Kidney Damage Symptoms: हमारा शरीर एक मशीन की तरह है और किडनी इस मशीन का बेहद जरूरी फिल्टर। किडनी का काम खून को साफ रखना, जहरीले तत्वों को बाहर निकालना और शरीर में पानी व मिनरल्स का संतुलन बनाए रखना है। लेकिन परेशानी तब शुरू होती है जब किडनी धीरे-धीरे खराब होने लगती है और हमें इसकी भनक तक नहीं लगती। इसी वजह से किडनी की बीमारी को साइलेंट किलर कहा जाता है। शुरुआती दौर में इसके लक्षण इतने आम होते हैं कि लोग उन्हें थकान या मौसम का असर समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। ऐसे में फोर्टिस हॉस्पिटल नोएडा के एडिशनल डायरेक्टर व हेड नेफ्रोलॉजी व किडनी ट्रांसप्लांट विभाग की डॉ. अनुजा पोरवाल से जानिए कि किडनी खराब होने से पहले शरीर में कौन-कौन से संकेत दिखने लगते हैं।
किडनी क्यों है इतनी जरूरी?
किडनी हमारे शरीर में मौजूद यूरिया, क्रिएटिनिन, एसिड और दूसरे टॉक्सिक तत्वों को खून से अलग करती है। ये गंदे तत्व पेशाब के जरिए शरीर से बाहर निकल जाते हैं। अगर किडनी ठीक से काम न करे तो ये जहरीले पदार्थ खून में जमा होने लगते हैं, जिससे शरीर के दूसरे अंग भी प्रभावित होने लगते हैं। यही वजह है कि किडनी की सेहत को हल्के में नहीं लेना चाहिए।
जी मिचलाना और उल्टी
डॉ. अनुजा पोरवाल के अनुसार, अगर बिना किसी वजह के बार-बार जी मिचलाता है या खाने के बाद उल्टी जैसा महसूस होता है, तो यह किडनी में गड़बड़ी का संकेत हो सकता है। जब किडनी खून को ठीक से साफ नहीं कर पाती, तो टॉक्सिन्स शरीर में जमा हो जाते हैं, जिससे पेट से जुड़ी समस्याएं शुरू हो जाती हैं।
भूख में कमी और पेट भरा-भरा लगना
किडनी खराब होने का एक आम लक्षण है भूख का कम हो जाना। व्यक्ति को हर समय पेट भरा हुआ महसूस होता है और खाने का मन नहीं करता। कई बार लोग इसे गैस या एसिडिटी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि यह किडनी की शुरुआती चेतावनी हो सकती है।
थकान और कमजोरी
अगर आपको बिना ज्यादा काम किए ही थकान महसूस होती है और शरीर में कमजोरी रहती है, तो इसे हल्के में न लें। किडनी खराब होने पर शरीर में खून की कमी (एनीमिया) होने लगती है, जिससे ऑक्सीजन सही मात्रा में नहीं पहुंच पाती और इंसान जल्दी थक जाता है।
नींद की समस्या
रात को नींद न आना, बार-बार करवट बदलना या नींद पूरी न होना भी किडनी की समस्या से जुड़ा हो सकता है। जब शरीर में टॉक्सिन्स बढ़ जाते हैं, तो इसका असर दिमाग पर भी पड़ता है, जिससे नींद का पैटर्न बिगड़ जाता है।
पेशाब में बदलाव
सामान्य तौर पर एक स्वस्थ व्यक्ति दिन में 6 से 7 बार पेशाब करता है। लेकिन अगर पेशाब बहुत ज्यादा आने लगे या बहुत कम हो जाए, तो यह किडनी की खराबी का संकेत है। इसके अलावा पेशाब में जलन, झाग आना या रंग में बदलाव भी चेतावनी हो सकता है।
मानसिक सतर्कता में कमी
किडनी खराब होने पर दिमाग पर भी असर पड़ता है। व्यक्ति को ध्यान लगाने में परेशानी होती है, बातें भूलने लगता है और मानसिक रूप से सुस्ती महसूस करता है। कई बार लोग इसे तनाव या नींद की कमी से जोड़ देते हैं, लेकिन असल वजह किडनी भी हो सकती है।
मसल्स क्रैम्प और पैरों में सूजन
अगर आपको बार-बार मांसपेशियों में ऐंठन (क्रैम्प) होती है और पैरों या टखनों में सूजन दिखाई देती है, तो यह किडनी खराब होने का साफ संकेत हो सकता है। किडनी जब ठीक से काम नहीं करती, तो शरीर में नमक और पानी जमा होने लगता है, जिससे सूजन आ जाती है।
अन्य गंभीर संकेत
किडनी की बीमारी बढ़ने पर त्वचा का ज्यादा रूखा होना, खुजली, हाई ब्लड प्रेशर का कंट्रोल में न आना, सांस लेने में तकलीफ और सीने में दर्द जैसे लक्षण भी दिख सकते हैं। ये संकेत बताते हैं कि किडनी अब गंभीर रूप से प्रभावित हो रही है।
क्या करें और कब डॉक्टर से मिलें?
अगर ऊपर बताए गए लक्षणों में से एक या एक से ज्यादा लक्षण लंबे समय तक बने रहें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। समय पर जांच और इलाज से किडनी को और ज्यादा खराब होने से बचाया जा सकता है। साथ ही पर्याप्त पानी पीना, संतुलित आहार लेना, नमक कम करना और नियमित जांच कराना किडनी को स्वस्थ रखने में मदद करता है।
निष्कर्ष
किडनी की बीमारी धीरे-धीरे शरीर को अंदर से खोखला कर देती है। इसलिए जरूरी है कि हम शरीर के छोटे-छोटे संकेतों को समझें और समय रहते सावधान हो जाएं।
डिस्क्लेमर
यह स्टोरी सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार की गई है। किसी भी तरह के स्वास्थ्य संबंधी बदलाव या डाइट में परिवर्तन करने से पहले अपने डॉक्टर या योग्य हेल्थ एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
