास के अंगों जैसे पेशाब की थैली (ब्लैडर) तक भी फैल सकता है। इससे डिलीवरी के समय ब्लीडिंग ज्यादा होने का खतरा रहता है और आपातकालीन सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है। इसीलिए जिन महिलाओं की पहले सिजेरियन डिलीवरी हो चुकी है, उन्हें अगली गर्भावस्था में नियमित जांच और विशेषज्ञ की निगरानी में रहना बेहद जरूरी होता है।

सी-सेक्शन के बाद दूसरी प्रेग्नेंसी कब प्लान करें?

एक्सपर्ट के मुताबिक अगर पहली डिलीवरी सिजेरियन हुई है तो अगली प्रेग्नेंसी के लिए शरीर को पर्याप्त समय देना जरूरी है। डॉक्टर कम से कम 2 से 3 साल का अंतर रखने की सलाह देते हैं। इस दौरान गर्भाशय के टांके ठीक तरह से भरते हैं और शरीर पूरी तरह रिकवर हो पाता है। इससे कम समय में डिलीवरी प्लान करने से हेल्थ रिस्क बढ़ सकते हैं। पर्याप्त गैप के साथ प्रेग्नेंसी प्लान करने से मां तो सेफ रहती ही है साथ ही डिलीवरी में भी किसी तरह के कोई जोखिम नहीं होते।

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डिस्क्लेमर:

यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। हर महिला की शारीरिक स्थिति अलग होती है, इसलिए गर्भावस्था और डिलीवरी से जुड़ा कोई भी फैसला अपने डॉक्टर की सलाह के बाद ही लें।