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हवा, पानी और खाने से भी खराब हो सकती है किडनी, जानिए कैसे

किडनी शरीर का बेहद संवेदनशील अंग है खास कर बात जब पर्यावरणीय विषैले तत्वों की हो जो हमारे खून के प्रवाह में प्रवेश कर जाते हैं।

Author September 14, 2018 11:53 PM
कुछ संकेत बताते हैं कि आपकी किडनी सही तरीके से काम नहीं कर रही है।

वायु प्रदूषण की वजह से इंसानों में किडनी संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है और किडनी खराब भी हो सकते हैं। तेजी से फैलने वाले कछ पर्यावरणीय प्रदूषक आपके गुर्दों के स्वास्थ्य पर नुकसानदेह असर डाल सकते हैं। यह बात एक नए अध्ययन के माध्यम से सामने आई है। अमेरिका की ड्यूक यूनिर्विसटी के अनुसंधानकर्ताओं ने बताया कि पर एंड पॉलीफ्लोरोअल्काइल सबस्टांसेस (पीएफएएस) औद्योगिक प्रक्रियाओं और उपभोक्ता उत्पादों में इस्तेमाल होने वाले नॉन बायोडिग्रेडेबल (स्वाभाविक तरीके से नहीं सड़ने वाले) पदार्थों का एक बड़ा समूह है और ये पर्यावरण में हर जगह मौजूद हैं। बता दें कि इससे पहले हृदय रोग, स्ट्रोक, कैंसर, अस्थमा और COPS जैसी बीमारियों के लिए वायु प्रदूषण को जिमम्मेदार बताया जाता रहा है। वहीं नई स्टडी के बाद किडनी रोग भी इस लिस्ट में शामिल हो गया है।

अनुसंधानकर्ताओं ने 74 अध्ययनों को देखा जिसमें पीएफएएस के संपर्क से जुड़े कई प्रतिकूल प्रभावों के बारे में बताया गया है। इन प्रभावों में गुर्दों का सही ढंग से काम न करना, गुर्दे के पास की नलियों में गड़बड़ी और गुर्दे की बीमारी से जुड़े चयापचय मार्गों का ­बिगड़ जाना शामिल है। शोधकर्ताओं के मुताबिक मनुष्य दूषित मिट्टी, पानी, खाने और हवा के जरिए पीएफएएस के संपर्क में आते हैं। पीएफएएस के संपर्क से गुर्दों पर पड़ने वाले प्रभावों की जांच के लिए अनुसंधानकर्ताओं ने अन्य प्रासंगिक अध्ययनों को खंगाला।

ड्यूक यूनिर्विसटी के जॉन स्टेनिफर ने कहा, ‘‘किडनी शरीर का बेहद संवेदनशील अंग है खास कर बात जब पर्यावरणीय विषैले तत्वों की हो जो हमारे खून के प्रवाह में प्रवेश कर जाते हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘क्योंकि अब बहुत से लोग पीएफएएस रसायनों और उनके विकल्प के तौर पर तैयार हो रहे जेनएक्स जैसे बड़े पैमाने पर बनाए जा रहे नए एजेंटों के संपर्क में आ रहे हैं, यह समझना बहुत जरूरी हो गया है कि क्या और कैसे ये रसायन गुर्दे की बीमारी के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं।’’ यह अध्ययन ‘क्लिनिकल जर्नल आॅफ द अमेरिकन सोसायटी ऑफ नेफ्रोलॉजी’ (सीजेएएसएन) में प्रकाशित हुआ है।

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