किन कारणों से किडनी में बनने लगता है स्टोन, जानें गुर्दे में पथरी के लक्षण और बचाव के उपाय

Kidney Stone ke lakshan: किडनी में स्टोन के मरीज बेशक आज के समय में कई मिल जाएंगे, लेकिन ये कई दूसरे और गंभीर समस्याओं का कारण बन सकते हैं

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शरीर में पोटैशियम, प्रोटीन, सोडियम और शुगर की कमी के कारण किडनी में पथरी की समस्या हो जाती है

Kidney Stone Symptoms: वर्तमान समय में किडनी में स्टोन की परेशानी बेहद आम हो चुकी है। ये बीमारी जो पहले उम्रदराज लोगों को होती थी, खराब लाइफस्टाइल के कारण कम उम्र के लोगों को भी अपनी चपेट में लेती है। बता दें कि किडनी शरीर का दूसरा सबसे बड़ा अंग है जो शरीर में खून से टॉक्सिंस को बाहर निकालने में मदद करता है। बता दें कि शरीर में पोटैशियम, प्रोटीन, सोडियम और शुगर की कमी के कारण किडनी में पथरी की समस्या हो जाती है। बस यही नहीं, कई बार डिहाइड्रेशन की वजह से भी किडनी में पथरी हो जाती है। आइए जानते हैं विस्तार से –

क्यों किडनी में बनने लगते हैं स्टोन: किडनी में पथरी का एक बहुत बड़ा कारण खानपान में लापरवाही को भी माना जाता है। नमक व दूसरे मिनरल्स जब एक-दूसरे के संपर्क में आते हैं तो पथरी बनने लगती है। किडनी में जब ऑक्जलेट्स की मात्रा बढ़ जाती है तो स्टोन का खतरा ज्यादा हो जाता है। शरीर में पोटैशियम, प्रोटीन, सोडियम और शुगर की कमी के कारण किडनी में पथरी की समस्या हो जाती है। वहीं, शरीर में फ्लूईड्स की मात्रा कम होने से, डाइट फैक्टर्स और आनुवांशिक कारणों से भी गुर्दे में पथरी देखने को मिलती है।

क्या हो सकती है दिक्कतें: किडनी में स्टोन के मरीज बेशक आज के समय में कई मिल जाएंगे, लेकिन ये कई दूसरे और गंभीर समस्याओं का कारण बन सकते हैं। इसके कारण यूरिन संबंधी दिक्कतें जैसे कि यूरिनेशन के वक्त जलन, खून निकलने की परेशानी हो सकती है। अगर पर्याप्त ध्यान नहीं रखा गया तो इससे किडनी परमानेंटली डैमेज हो सकती है। किडनी इंफेक्शन, यूटीआई और हार्ट संबंधी दिक्कतें भी हो सकती हैं।

जानें इस बीमारी के लक्षण: 
बार-बार पेशाब की इच्छा होना
पेशाब करते वक्त जलन व दर्द, खून आना
यूरिन का रंग गहरा होना या फिर बदबू आना
पसलियों और पेट में दर्द
तेज बुखार और उल्टी
शरीर के निचले हिस्से में सूजन
कमर में दर्द

इन बातों का रखें खास ख्याल: ज्यादा पानी पीयें, दिन में कम से कम 7-8 गिलास पानी पीना चाहिए। अजवाइन खाने से भी किडनी संबंधी दिक्कतें दूर होती हैं। ये एक डिटॉक्सिफाइंग एलिमेंट है जो शरीर में से टॉक्सिन पदार्थों को बाहर निकालने में मददगार होता है। कम नॉन वेज भोजन करें, नमक और चीनी की मात्रा पर भी संतुलन रखें। पालक, साबुत अनाज में ऑक्सलेट की मात्रा अधिक होती है, इन्हें खाने से भी बचना चाहिए।

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