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खतरनाक है अल्जाइमर की समस्या, जानिए लक्षण और बचाव के उपाय

इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को रोजमर्रा के कामकाज में परेशानी होती है, फोन मिलाने और किसी काम में ध्यान लगाने में दिक्कत आने लगती है, कोई फैसला लेने की क्षमता कम हो जाती है, चीजें इधर उधर रखकर भूल जाते हैं

Author Published on: September 22, 2018 11:22 PM
प्रतिकात्मक तस्वीर।

बीमारी ऐसी हो कि इनसान बातों को भूलने लगे, अपनों को ही पहचान न पाए और अपना दुख बता न पाए तो उसका और उसके अपनों का कष्ट कई गुना बढ़ जाता है। ऐसी ही बीमारी है अल्जाइमर। ऐसे में जब बार-बार भूलने लगें तो डाक्टर को दिखाना चाहिए। अमेरिकन जर्नल ऑफ साइकाइअट्री के एक शोध के मुताबिक तनाव या अवसाद अल्जाइमर का प्राथमिक लक्षण हो सकते हैं। अल्जाइमर एक न्यूरोडिजनरेटिव डिसीज होता है जिसमें हमारी संज्ञानात्मक क्षमता और दैनिक जीवन की तमाम प्रक्रियाएं प्रभावित होती हैं। अल्जाइमर रोग में मस्तिष्क में कोशिकाएं खुद ही बनती हैं और खत्म होने लगती हैं। इससे याद्दाश्त और मानसिक कार्यों में गिरावट आती है।

अल्जाइमर के लक्षण: इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को रोजमर्रा के कामकाज में परेशानी होती है, फोन मिलाने और किसी काम में ध्यान लगाने में दिक्कत आने लगती है, कोई फैसला लेने की क्षमता कम हो जाती है, चीजें इधर उधर रखकर भूल जाते हैं, शब्द भूलने लगते हैं, जिससे सामान्य बातचीत में रुकावट आती है, अपने घर के आसपास की गलियों, रास्तों को भूल जाते हैं और उनके रोजमर्रा के व्यवहार में बहुत तेजी से बदलाव आता है।

अल्जाइमर रोग तीन चरण: पहला, रोगी अपने दोस्तों और अन्य व्यक्तियों को पहचान सकता है, लेकिन उसे लगता है कि वह कुछ चीजें भूल रहा है। दूसरा चरण, रोगी की याद के विलोप की प्रक्रिया और अन्य लक्षण धीरे-धीरे उभरने लगते हैं। आखिरी और अंतिम चरण में व्यक्ति अपनी गतिविधियों को नियंत्रण करने की क्षमता खो देता है और अपने दर्द के बारे में भी नहीं बता पाता। यह चरण सबसे दुखदायी है।

अल्जाइमर से बचाव: यह रोग अकसर उम्र बढ़ने के साथ हो सकता है, लेकिन खान-पान, जीवनशैली के परिवर्तनों के कारण यह समस्या युवाओं में भी प्रकट हो रही है। इसके बचाव के लिए आपके किसी परिजन, मित्र और परिचित में ऐसे लक्षण दिखते हैं तो अपने डॉक्टर से परामर्श करें। रोग की जानकारी में ही इसका बचाव है। नियमित व्यायाम करें, पौष्टिक भोजन करें। पीड़ित को अवसाद (डिप्रेशन) से बचाएं, अकेला न छोड़ें। यदि रोगी को रक्तचाप समस्या, मधुमेह, हृदय रोग हैं तो उनकी समुचित चिकित्सा कर नियंत्रण में रखें। पीड़ित को तंबाकू, मद्यपान इत्यादि व्यसनों से मुक्त करें।

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