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इन कारणों से हो सकता है अस्थमा, जानिए- क्या है इसके लक्षण और इलाज

अस्थमा के एक दौरे के दौरान, ब्रोन्कियल ट्यूबों का अस्तर फूलता है जिसके कारण वायुमार्ग संकीर्ण होने लगता है और फेफड़ों में और बाहर हवा के प्रवाह में कमी होती है।

कई शोधकर्ताओं कों कहना है कि अस्थमा में कुछ आनुवांशिक और पर्यावरणीय कारक असर डालते हैं जो अस्थमा का कारण बनता है।

ये तो आप जानते होंगे कि सांस लेने में तकलीफ और घरघराहट अस्थमा के लक्षण होते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं अस्थमा होने के क्या कारण होते हैं? लोग अस्थमा होने के अलग अलग कारण बताते हैं और कई जानकारों का कहना है कि अस्थमा के कारण पूरी तरह समझ नहीं आते हैं। आपको बताते हैं कि अस्थमा के एक दौरे के दौरान, ब्रोन्कियल ट्यूबों का अस्तर फूलता है जिसके कारण वायुमार्ग संकीर्ण होने लगता है और फेफड़ों में और बाहर हवा के प्रवाह में कमी होती है। बताया जाता है कि कई लोगों को अस्थमा ट्रिगर से सांस खींचने के रूप में जैसे एलर्जी, तंबाकू के धुएं और रासायनिक परेशानी से हो सकता है।

अस्थमा के कारण- कई शोधकर्ताओं कों कहना है कि अस्थमा में कुछ आनुवांशिक और पर्यावरणीय कारक असर डालते हैं जो अस्थमा का कारण बनता है। यह अस्थमा पीड़ित माता-पिता से भी बच्चों में आ सकता है। अगर बाहरी कारणों की बात करें तो अस्थमा सिगरेट की धुआं, वायु प्रदूषण, रसायन या कार्यस्थल में धूल और स्प्रे (जैसे हेयरस्प्रे) से भी हो सकता है। कुछ दवाइयां भी अस्थमा का कारण हो सकती है, इसमें एस्पिरिन या अन्य गैर स्टेरायडल विरोधी उत्तेजक दवाइयों से भी अस्थमा हो सकता है। कई जानकार खाद्य पदार्थों और पेय में सल्फाइट की मात्रा को भी अस्थमा का कारण बताते हैं। वहीं अस्थमा का प्रारंभिक लक्षण सांस लेने में तकलीफ होती है और इसी के साथ छाती में जकड़न, खांसी भी अस्थमा के लक्षण हैं। यह लक्षण आमतौर हल्की ठंड के वक्त ज्यादा दिखाई देते हैं।

अस्थमा का इलाज- अस्थमा में दवाइयां आमतौर पर इनहेलर के माध्यम से दी जाती हैं। इनहेलर से दवा लेने से दवा सीधे फेफड़ों में जाती है। वहीं एक रिलीवर इनहेलर भी दिया जाता है। वहीं एक निवारक इनहेलर भी आता है, जो कि वायुमार्ग में सूजन और जलन की मात्रा को कम करने और अस्थमा के होने वाले हमलों केा रोकने के लिए काम करता है। अस्थमा का पता विभिन्नय टेस्ट के माध्यम से लगाया जा सकता है और अगर आपके शरीर में गर्ड के लक्षण हैं, तो आपका चिकित्सक एक पीएच जांच की सिफारिश कर सकता है। आपकी नाक या गले से बलगम के टेस्ट से भी इसका पता लगाया जा सकता है।

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