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ऊर्जा की कमी से तन में आलस मन में आलस

कहते हैं कि आलस्य व्यक्ति का सबसे बड़ा दुश्मन है।

ऊर्जा की कमी से तन में आलस मन में आलस
सांकेतिक फोटो।

आलसी व्यक्तियों के पास समय तो होता है, लेकिन वे उस समय का सदुपयोग नहीं कर पाते। समय पर कोई काम पूरा नहीं कर पाते। वे काम को टालते रहते हैं। ऐसा नहीं कि ऐसे लोग काम करना नहीं चाहते, पर आलस्य की वजह से कर नहीं पाते। काम को सही समय पर न पूरा कर पाने पर तनाव और चिंता बढ़ जाती है, जिसके चलते ऐसे व्यक्ति अधिक चिंतित रहते हैं। अक्सर दफ्तरों में, सार्वजनिक वाहनों में चलते हुए ऐसे लोगों पर नजर पड़ जाती है, जो ऊंघते रहते हैं, उबासी लेते रहते हैं। उनके चेहरे पर थकान नजर आती है। न उनके बोलने में ऊर्जा नजर आती है, न किसी प्रकार के हाव-भाव में। यह समस्या केवल अधिक उम्र के लोगों में नहीं, किशोरों और युवाओं में भी नजर आती है। बल्कि आजकल की बदलती जीवन-शैली में किशोर और युवा अधिक थके हुए, अधिक आलसी नजर आते हैं।

दरअसल, आलस्य एक शारीरिक विकार है, जिसे दूर किया जा सकता है। पहले समझना जरूरी है कि आलस्य पैदा क्यों होता है। कोई भी व्यक्ति जन्मजात आलसी नहीं होता, उसकी जीवन-शैली उसे आलसी बना देती है। आलस्य यानी कोई भी काम करने की इच्छा का न होना। किसी भी काम को लेकर मन में उत्साह न होना। इसे जीवन-शैली में बदलाव लाकर दूर किया जा सकता है। शरीर और मन को ऊर्जावान बनाया जा सकता है।
कारण

शरीर और मन में आलस्य पैदा होने के कई कारण हो सकते हैं

समय पर न खाना और सोना। अधिक देर तक जागना भी आलस्य का प्रमुख कारण है।

भोजन में अधिक तली-भुनी चीजों का प्रयोग करने से भी शरीर में आलस्य बढ़ता है।

मन में नकारात्मक भावनाएं आना भी आलस्य का एक कारण हो सकता है। नकारात्मक सोच आलस्य की जननी है।

किसी भी काम को बोझ समझ कर करने, काम के प्रति उत्साह न होने से भी आलस्य पैदा होता है।

आलस्य भगाने के उपाय
दिन की शुरुआत योग से करें
योग शारीरिक और मानसिक दोनों रूप से चुस्त-दुरुस्त रखता है। योग करने से शरीर के साथ-साथ मन की प्रसन्नता प्राप्त होती है। इससे तनाव, चिंता, घबराहट, बेचैनी, अनिद्रा आदि की शिकायतें दूर होती। सकारात्मक भावना का विकास और नकारात्मक भावनाएं नष्ट होती हैं। इसलिए दस से पंद्रह मिनट का योग अपनी दिनचर्या में शामिल करें।
भोजन में सावधानी
आजकल ज्यादातर लोग अपने खाने में भारी चीजों का सेवन अधिक करते हैं। जैसे कार्बोहाइड्रेट, चीनी आदि का सेवन अधिक करते हैं, जिससे शरीर सुस्त हो जाता है। ऐसा भोजन करने वाले व्यक्ति अपने आप को थका हुआ महसूस करते हैं। इसलिए भारी चीजों से परहेज करें। भोजन का चुनाव करते समय सावधानी बरतने के साथ-साथ भोजन के समय का भी ध्यान रखें। भोजन का समय निर्धारित करें और दिन में या रात को देर से भोजन न करें। भोजन के तुरंत बाद सोने न जाएं। इससे भोजन नहीं पचता और शरीर में आलस्य बना रहता है।
सोने का समय
समय पर सोना व्यक्ति के लिए बहुत जरूरी होता है। बेवजह रात को देर तक जागते रहने से न तो भोजन ठीक से पचता है और न नींद पूरी होती है। इसलिए आलस्य बना रहता है, जिसका असर काम पर पड़ता है। अधिकतर लोग काफी समय तक टीवी, मोबाइल, इलेक्ट्रानिक उपकरणों पर घंटों समय व्यतीत करते हैं। ठीक से नींद आ जाए, तो दिन भर का थका हुआ शरीर और मन नई ऊर्जा प्राप्त कर लेता है। और आलस्य जैसी बीमारी भाग जाती है।
काम को न टालें
हमेशा अपने काम को समय पर पूरा करें, इससे भी मन ऊर्जावान रहता है। मन में व्यर्थ की चिंता और तनाव पैदा नहीं होगा। चिंता और तनाव भी आलस्य को जन्म देते हैं। किसी भी काम को बोझ न समझें। पूरे उत्साह के साथ काम करें।
सकारात्मक सोच
नकारात्मक भावनाओं को अपने पास न फटकने दें। हमेशा सकारात्मक रहें। अपने अंदर यह भावना पैदा करें कि हमारा शरीर उत्साह पूर्वक कार्य कर रहा है। ऐसा सोचेंगे, तो आलस्य आपसे कोसों दूर भागेगा। जब भी कोई नकारात्मक भाव पैदा हो या मन में आलस्य पैदा हो, तो सफल लोगों के बारे में सोचें। सोचें कि किस तरह उन्होंने अपने काम को समय पर पूरा करके अपने लक्ष्य को प्राप्त किया है। ल्ल
(यह लेख सिर्फ सामान्य जानकारी और जागरूकता के लिए है। उपचार या स्वास्थ्य संबंधी सलाह के लिए विशेषज्ञ की मदद लें।)

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First published on: 03-10-2022 at 03:29:00 am
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