सावन के पवित्र महीने में इम्यूनिटी बढ़ाने, थकान दूर करने और बेहतर नींद के लिए रात में हल्दी का दूध (Golden Milk) पीना एक बेहद लोकप्रिय पारंपरिक नुस्खा माना जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि मानसून के मौसम में पाचन तंत्र (Digestive System) सुस्त होने के कारण आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा विज्ञान दोनों ही दूध और डेयरी प्रोडक्ट्स के सेवन पर खास सावधानी बरतने की सलाह देते हैं? अगर बात करें हल्दी का दूध पीने की तो सावन में रोजाना रात को हल्दी वाला दूध पीना आपकी सेहत के लिए कितना सही है और किसे इससे परहेज करना चाहिए ये जानना बेहद जरूरी है।

एम्स के पूर्व कंसल्टेंट और साओल हार्ट सेंटर के फाउंडर एंड डायरेक्टर डॉ बिमल झाजर के मुताबिक हल्दी वाला दूध, जिसे गोल्डन मिल्क भी कहा जाता है, भारतीय घरों में लंबे समय से घरेलू नुस्खे के रूप में इस्तेमाल किया जाता रहा है। सर्दी-जुकाम, बार-बार बीमार पड़ने और शरीर की सूजन जैसी समस्याओं में इसे फायदेमंद माना जाता है। हालांकि, इसका सेवन सही मात्रा और सही तरीके से करना जरूरी है। अक्सर लोग हल्दी वाला दूध बनाने के लिए उसमें काली मिर्च, दालचीनी और अदरक मिलाते हैं।  काली मिर्च में मौजूद पाइपरीन, हल्दी के सक्रिय तत्व कुरकुमिन के अवशोषण को बेहतर बनाने में मदद कर सकती है।

हल्दी का सेवन सेहत पर कैसा करता है असर

हल्दी में मौजूद कुरकुमिन एंटी-इंफ्लेमेटरी यानी सूजन कम करने वाला और एंटीऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर होता है। एक्सपर्ट के मुताबिक यह शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और फ्री रेडिकल्स के प्रभाव को कम करने में मदद कर सकता है, जिससे कोशिकाओं को नुकसान से बचाने में मदद मिलती है। हल्दी फ्री रेडिकल्स से होने वाले सेल डैमेज को कम करने में मदद कर सकती हैं। हल्दी के एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण इम्यूनिटी को स्ट्रांग करते हैं और बॉडी का बीमारियों से बचाव करते हैं। अगर आप हल्दी का सेवन दूध के साथ कर रहे हैं तो आमतौर पर ½ से 1 चाय का चम्मच हल्दी पर्याप्त मानी जाती है।

मानसून में हल्दी का दूध पीने से सेहत पर कैसा होता है असर

मानसून के मौसम में संक्रमण, सर्दी-जुकाम और गले की समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में सीमित मात्रा में हल्दी वाला दूध यानी गोल्डन मिल्क पीना कुछ लोगों के लिए फायदेमंद हो सकता है। हल्दी में मौजूद कुरकुमिन (Curcumin) में एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं, जबकि गर्म दूध गले को आराम पहुंचाने में मदद कर सकता है। हल्दी के एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण शरीर की इम्यूनिटी को सपोर्ट करते हैं और बीमारियों से बचाव करते हैं। रात में गुनगुना दूध पीने से कुछ लोगों को आराम महसूस होता है और नींद बेहतर आ सकती है। गुनगुना हल्दी वाला दूध गले की खराश से राहत दिलाता है। अगर बुखार, तेज खांसी या संक्रमण है तो आप दूध से परेशानी का इलाज नहीं करें बल्कि डॉक्टर से इलाज कराएं।

किन लोगों को हल्दी का सेवन सावधानी से करना चाहिए?

मानसून के दौरान कुछ लोगों में पाचन की गति धीमी पड़ सकती है, जिससे गैस, अपच और पेट फूलने जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। यदि आपको पहले से पेट या आंतों से जुड़ी समस्याएं हैं, तो अधिक मात्रा में हल्दी का सेवन करने से असहजता बढ़ सकती है। इसके अलावा, गॉलब्लैडर (पित्ताशय) में पथरी या अन्य बीमारी से पीड़ित लोगों को भी हल्दी का सेवन सावधानी से करना चाहिए। हल्दी पित्त के स्राव को बढ़ा सकती है, जिससे कुछ मरीजों में लक्षण बढ़ने का खतरा रहता है। इसलिए ऐसी स्थिति में नियमित या अधिक मात्रा में हल्दी लेने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर होता है। जिन्हें हल्दी से एलर्जी या बार-बार एसिडिटी, गैस या पेट की परेशानी होती है उन्हें हल्दी का सेवन बिना डॉक्टर की सलाह के नहीं करना चाहिए। गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाओं को नियमित रूप से अधिक मात्रा में हल्दी लेने से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। हल्दी का सेवन किसी भी बीमारी का इलाज या डॉक्टर की सलाह का विकल्प नहीं है। यदि आपको गॉलब्लैडर की बीमारी, पाचन संबंधी समस्या है, आप ब्लड थिनर दवाएं ले रहे हैं या किसी अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्या से पीड़ित हैं, तो हल्दी वाले दूध का नियमित सेवन शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह लें।