बरसात के मौसम में अक्सर हरी सब्जियों का सेवन सोच-समझकर करने की सलाह दी जाती है, लेकिन इसी मौसम में बाजार में मिलने वाली एक खास सब्जी सेहत के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकती है। देखने में बिल्कुल छोटे परवल या करेले जैसी नजर आने वाली इस सब्जी को कुंदरू, ‘कंटोला’ (खेक्सा) और अंग्रेजी में Ivy Gourd कहा जाता है। न्यूट्रिशन और मेडिकल एक्सपर्ट्स के मुताबिक, पोषक तत्वों से भरपूर कंटोला का नियमित सेवन न केवल ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने में मददगार हो सकता है, बल्कि यह पाचन तंत्र को दुरुस्त कर कब्ज की समस्या से भी राहत दिला सकता है।
एम्स के पूर्व कंसल्टेंट और साओल हार्ट सेंटर के फाउंडर एंड डायरेक्टर डॉ बिमल झांजेर के मुताबिक कुंदरू का इस्तेमाल पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में ब्लड शुगर को कंट्रोल करने के लिए किया जाता रहा है। इसमें मौजूद कुछ बायोएक्टिव कंपाउंड ग्लूकोज मेटाबॉलिज्म पर असर डाल सकते हैं। हालांकि, कुंदरू को डायबिटीज की दवा का विकल्प नहीं माना जा सकता। डायबिटीज के मरीज इसे संतुलित डाइट का हिस्सा बना सकते हैं, लेकिन दवाएं डॉक्टर की सलाह के मुताबिक ही बंद करें। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि कुंदरू का सेवन सेहत को कैसे फायदा पहुंचाता है और इसमें कौन कौन से पोषक तत्व मौजूद होते हैं।
कम कैलोरी और एंटीऑक्सीडेंट से है ये भरपूर
कुंदरू कम कैलोरी वाली और फाइबर से भरपूर सब्जियों में शामिल है। इसमें फैट की मात्रा भी बहुत कम होती है। इसके अलावा इसमें पोटैशियम, कैल्शियम, विटामिन C, आयरन और कैरोटेनॉयड्स जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। इसकी कम कैलोरी इसे संतुलित और वजन कंट्रोल करने वाली डाइट के लिए उपयोगी विकल्प बना सकती है। कुंदरू में विभिन्न पौधों से मिलने वाले बायोएक्टिव कंपाउंड्स और एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं। एंटीऑक्सीडेंट शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से होने वाले सेल डैमेज को कम करने में अहम भूमिका निभाते हैं। इस सब्जी को कम तेल में पकाकर खाएं वजन कंट्रोल करने में मदद करेगी। हालांकि, किसी एक सब्जी को गंभीर बीमारियों से बचाव का निश्चित उपाय नहीं माना जा सकता।
कब्ज में मिल सकती है राहत
कुंदरू में डाइटरी फाइबर मौजूद होता है। फाइबर मल को नरम करने और आंतों की नियमित गतिविधि बनाए रखने में मदद करता है। इसलिए फाइबर वाली संतुलित डाइट के हिस्से के रूप में कुंदरू कब्ज से बचाव में मददगार हो सकता है। इसके साथ पर्याप्त मात्रा में पानी पीना भी जरूरी है।
आयरन और थकान से इसका क्या संबंध है?
कुंदरू में आयरन सहित कई पोषक तत्व पाए जाते हैं। आयरन शरीर में हीमोग्लोबिन बनाने के लिए जरूरी है। लेकिन केवल कुंदरू खाने से एनीमिया या लगातार होने वाली थकान का इलाज नहीं किया जा सकता। अगर किसी व्यक्ति में कमजोरी या थकान लगातार बनी रहती है, तो इसके कारण की जांच कराना जरूरी है।
नर्वस सिस्टम के लिए पोषक तत्व
कुंदरू में कुछ बी-विटामिन और अन्य पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर के सामान्य ऊर्जा मेटाबॉलिज्म और नर्वस सिस्टम के कामकाज में भूमिका निभाते हैं। हालांकि इसे नर्वस सिस्टम की बीमारियों का इलाज कहना सही नहीं होगा।
कुंदरू में पाए जाने वाले बायो एक्टिव कंपाउंड
कुंदरू में फ्लेवोनॉयड्स, सैपोनिन और टरपेनॉयड्स जैसे पौधों से मिलने वाले बायोएक्टिव कंपाउंड पाए जाते हैं। इन यौगिकों पर एंटीऑक्सीडेंट और अन्य संभावित स्वास्थ्य प्रभावों को लेकर शोध हुआ है। हालांकि, इनके आधार पर कुंदरू को किसी बीमारी की दवा कहना वैज्ञानिक रूप से उचित नहीं है।
कुंदरू को कैसे खाएं?
कुंदरू की सामान्य सब्जी बनाकर इसे डाइट में शामिल किया जा सकता है। इसे कम तेल में पकाना बेहतर विकल्प है। इसके अलावा इसे दूसरी सब्जियों के साथ मिलाकर भी खाया जा सकता है। डायबिटीज या वजन नियंत्रित करने वाले लोगों को इसे बहुत अधिक तेल या कैलोरी वाली सामग्री के साथ पकाने से बचना चाहिए।
क्या कुंदरू हर बीमारी का इलाज है?
कुंदरू को डायबिटीज, मोटापा, हृदय रोग, अस्थमा, पीलिया, स्किन इंफेक्शन या IBS जैसी बीमारियों का इलाज बताना सही नहीं है। कुछ पारंपरिक उपयोग और शुरुआती शोध इसके हेल्थ बेनेफिट्स की ओर संकेत करते हैं, लेकिन किसी बीमारी के इलाज के लिए पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण होना जरूरी है। इसलिए इसे एक पौष्टिक सब्जी के तौर पर डाइट में शामिल करें, किसी बीमारी की दवा के विकल्प के रूप में नहीं।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के उद्देश्य से दी गई है। कुंदरू एक पौष्टिक सब्जी है, लेकिन इसे डायबिटीज, मोटापा, एनीमिया, हृदय रोग या किसी अन्य बीमारी का इलाज नहीं माना जाना चाहिए। किसी स्वास्थ्य समस्या से पीड़ित व्यक्ति इसे अपनी डाइट में शामिल करने से पहले डॉक्टर या योग्य डाइटीशियन की सलाह लें और निर्धारित दवाएं बिना चिकित्सकीय सलाह के बंद
