रात की गहरी नींद में अचानक पैर या पिंडली की मांसपेशियों का बुरी तरह खिंच जाना एक ऐसा असहज अनुभव है, जिससे लगभग हर व्यक्ति कभी न कभी गुजरता है। इस तेज दर्द जिसे लेग क्रैम्प या बांयटे आना भी कहते हैं, के कारण न सिर्फ नींद टूटती है, बल्कि कई बार अगले दिन तक पैर में भारीपन बना रहता है। आमतौर पर लोग इसे केवल दिनभर की थकान या आम कमजोरी मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि रात में बार-बार होने वाला यह दर्द केवल थकान नहीं, बल्कि शरीर के भीतर पल रही किसी बड़ी कमी या असंतुलन का संकेत हो सकता है।

हार्ट-ट्रांसप्लांट स्पेशलिस्ट और कार्डियोलॉजिस्ट Dr Dmitry Yaranov के अनुसार पैरों में ऐंठन के लिए केवल पानी की कमी जिम्मेदार नहीं होती, बल्कि इसके पीछे कई दूसरे हेल्थ से जुड़े कारण भी हो सकते हैं। डॉ. यारानोव बताते हैं कि अगर ऐंठन बार-बार हो, खासकर रात में सोते समय या आराम की अवस्था में हो तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि पैरों में क्रैंप आने के लिए कौन-कौन से कारण जिम्मेदार हो सकते हैं और इससे बचाव कैसे किया जाए।

पैरों में क्रैम्प आने के कारण

  1. पैरों में क्रैम्प आने के लिए कई कारण जिम्मेदार होते हैं, लेकिन अगर आपके पैरों में दर्द और ऐंठन है और समय के साथ परेशानी बढ़ रही है तो ये धमनियों में रुकावट (Peripheral Artery Disease) का संकेत हो सकता है। इस स्थिति में पैरों तक पर्याप्त मात्रा में खून नहीं पहुंचता। अगर वक्त रहते इलाज नहीं किया जाए तो अंग को नुकसान पहुंच सकता है।
  2. पैरों की नसें हमारी बॉडी का खून वापस दिल तक पहुंचाने का काम करती हैं। जब इन नसों के वाल्व ठीक से काम नहीं करते, तो खून पैरों में जमा होने लगता है जिसके कारण पैरों में भारीपन, सूजन, दर्द, ऐंठन और उभरी हुई नसें दिखाई दे सकती हैं।
  3. शरीर में मैग्नीशियम, पोटैशियम और कैल्शियम जैसे इलेक्ट्रोलाइट्स मांसपेशियों के सही कामकाज के लिए जरूरी होते हैं। इनकी कमी होने पर मांसपेशियों में ऐंठन हो सकती है।
  4. नसों से जुड़ी बीमारी की वजह से भी पैरों में क्रैम्प आते हैं। अगर क्रैंप के साथ ही पैरों में झनझनाहट, सुन्नपन, जलन और दर्द महसूस होता है तो ये नसों से जुड़ी बीमारी का संकेत हो सकते हैँ। डायबिटीज मरीजों में ये परेशानी ज्यादा देखने को मिलती है।
  5. थायराइड की बीमारी, एनीमिया, विटामिन D या विटामिन B12 की कमी होने पर भी पैरों में बार-बार क्रैंप आ सकते हैं। इन स्थितियों में मांसपेशियां जल्दी थक जाती हैं और खासकर रात के समय क्रैम्प्स की समस्या बढ़ सकती है।
  6. कुछ दवाओं के साइड इफेक्ट की वजह से भी पैरों में क्रैंप आ सकते हैं।

पैरों में बार-बार क्रैंप आते हैं तो ये उपाय अपनाएं

अगर आपको अक्सर पैरों में ऐंठन की समस्या होती है, तो कुछ आसान आदतें अपनाकर इसके जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

बॉडी को हाइड्रेट रखें

अगर आप पैरों के क्रैंप को कंट्रोल करना चाहते हैं तो सबसे पहले बॉडी को हाइड्रेट रखें। डिहाइड्रेशन मांसपेशियों में ऐंठन का एक बड़ा कारण है। आप पैरों में क्रैंप को कंट्रोल करना चाहते हैं तो आप दिनभर पर्याप्त पानी पिएं। गर्मी के दिनों में पसीना ज्यादा आता है ऐसे में आप लिक्विड फूड जैसे नींबू पानी,नारियल पानी और छाछ का सेवन करें।

इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाना है जरूरी

मैग्नीशियम, पोटैशियम और कैल्शियम की कमी से भी ऐंठन हो सकती है। अपनी डाइट में केला, नारियल पानी, दही, दूध, हरी पत्तेदार सब्जियां, मेवे और बीज जैसे पोषक खाद्य पदार्थ शामिल करें।

स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज करें

अगर अक्सर आपको सोते समय पैरों में क्रैंप आते हैं तो आप सोने से पहले कुछ स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज करें। स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज करने से मांसपेशियां फ्लैक्सीबल होती है और ऐंठन कंट्रोल रहती है।

लंबे समय तक एक ही पोजिशन में नहीं बैठे

काफी देर तक बैठने या खड़े रहने से पैरों में रक्त संचार प्रभावित हो सकता है। हर 30–60 मिनट में थोड़ा चलें या पैरों को हिलाते-डुलाते रहें। एक ही पोजिशन में लम्बे समय तक बैठने से मांसपेशियों में स्टिफनेस बढ़ती है।

रोजाना एक्सरसाइज करना भी है जरूरी

रोजाना 30 मिनट टहलना, साइकिल चलाना या हल्का व्यायाम करना पैरों के लिए बहुत जरुरी है। रोज की एक्सरसाइज मांसपेशियां मजबूत बनाती है और ब्लड सर्कुलेशन बेहतर करती है।

पैरों को सपोर्ट करने वाले शूज पहनें

बहुत टाइट या असुविधाजनक जूते पहनने से पैरों पर दबाव बढ़ सकता है। हमेशा सही फिटिंग और आरामदायक फुटवियर का इस्तेमाल करें।

मेटाबॉलिक डिजीज  को करें कंट्रोल

अगर आपको डायबिटीज, थायरॉयड, किडनी की बीमारी या नसों से जुड़ी कोई समस्या है तो आप नियमित जांच कराएं और डॉक्टर की सलाह के अनुसार इलाज करें।

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के उद्देश्य से तैयार किया गया है। पैरों में लगातार ऐंठन, दर्द या अन्य लक्षण होने पर स्वयं इलाज करने के बजाय योग्य डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें।